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कानों देखी: राहें जुदा जरूर हुईं लेकिन महाराज की इस अदा ने कांग्रेसियों की धड़कनें जरूर बढ़ा दीं!

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 21 Apr 2020 12:53 PM IST
सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य पर कांग्रेस लगाएगी दांव?
सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य पर कांग्रेस लगाएगी दांव? - फोटो : Amar Ujala
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सियासत भी गजब चीज है। कल तक हाथ पकड़ कर साथ घूमने वाले अब अगर एक दूसरे से फोन पर बात भी कर लें तो खबर बन जाती है। खबर ही नहीं बनती बल्कि सियासी गलियारों में कानाफूसी शुरू हो जाती है। वो भी तब जब अभी अलगाव हुए बहुत दिन नहीं हुए हैं।

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जी हां बात हो रही है महज एक महीना पहले कांग्रेस से नाता तोड़ कर भाजपा में गए ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के नए पैंतरे की। सिंधिया ने हाल ही में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जो कांग्रेस में उनके सखा रहे हैं, के साथ हाल ही में हुए अपने संवाद की जानकारी सार्वजनिक करके किसको संदेश दिया है, इसे लेकर कांग्रेस में खासी खुसुर-पुसुर हो रही है।



कुछ कांग्रेसी इसे ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक दांव भी मान रहे हैं। हुआ यह कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय चुनाव क्षेत्र गुना की एक छात्रा राजस्थान के कोटा में है। लॉकडाउन के कारण वह खुद को असहाय महसूस कर रही है। छात्रा मध्य प्रदेश जाना चाहती है।

उसके पिता ने इस संदर्भ में ज्योतिरादित्य सिंधिया से सहायता मांगी। ज्योतिरादित्य ने टेलीफोन पर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से बात की। पायलट ने सिंधिया को सहयोग का आश्वासन भी दे दिया। बाद में सिंधिया ने इस पूरी जानकारी को ट्वीट करके सार्वजनिक कर दिया।

सिंधिया के इस कदम पर कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि महाराजाओं का खेल है। शतरंज खलें या द्यूत क्रीड़ा, दूर ही रहना अच्छा है। वहीं कुछ कांग्रेसियों का मानना है कि सचिन पायलट से सिंधिया की नजदीकी कम नहीं हुई है। पायलट भी सिंधिया की तरह अपने मुख्यमंत्री गहलोत से खफा हैं। बाकी तो बस कयासबाजी है।

बैरी लॉकडाउन बीच में आयो

मालवा क्षेत्र के भाजपा के एक नेता हैरान हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा शिवराज मंत्रिमंडल के गठन के समय को लेकर सवाल उठाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की थी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी बड़े अरमान से फोन किया था। रिस्पांस काफी अच्छा था।

बताते हैं वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  डा. विनय सहत्रबुद्धे की गुडबुक में भी हैं, लेकिन अभी तक फोन नहीं आया। नेता जी के बारे में लोगों को पता है कि वह कई नावों पर सवारी कर लेते हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयावर्गीज से भी उनके रिश्ते ठीक हैं। अब उन्हें एक आशंका घेर रही है कि कहीं उनका लिस्ट में नाम ही न हो। बताते हैं वह भोपाल से दिल्ली आने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन उनके अरमानों पर पानी फेर दे रहा है।

नेतागिरी में हां में हां मिलाइए तो ठीक रहेगा

सबसे परेशान गरीब, मजदूर हैं, जो ज्यादातर दलित और पिछड़े हैं लेकिन इनकी सियासी ठेकेदार बसपा सुप्रीमों मायावती चुप हैं। उनकी पार्टी के कुछ नेताओं को यह अखर रहा है। एक पूर्व राज्यसभा सांसद का कहना है कि यही समय है, जब बसपा कुछ कह सकती है। क्योंकि मजदूर तबका परेशान है।

एक तो रोजी-रोटी बंद, ऊपर से फंसा, भूख से मर रहा है। सूत्र से यह पूछने पर कि अपनी नेता को सलाह क्यों नहीं देते? जनाब का कहना है कि मायावती से मिलना ही मुश्किल है। मिल भी लिए तो सलाह देना भी मुश्किल है। कदाचित सलाह दे दिए तो फिर शामत भी तय है।

नेतागिरी में अब तो चाहे जो पार्टी हो, बस हां में हां मिलाएं। बसपा हो या सपा, नेता जी मत बनिए। पहले भाजपाई नेता जी बन जाते थे, अब मोदी, योगी के जमाने में वह भी नहीं बन पा रहे हैं।

नेता जी बनने की थोड़ी सी गुंजाइश कांग्रेस में बची है, लेकिन पूरी पार्टी का ही बंटाधार है। सूत्र का कहना है कि उसके यहां तो जो नेता जी बना, सुबह होते ही पार्टी से बाहर।

अब भाजपा हमें हिंदुत्व सिखाएगी?

पालघर में दो संत और एक ड्राइवर की भीड़ द्वारा हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। शिवसेना के राज्यसभा सांसद के अनुसार गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पता लगते ही सख्त कदम उठाया। राज्यसभा सांसद को जब केंद्रीय गृह मंत्रालय से रिपोर्ट तलब करने के बाबत पूछा गया, तो कहा कि वह केंद्र कर सकता है।

इसमें केवल वह राज्य से यथा स्थिति की जानकारी मांगता है। इसके बाद जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस समेत अन्य वक्तव्य पर पूछा गया तो शिवसैनिक का स्वाभिमान जाग गया।

शिवसेना के इस वरिष्ठ नेता का कहना है कि शिवसेना के इतने बुरे दिन नहीं आ गए कि हमें भाजपा से हिंदुत्व सीखना पड़े? भाजपा जिस हिंदुत्व की पाठशाला में छात्र है उसके प्रधानाचार्य बाला साहब ठाकरे रहे हैं और शिवसेना उनकी वारिस है।
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