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कोविड मौतों पर सियासत : 47 लाख मौतों के डब्ल्यूएचओ के दावे पर राहुल ने केंद्र को घेरा, कहा- विज्ञान झूठ नहीं बोलता

Fri, 06 May 2022 10:57 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 06 May 2022 10:57 AM IST
सार

राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि वह कोरोना के कारण प्रियजनों की मौत से दुखी लोगों का आदर करे और उन्हें 4 लाख रुपये की सहायता मुहैया कराए। 

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Politics on Covid deaths: Rahul surrounded Central govt on WHOs claim of 47 lakh deaths in India, said - science does not lie
राहुल गांधी - फोटो : ANI

विस्तार

देश में कोरोना से 47 लाख मौतें होने के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दावे से सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी व केंद्र पर निशाना साधा। राहुल ने लिखा- 'विज्ञान झूठ नहीं बोलता, मोदी बोलते हैं।'

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इसके साथ ही राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि वह कोरोना के कारण प्रियजनों की मौत से दुखी लोगों का आदर करे और उन्हें 4 लाख रुपये की सहायता मुहैया कराए। 

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डब्ल्यूएचओ का दावा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि पिछले दो वर्षों में लगभग 1.5 करोड़ लोगों ने या तो कोरोना वायरस से या स्वास्थ्य प्रणालियों पर पड़े इसके प्रभाव के कारण जान गंवाई है। विभिन्न देशों द्वारा मुहैया कराए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 60 लाख मौत के दोगुने से अधिक है।इनमें से ज्यादातर मौतें दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और अमेरिका में हुईं हैं।  वहीं भारत में ये आंकड़ा 47 लाख है। ये संख्या आधिकारिक आंकड़ों से करीब 10 गुना ज़्यादा है।

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नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने भारत में कोरोना से मौतों पर डब्ल्यूएचओ के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि जब पहले से ही भारत के पास कोरोना से हुईं मौतों का आंकड़ा मौजूद है, ऐसी स्थिति में उस मॉडल को तवज्जो नहीं दी जा सकती जहां पर सिर्फ अनुमान के मुताबिक आंकड़े जारी किए गए हों। उन्होंने कहा कि हम अपने लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली से सहमत नहीं हैं। 

 एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दारी किए गए आंकड़ों को गलत करार दिया है।  साथ ही उन्होंने भी डब्ल्यूएचओ की प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जन्म-मृत्यु के आंकड़े दर्ज करने का व्यवस्थित तरीका है। भारत में इसके जरिए कोविड के अलावा हर तरह की मौत के आंकड़े दर्ज होते हैं।

डब्ल्यूएचओ की है रिपोर्ट
गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ के तहत वैज्ञानिकों को जनवरी 2020 और पिछले साल के अंत तक मौत की वास्तविक संख्या का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक 1.33 करोड़ से लेकर 1.66 करोड़ लोगों की मौत या तो कोरोना वायरस या स्वास्थ्य सेवा पर पड़े इसके प्रभाव के कारण हुई। यह आंकड़ा देशों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और सांख्यिकी मॉडलिंग पर आधारित है। डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 से सीधे तौर पर मौत का विवरण नहीं मुहैया कराया है।

 डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयियस ने इस आंकड़े को ‘गंभीर’ बताया है। उन्होंने कहा है कि इससे देशों को सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों को भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित होना चाहिए।

भारत ने जताई आपत्ति
वहीं, भारत ने कोविड-19 से हुई मौतों के आकलन की पद्धति को लेकर सवाल उठाया है। भारत सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में कोरोना से मौत को लेकर नए आंकड़े जारी किए हैं। इस काल में भारत में आधिकारिक मौतों का आंकड़ा 5.2 लाख मौत का है। 

भारत ने गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रामाणिक डेटा की उपलब्धता के मद्देनजर कोरोनोवायरस महामारी से जुड़े अतिरिक्त मृत्यु अनुमानों को पेश करने के लिए गणितीय मॉडल के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने कहा कि इस्तेमाल किए गए मॉडलों की वैधता और मजबूती और डेटा की कार्यप्रणाली संग्रह संदिग्ध हैं।

भारत ने कहा है कि अधिक मृत्यु दर अनुमान को पेश करने के लिए गणितीय मॉडल के उपयोग पर भारत की कड़ी आपत्ति के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने भारत की चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित किए बिना ही अतिरिक्त मृत्यु दर अनुमान जारी किया है।  डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 47 लाख लोगों की मौत कोविड या स्वास्थ्य सेवाओं पर उसके असर के कारण हुई है। नई दिल्ली के सूत्रों के अनुसार, भारत इस मुद्दे को विश्व स्वास्थ्य सभा और अन्य आवश्यक बहुपक्षीय मंचों पर उठा सकता है।


येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में संक्रामक रोग विशेषज्ञ अल्बर्ट कू ने आंकड़ों को लेकर कहा कि किसी संख्या के बारे में निष्कर्ष पर पहुंचना जटिल काम है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के ये आंकड़े यह समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि हमें भविष्य में इस महामारी या अन्य का मुकाबला कैसे करना चाहिए। इसके लिए किस तरह की तैयारी रखनी चाहिए।

ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. भरत पंखानिया ने कहा कि खासकर गरीब देशों में कोविड-19 से हुई मौतों के बारे में सटीक संख्या का पता कभी नहीं चल सकेगा। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि में कोविड-19 से अधिक नुकसान हो सकता है।

 

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