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El Nino: अल-नीनो से निपटने के लिए PMO की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक, मंत्रालयों और राज्यों को दिए क्या निर्देश?

Wed, 08 Jul 2026 03:53 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 08 Jul 2026 03:53 AM IST
सार

अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मानसून की प्रगति, खरीफ फसलों की स्थिति, जलाशयों में उपलब्ध पानी और राज्यों की तैयारियों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आपात योजनाओं को अद्यतन किया गया है और नियमित निगरानी की जा रही है।

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प्रधानमंत्री कार्यालय ने अल नीनो पर की अहम बैठक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

खरीफ फसल के सीजन और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर अल-नीनो के संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्र की अध्यक्षता में मंगलवार को सेवा तीर्थ में एक उच्च स्तरीय बैठक में अल-नीनो से निपटने के लिए मंत्रालयों की तैयारियों की समीक्षा की गई और जरूरी निर्देश दिए गए।
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बैठक में कृषि, बिजली, सहकारिता, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, और मौसम विभाग (आईएमडी) समेत 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मौसम विभाग के निदेशक ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि गुजरात समेत कुछ राज्यों में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में हुई अच्छी बारिश से देश में बारिश की कमी घटकर -12 फीसदी रह गई है। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है क्योंकि अकेले जुलाई महीने में ही मानसून सीजन की 30 फीसदी से अधिक बारिश होती है।
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कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वर्षा, जलाशयों के जल स्तर, फसलों की बुआई, खाद-बीज की उपलब्धता इत्यादि की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आपातकालीन योजनाएं अपडेट कर दी गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों को मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की गई हैं।
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मानसून का आकलन कर कदम उठाएं
 प्रधान सचिव मिश्र ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे राज्यों के साथ मिलकर आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने कहा कि देरी से आए मानसून का संवेदनशील जिलों पर क्या असर पड़ा है, इसका तुरंत आकलन कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, जलाशयों के पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
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