सियासी तपन तेज: 2022 के यूपी चुनाव से लेकर यूपीए की जगह नए मोर्चे और कश्मीर पर भी मंथन
देश में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। तमाम पक्ष व विपक्षी दलों के योद्धा 2022 के यूपी व अन्य राज्यों के चुनावों और उनके बाद होने वाले 2024 के आम चुनाव तथा जम्मू-कश्मीर को लेकर मंथन में जुट गए हैं। विपक्ष की मुख्य कवायद भाजपा को घेरना और उप्र से लेकर केंद्र तक फिर सत्ता में आने से रोकना है। हालांकि इन बैठकों में कांग्रेस नजर नहीं आई।
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कोरोना महामारी का कहर कुछ कम होते ही देश के सत्ता पक्ष व विपक्षी दलों के योद्धा सियासी जाजम पर जुटने लगे हैं। विपक्ष का मुख्य एजेंडा यूपी इलेक्शन-2022 में भाजपा को तीसरी बार जीत से रोकना और आम चुनाव 2024 के लिए एनडीए के खिलाफ तीसरा मोर्चा बनाना है। एक अन्य मुख्य मुद्दा जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया शुरू करना है। इन मसलों पर मंगलवार को गहन बैठकों के दौर चले। आइये जानते हैं इन बैठकों में क्या हुआ और कौन-कौन नेता शरीक हुए।
पवार के घर ढाई घंटे हुई बैठक, यशवंत सिन्हा को सौंपी कमान
सबसे अहम बैठक राकांपा प्रमुख शरद पवार के दिल्ली स्थित निवास पर हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई वाले यूपीए की जगह अब एक नए गठबंधन की कवायद तेज हो गई है। राकांपा नेता माजिद मेमन ने स्पष्ट किया कि बैठक भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों को एकजुट करने के लिए हुई, लेकिन पवार ने नहीं बुलाई थी। बैठक राष्ट्र मंच के प्रमुख यशवंत सिन्हा ने बुलाई थी और राष्ट्र मंच के सभी संस्थापक सदस्यों और कार्यकर्ताओं की मदद से बुलाई गई थी। कहा जा रहा है कि पवार बड़ा राजनीतिक कदम उठा रहे हैं और कांग्रेस का बहिष्कार किया गया है, यह गलत है।सपा नेता घनश्याम तिवारी ने बताया कि देश में एक वैकल्पिक विचारधारा तैयार करने की आवश्यकता है। विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक मजबूत वैकल्पिक विचारधारा वाली एक टीम गठित करने के लिए, संयोजक यशवंत सिन्हा को नियुक्त किया है। बैठक में भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम, यशवंत सिन्हा, गीतकार जावेद अख्तर, राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला शरीक हुए।
राहुल बोले-यह राजनीति पर चर्चा का समय नहीं
उधर, जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से राकांपा प्रमुख शरद पवार के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बोले कि यह राजनीति पर चर्चा करने का समय नहीं है।
यूपी संग्राम: भाजपा भी कस रही कमर, मौर्य के घर पहुंचे योगी
उधर, लखनऊ में यूपी के आगामी चुनाव को लेकर भाजपा व संघ भी कमर कस रहे हैं। लगातार बैठकों का दौर जारी है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष व प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह लखनऊ दौरे पर हैं। मंगलवार को पहले दिन मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार दोपहर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर उनके बेटे को शादी की बधाई देने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां केशव के परिजनों के साथ भोजन भी किया। उनके साथ उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष सहित कई अन्य लोग भी थे। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी ने इस विजिट से सरकार व संगठन में एकता का संदेश दिया है।
जम्मू में गुपकार गठबंधन की बैठक, दिल्ली बैठक में शरीक होने पर सहमति
उधर, जम्मू में मंगलवार को गुपकार गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इसमें दिल्ली में 24 जून को होने वाली सर्वदलीय बैठक को लेकर रणनीति तैयार की गई। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपने आवास पर पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) की बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी समेत वह सभी दल शामिल होंगे, जिन्हें न्योता मिला है। हमें कोई एजेंडा नहीं दिया गया है, इसलिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सामने हम अपना पक्ष रखेंगे। बता दें कि अब्दुल्ला पीएम मोदी की बैठक के लिए आमंत्रित 14 नेताओं में शामिल हैं।
महबूबा ने कहा-जो हमसे छीना, उस पर होगी बात
पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमसे जो छीन लिया गया है, हम उसके बारे में बात करेंगे। महबूबा का इशारा अनुच्छेद-370 की तरफ था। इसके साथ वहीद पारा का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाना चाहिए।
मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होगी जदयू? नीतीश दिल्ली रवाना
उधर मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें भी प्रबल हैं। इसमें जदयू भी शामिल हो सकती है। पटना से खबर है कि इस पर विचार के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। हालांकि जद (यू) ने आंख के इलाज के लिए मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने की बात कही है। जद (यू) 2013-2017 के दौरान एक अंतराल को छोड़कर लंबे समय से भाजपा की सहयोगी रही है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भगवा पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत प्राप्त किया था। इसके बाद मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों के लिए 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' के प्रस्ताव को नीतीश ने ठुकरा दिया था।