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पेट्रोल-डीजल पर सियासत: भाजपा का कांग्रेस शासित राज्यों पर निशाना, कांग्रेस ने केंद्र के फैसले को बताया लॉलीपॉप

Fri, 05 Nov 2021 11:15 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 05 Nov 2021 11:15 PM IST
सार

पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्र ने दिवाली से एक दिन पहले इनकी कीमतों पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कमी करने का फैसला लेने के बाद अब कांग्रेस शासित राज्यों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भी केंद्र पर निशाना साधा है। पढ़िए ये रिपोर्ट...

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Politics on Petrol Diesel BJP targets Congress rulled States and congress calls decision of reducing excise duty a lollipop
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से परेशान जनता को केंद्र सरकार ने दिवाली से एक दिन पहले राहत देने का फैसला लिया था और दोनों ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम किया था। इसके तहत पेट्रोल पर पांच रुपये और डीजल पर 10 रुपये की कमी की गई थी। केंद्र के इस फैसले के बाद कई राज्यों की सरकारों ने भी पेट्रोल और डीजल से वैट कम करने का निर्णय लिया था। हालांकि, कुछ राज्यों ने ऐसा करने से इनकार भी किया। 

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जिन राज्यों ने वैट में कमी नहीं की गई है उनमें महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल जैसे राज्य भी हैं। केरल और राजस्थान में जहां कांग्रेस की सरकार है वहीं, महाराष्ट्र में वह सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा है। भाजपा ने जहां कांग्रेस शासित राज्यों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी केंद्र सरकार के पेट्रोल-डीजल से उत्पाद शुल्क कम करने के फैसले को मजह एक स्टंट करार दिया है।
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भाजपा प्रवक्ता ने उठाए सवाल 
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी के पाकेटमार सरकार के ट्वीट पर तंज कसते हुए कहा कि असल में खुद कांग्रेस पाकेटमार की पर्याय बन गई है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस के नेता पेट्रोल और डीजल की कीमतों का मुद्दा उठा रहे थे। यहां तक कि राहुल गांधी भी लगातार इस मुद्दे को जोश के साथ उठाते रहे थे। क्या राहुल गांधी उसी जज्बे और जोश के साथ कांग्रेस शासित राज्यों के साथ-साथ दिल्ली और बंगाल सरकार को भी घेरेंगे।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी से साफ है कि उनका मकसद जनता को राहत देना नहीं था, बल्कि सिर्फ राजनीति करना था। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की सलाह देते हुए उनसे कांग्रेस शासित राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की

यूपीए सरकार की तरह उत्पाद शुल्क घटाए एनडीए 
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इसमें कोई खास कमी नहीं की गई है। यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.56 रुपये प्रति लीटर था। उन्हें इसमें और कमी करनी चाहिए। एलपीजी सिलिंडर के दाम अभी भी वैसे ही हैं और इनमें कमी लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे और 14 नवंबर से एक विशाल अभियान की शुरुआत करेंगे।


उत्पाद शुल्क कम करने का निर्णय केवल लॉलीपॉप
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। बघेल ने कहा कि जिस तरह यूपीए सरकार ने उत्पाद शुल्क को 30 रुपये से घटाकर नौ रुपये कर दिया था, वैसे ही अगर एनडीए सरकार भी करती तो पेट्रोल-डीजल के दाम निश्चित तौर पर कम होते। उन्होंने कहा कि पहले शुल्क को बढ़ाकर 30 रुपये कर देना और फिर उसमें से केवल पांच रुपये की कटौती करना केवल एक 'लॉलीपॉप' भर है।

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