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 राजनीतिक दलों को अब नकद नहीं एसबीआई बांड से मिलेगा चंदा 

Wed, 03 Jan 2018 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 03 Jan 2018 01:01 AM IST
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Political parties will not get cash now, SBI bonds will be donated
अरुण जेटली
चुनावों में काले धन का उपयोग नही हो और चंदे में पारदर्शिता आए, इसके लिए सरकार की तरफ से मंगलवार को इलेक्टोरल बांड की रूपरेखा को जारी कर अधिसूचित कर दिया गया। ये बांड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चुनिंदा शाखाओं से ली जा सकेंगी और इनका उपयोग विभिन्न राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए किया जाएगा। इसे कोई भी भारतीय या भारत की संस्था खरीद कर किसी भी राजनीतिक दल को दान कर सकेंगे।
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केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इलेक्टोरल बांड के बारे में लोकसभा में एक बयान दिया। इसके बाद संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि इन बांडों पर चंदा देने वाले का नाम नहीं होगा और इन्हें 1,000 रुपए, 10,000 रुपए, एक लाख रुपए, दस लाख रुपए और एक करोड़ रुपए के मूल्य में खरीदा जा सकेगा। हालांकि, इसका नाम बांड है, लेकिन इन बांडों पर कोई ब्याज देय नहीं होगा। 
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दान देने वाले को स्टेट बैंक से यह बांड खरीदना होगा

Political parties will not get cash now, SBI bonds will be donated
यह एक तरह से ब्याज मुक्त ऋण पत्र होंगे जो कि प्रोमिसरी नोट्स के तौर पर किसी राजनीतिक दल को दिया जा सकेगा। दान देने वाले को स्टेट बैंक से यह बांड खरीदना होगा और बैंक तब तक के लिए इस राशि का कस्टोडियन होगा जब तक राजनीतिक दल इन्हें भुना नहीं लेते। जिस दिन राजनीति दल बांड को भुनाने के लिए खाते में जमा करेगा, पैसा वहां हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

बयान में स्पष्ट किया गया है कि इलेक्टोरल बांड की वैधता अवधि सिर्फ 15 दिनों की होगी, और इसका उपयोग चुनाव आयोग से पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए ही किया जा सकेगा। इस बांड को राजनीतिक दल सिर्फ बैंक खाते में ही भुना सकते हैं। यह बांड साल में केवल चार बार यानि जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने के पहले 10 दिन तक ही बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।

जिस साल आम चुनाव होगा, उस वर्ष यह बांड 30 दिन तक बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। जेटली ने बताया कि बांड खरीदने वालों को स्टेट बैंक के साथ नो योर कस्टमर (केवाईसी) का अनुपालन करना अनिवार्य रुप से पालन करना होगा।
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