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PMFBY: कैसे किसानों को मिल रहा है 1 रुपए का क्लेम? कृषि मंत्री ने अफसरों की लगाई क्लास, सरकार करेगी जांच
Mon, 03 Nov 2025 06:17 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 03 Nov 2025 06:17 PM IST
सार
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बैठक में महाराष्ट्र के कुछ किसानों को भी वर्चुअल जोड़कर गहराई से सीधे उनकी बात सुनी और अधिकारियों से इसके बारे में जवाब मांगा। शिवराज सिंह ने साफ तौर पर कहा कि हम किसानों को किसी भी हालत में परेशान नहीं होने देंगे।
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को क्लेम राशि मिलने पर आ रही दिक्कतों पर केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और अधिकारियों और बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए कि किसानों के साथ किसी भी तरह का अन्याय या मजाक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बैठक में महाराष्ट्र के कुछ किसानों को भी वर्चुअल जोड़कर गहराई से सीधे उनकी बात सुनी और अधिकारियों से इसके बारे में जवाब मांगा। शिवराज सिंह ने साफ तौर पर कहा कि हम किसानों को किसी भी हालत में परेशान नहीं होने देंगे। एक रुपये, तीन रुपये, पांच रुपये या 21 रुपये का फसल बीमा क्लेम मिलना किसानों के साथ मजाक है, सरकार ऐसा नहीं होने देगी। उन्होंने इस संबंध में पूरी जांच के आदेश दिए, साथ ही किसानों के हित में बीमा कंपनियों एवं अफसरों को सख्त निर्देश दिए।
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कृषि मंत्री ने कहा, किसानों को क्लेम जल्दी और एक साथ मिलना चाहिए तथा क्षति का आकलन सटीक प्रणाली से होना चाहिए, इसके लिए शिवराज सिंह ने योजना के प्रावधानों में आवश्यक होने पर बदलाव कर विसंगतियां दूर करने के निर्देश भी अफसरों को दिए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र के प्रवास के दौरान सीहोर जिले के किसानों से मिली शिकायतों को लेकर काफी गंभीर थे, साथ ही महाराष्ट्र के किसानों को नाममात्र की क्लेम राशि मिलने की बातों को लेकर भी चिंतित थे, इसलिए वे सोमवार सुबह विमान से दिल्ली पहुंचने के बाद सीधे कृषि भवन स्थित मंत्रालय पहुंचे और सबसे पहले प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े सारे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही सभी बीमा कंपनियों के उच्चाधिकारियों को भी उन्होंने फौरन तलब किया।
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शिवराज सिंह ने बैठक में कहा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, उनकी फसलों के प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने की स्थिति में सुरक्षा कवच के रूप में वरदान की तरह हैं, लेकिन साथ ही कुछ चीजें ऐसी हुई हैं कि जिससे इस महत्वपूर्ण योजना की बदनामी हुई है और मजाक भी उड़ता है तथा प्रोपेगंडा करने का मौका मिलता है। मंत्री ने सीहोर जिले के कुछ किसानों के नाम सहित बैठक में मौजूद अधिकारियों को उदाहरण देते हुए कहा कि इन किसानों को फसल बीमा कराने के बावजूद नुकसान होने पर जीरो लॉस दिखाया गया। वहीं क्लेम मिला एक रुपये एक अन्य किसान का नुकसान दिखाया गया 0.004806 प्रतिशत, केंद्रीय मंत्री ने किसानों की ओर से सवाल उठाया कि ये कौन-सा तरीका है क्षति मापने का। और, क्लेम पेमेंट भी एक रुपये मिला।
एक और किसान का भी नुकसान ठीक इसी तरह का बताया गया और क्लेम भी एक रुपये का मिला, अन्य किसानों की भी इसी तरह की समस्या शिवराज सिंह ने अफसरों के सामने रखते हुए पूछा कि क्या ये किसानों के साथ अन्याय नहीं है, क्या जस्टिफिकेशन हैं इसका, क्या ये मजाक नहीं है, क्या तरीका है ये...। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी बातों पर मैं गहराई में जाउंगा, फसल बीमा योजना कोई मजाक नहीं है। ये मजाक मैं नहीं चलने दूंगा। उन्होंने सीहोर कलेक्टर को भी बैठक से वर्चुअल जोड़ने का निर्देश देकर उनसे पूरी जानकारी ली और दिल्ली के अफसरों व कंपनी प्रतिनिधियों से सवाल किए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मिली शिकायतों पर इस तरह के सभी मामलों की फील्ड में जाकर पूरी जांच करने का आदेश प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सीईओ को दिया और कहा कि ये पड़ताल की जाए कि एक रुपये, दो रुपये, पांच रुपये क्लेम पेमेंट क्यों मिला है, वहीं बीमित किसानों के साथ ही स्थानीय कलेक्टर से भी बात की जाए, ताकि वास्तविकता सामने आएं। इसके अलावा, क्षति के आकलन का रिमोट सेंसिग का जो आधार है, उसमें प्रमाणिकता कितनी है, यह वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए तथा गाइड लाइन में भी बहुत कम राशि के लिए बीमा होने जैसे प्रावधान का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार इसे रिवाइज करें। उन्होंने कहा कि किसानों को क्लेम मिलने में देर नहीं लगना चाहिए, साथ ही शिवराज सिंह ने बीमा कंपनियों को भी निर्देश दिया कि नुकसान के सर्वे के समय उनका प्रतिनिधि भी जरूर उपस्थित रहना चाहिए, ताकि कोई गड़बड़ी नहीं होने पाएं व किसान को वास्तविक क्लेम मिल सकें।
बैठक में शिवराज सिंह ने कहा कि सभी राज्यों से समन्वय कर राज्यांश राशि समय पर जमा करवाई जाए, ताकि फसलों के नुकसान की स्थिति में पीड़ित किसानों को उनकी क्लेम राशि समय पर मिल सकें। वहीं जो राज्य ढिलाई बरत रहे हैं, उनसे 12 प्रतिशत ब्याज वसूला जाए, जैसा कि केंद्र ने किसानों के हित में बड़ा प्रावधान किया है।