Police Commemoration Day: अर्धसैनिक बलों ने कई बार दिया सर्वोच्च बलिदान, मगर नहीं मिला 'एक्स मैन' का दर्जा
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विस्तार
21 अक्टूबर, 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों द्वारा धोखे से किए गए हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के दस जवानों की याद में हर साल 'पुलिस स्मरणोत्सव दिवस' मनाया जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को शहीदों को नमन करते हुए कहा, आज हमारा देश हर दिशा में प्रगति करता हुआ दिखाई दे रहा है। देशभर की पुलिस फोर्स और सीएपीएफ के 35,000 से ज्यादा जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' का कहना है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने हॉट स्प्रिंग्स से लेकर आज तक अनेक जगहों पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, मगर उन्हें सरकार ने 'एक्स मैन' का दर्जा तक नहीं दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय का वादा, सेना की तर्ज पर अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना, अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अभी तक लंबित
'पुलिस स्मरणोत्सव दिवस' पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, देश की आंतरिक सुरक्षा में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले पूर्वोत्तर, कश्मीर और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी घटनाएं होती थीं। पहले सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार दिए जाते थे, अब युवाओं को उनकी प्रगति के लिए विशेष अधिकार दिए जाते हैं। पहले पत्थर फेंकने में शामिल युवा अब सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न विकास परियोजनाओं में शामिल हो रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान पुलिसकर्मियों ने सराहनीय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि देशभर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बलिदान से भारत विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, अर्धसैनिक बलों की कई मांग अभी तक लंबित हैं। उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इन मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक ज्ञापन सौंपा गया है। फोर्सेस की भलाई से संबंधित मुद्दों को लेकर दो फरवरी 2021 को केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात हुई थी। गृह सचिव के समक्ष कई मांग रखी थी। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बताया, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अभी तक लंबित है। सीपीसी कैंटीन को जीएसटी से छूट देने के लिए कई बार आग्रह किया जा चुका है। इस मुद्दे की भी कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। अर्ध सैनिक कल्याण बोर्ड का गठन, सरदार पटेल के नाम पर अर्ध सैनिक स्कूलों की स्थापना, रिटायर्ड पर्सन को एक्स मैन का दर्जा व अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना, ये सभी मुद्दे ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं।
अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की हो स्थापना
पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, जब भारतीय सेना में झंडा दिवस कार्यक्रम आयोजित होता है, तो उसी तर्ज पर अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना क्यों नहीं की जा रही। ये मामला केंद्रीय गृह सचिव के संज्ञान में लाया गया था। उन्होंने आश्वासन भी दिया था कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गहराई से विचार कर रही है। बैठक में उन्होंने यह भरोसा दिलाया था कि 21 अक्तूबर को 'पुलिस स्मरणोत्सव दिवस' या 31 अक्तूबर को सरदार पटेल के जन्मदिन पर इस कोष की स्थापना कर दी जाएगी। अब दो साल पूरे होने को हैं, लेकिन पैरामिलिट्री परिवारों के लिए अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना नहीं हो पाई। इस तरह के कोष को स्थापित करने में किसी विशेष बजटीय प्रावधान की आवश्यकता नहीं है। आम भारतीयों द्वारा स्वेच्छा से झंडा दिवस कोष में दान दिया जाएगा। इस कोष की राशि का इस्तेमाल रिटायर्ड अर्द्धसैनिकों, शहीद परिवारों, विधवाओं, विरांगनाओं के बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, बेटियों की शादियां व वृद्ध मां-बाप के इलाज एवं पुनर्वास जैसे भलाई के कामों में किया जा सकेगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सिंह राणा ने कहा, अर्ध सेना झंडा दिवस कोष, सैनिक कल्याण बोर्ड व राज्यों की राजधानियों में अर्ध सैनिक स्कूलों की स्थापना में कोई बड़े बजट की आवश्यकता नहीं होती। इस पहले के लिए केवल एक ठोस इच्छा शक्ति की जरूरत है। उपरोक्त जायज मांगों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री, गृह राज्य मंत्री और यहां तक महामहिम राष्ट्रपति से मुलाकात कर गुहार लगाई गई, लेकिन परिणाम जीरो रहा। अब लाखों पैरामिलिट्री पहरेदारों की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर लगी हैं। उम्मीद कि इस बार जब प्रधानमंत्री मोदी, सरहदों पर अर्द्धसैनिकों के साथ दिवाली मनाएंगे, तो जवानों को उपहार स्वरूप दीपावली बोनांजा देंगे। उन सीआरपीएफ के दस शूरवीर योद्धाओं को, जिन्होंने 21 अक्तूबर 1959 को चीनी आक्रमणकारियों के साथ अदम्य साहस का परिचय देते हुए हॉट स्प्रिंग्स लद्दाख में सर्वोच्च बलिदान दिया था, यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।