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चिंताजनक: मानवीय गतिविधियों से पहाड़ों में मिट्टी का कटाव दस गुना बढ़ा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
Sat, 19 Jul 2025 07:56 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 19 Jul 2025 07:56 AM IST
सार
मानवीय गतिविधियों के कारण पहाड़ों में मिट्टी का कटाव दस गुना बढ़ा है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इससे वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
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पर्यावरण को मानवीय गतिविधि के कारण नुकसान
- फोटो : एडॉब स्टॉक / अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
हजारों वर्षों से पर्वतीय धरती पर मानव का दखल अब संकट के रूप में सामने आ रहा है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से खुलासा हुआ है कि कृषि, पशुपालन और जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव प्राकृतिक पुनरुत्पादन की तुलना में चार से दस गुना तेजी से बढ़ गया है। यह संकट सिर्फ मिट्टी तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक जल, कार्बन और जैव विविधता चक्र को भी प्रभावित कर रहा है।
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क्षरण की प्रक्रिया करीब 3,800 साल पहले शुरू हुई
सेंटर नेशनल डे ला रिसर्च साइंटिफिक (सीएनआरएस) के नेतृत्व में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह पता चला है कि इंसानी गतिविधियों विशेष रूप से कृषि, पशुपालन और भूमि उपयोग में बदलाव ने पर्वतीय क्षेत्रों की मिट्टी को असाधारण रूप से तेजी से क्षीण किया है। यह क्षरण महज हाल के दशकों की देन नहीं बल्कि यह प्रक्रिया करीब 3,800 साल पहले शुरू हो चुकी थी।
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मानवीय हस्तक्षेप ने मिट्टी के निर्माण और कटाव का संतुलन बिगाड़ा
इस बारे में शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि पहले जंगलों की कटाई और मवेशियों की आवाजाही से ऊंचाई वाली जमीन की मिट्टी क्षरित हुई और फिर रोमन काल के बाद हल चलाने जैसी तकनीकों के प्रसार से मध्यम और निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी मिट्टी के कटाव ने गंभीर रूप ले लिया। शोध पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पनास) में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार हिमयुग की समाप्ति के बाद से जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिट्टी के निर्माण और कटाव के बीच के संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। इससे मिट्टी का कटाव प्राकृतिक पुनर्निर्माण से औसतन तीन से दस गुना तेज गति से होने लगा है।
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फ्रांस से मिले सबूत, दुनिया से हुई पुष्टि
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने फ्रांस के सबसे बड़े पर्वतीय जलग्रहण क्षेत्र बोर्गेट झील की तलछट से लिथियम समस्थानिकों और जैव डीएनए के नमूनों का विश्लेषण किया। इन आंकड़ों की तुलना दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों से की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह संकट संपूर्ण वैश्विक पर्वतीय क्षेत्रों में एकसाथ नहीं बल्कि अलग-अलग समय पर शुरू हुआ।
खाद्य सुरक्षा पर असर
वैज्ञानिकों ने चेताया कि मिट्टी का अत्यधिक कटाव सिर्फ पारिस्थितिक तंत्र को नहीं बल्कि मानव जीवन की आधारभूत जरूरतों जैसे पानी की गुणवत्ता, कृषि उत्पादन और कार्बन अवशोषण को भी प्रभावित कर सकता है। कटाव से मिट्टी की उर्वरता खत्म होती है, जिससे खेती की उत्पादकता गिरती है और खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है।
संरक्षण की वैश्विक जरूरत
शोधकर्ताओं ने दुनिया भर की सरकारों और पर्यावरणीय संगठनों से अपील की है कि वे पर्वतीय क्षेत्रों में मिट्टी संरक्षण के प्रभावशाली उपाय लागू करें। साथ ही भूमि उपयोग की नीतियों में बदलाव, वन संरक्षण, और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को प्राथमिकता दें ताकि इस बढ़ते पारिस्थितिक संकट को समय रहते रोका जा सके।