PM Modi Interview: 'हमने सुधार को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू किया', पीएम ने कहा- यह बजट 'हम तैयार हैं' वाला
PM Modi Interview: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विशेष इंटरव्यू में सरकार के कामकाज, इस वर्ष के बजट के साथ तमाम मुद्दों पर बातचीत की है। पीएम मोदी ने इस दौरान निवेश और व्यापार समझौतों के साथ-साथ पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की नीतियों पर निशाना साधा है। पढ़ें...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्पादक व्यय को अपनी सरकार की पहचान बताते हुए रविवार को कहा कि हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में जानबूझकर अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों से बचते हुए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के जरिये बुनियादी ढांचे में निवेश किया गया है ताकि रोजगार सृजन और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को गति दी जा सके। विस्तार से पढ़ें पीएम मोदी का पूरा साक्षात्कार...
प्रश्न: पिछले एक महीने के भीतर भारत की वैश्विक सक्रियता में व्यापार समझौतों को लेकर तेज़ उछाल दिखा है। केंद्र में यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील और अमेरिका के साथ टैरिफ पर बड़ी प्रगति है। ये दोनों कदम भारत की अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा को कैसे बदलेंगे?
पीएम मोदी ने कहा, भारत की दुनिया के साथ भागीदारी और जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार तेज़ हुआ है। हाल के ये समझौते भले “हाल ही में” हुए लगें, लेकिन असल में ये एक लंबे बदलाव का नतीजा हैं कि घरेलू उद्योग का अधिक प्रतिस्पर्धी होना, बातचीत में आत्मविश्वास, और दुनिया के प्रति खुला दृष्टिकोण। आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में ये गुण बहुत कम देशों के पास हैं।
इन उपलब्धियों को समझने के लिए एक दशक पहले की स्थिति याद करना ज़रूरी है। यूपीए सरकार के दौर में भी कुछ व्यापार समझौतों की कोशिशें हुईं, लेकिन पूरी प्रक्रिया असमंजस और अस्थिरता से भरी रही। आर्थिक कुप्रबंधन की वजह से भारत आत्मविश्वास के साथ बातचीत की स्थिति में नहीं था। नतीजा ये हुआ कि वार्ता शुरू होती फिर टूट जाती। वर्षों की बातचीत के बावजूद ठोस परिणाम बहुत कम निकले।
ये भी पढ़ें: PM मोदी बोले: रिफॉर्म एक्सप्रेस ने बड़ी प्रगति की, पर मैं स्वभाव से पूरी तरह संतुष्ट होने वालों में नहीं
इसके उलट, 2014 के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिए आर्थिक पुनरुत्थान की दिशा में काम किया। आर्थिक बुनियाद मज़बूत की, नियम-आधारित व्यवस्था बनाई और राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत स्पष्टता और सुधारों को प्राथमिकता दी। जब दुनिया ने देखा कि भारत स्थिर है, स्पष्ट है और तेज़ी से बढ़ रहा है तो निवेश और साझेदारी की इच्छा स्वाभाविक रूप से बढ़ी।
हमारे सुधारों से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों को ताकत मिली। एमएसएमई में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इसी भरोसे और क्षमता के कारण कई देशों को भारत के साथ व्यापार समझौते करने में वास्तविक लाभ दिखा।
पुराने दृष्टिकोण और हमारे दृष्टिकोण का फर्क आप यूरोपीय संघ वाले समझौते से समझ सकते हैं। यह मुद्दा पिछली सरकार के समय भी चर्चा में था, बातचीत भी चली, लेकिन निर्णायक “विन-विन” डील को अंतिम रूप हमारी सरकार ने दिया।
पिछले कुछ वर्षों में हमने एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण एफटीए नेटवर्क बनाया है। आज भारत के 38 साझेदार देशों के साथ एफटीए हैं जो भारत के व्यापार इतिहास में एक बड़ा और अभूतपूर्व पड़ाव है। इन समझौतों की खास बात ये है कि ये अलग-अलग महाद्वीपों तक फैले हैं और अलग-अलग आर्थिक ताकत वाले देशों को शामिल करते हैं। इससे हमारे उत्पादकों और निर्माताओं को कई बाज़ारों में टिकाऊ अवसर मिलते हैं।
इन समझौतों से बड़े बाज़ार भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए खुले हैं। उदाहरण के तौर पर भारत-यूके एफटीए और भारत-ईयू एफटीए हमारे इन देशों में होने वाले 99% निर्यात पर टैरिफ खत्म करने की दिशा में हैं। ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ हुए समझौतों के बाद दोनों के साथ हमारा व्यापार दोगुना हुआ है।
भारत का सेवा क्षेत्र और उसके पेशेवर दुनिया में पहले से मजबूत पहचान रखते हैं। भारत कई क्षेत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्र का हब बन चुका है। ये समझौते नियामकीय स्पष्टता, बेहतर फ्रेमवर्क और भागीदार देशों में अवसरों व मोबिलिटी को और मज़बूत करते हैं। हमारा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है और ये समझौते भारत व भारतीय उत्पादों को वैश्विक सप्लाई चेन में और गहराई से जोड़ेंगे। इससे भारतीय उत्पादकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा और देश में समृद्धि बढ़ेगी।
ये समझौते ऐसे समय पर आए हैं जब मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर नई छलांग के लिए तैयार हैं। इनके जरिए युवाओं के लिए अवसरों की एक बड़ी दुनिया खुलेगी। मुझे भरोसा है कि हमारी वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा दुनिया पर असर छोड़ेगी और जब हमारे युवा अपने काम से भागीदार देशों के आम लोगों के मन में भरोसा जगा देंगे, तो फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इन समझौतों की अहमियत केवल टैरिफ घटने में नहीं है, बल्कि सप्लाई-चेन इंटीग्रेशन और एडवांस्ड इकॉनमीज़ में मार्केट एक्सेस में है। ये धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग टैरिफ को उदार बनाते हैं, सर्विस इंटीग्रेशन को गहरा करते हैं और टेक्सटाइल, फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए रास्ते खोलते हैं। यानी ये सिर्फ “ट्रेड नंबर” बढ़ाने की बात नहीं ये संरचनात्मक परिवर्तन की नींव रखते हैं।
ये FTAs घरेलू सुधारों को बाहरी प्रतिबद्धताओं से जोड़ते हैं। निर्यात के अवसर बढ़ाते हैं, प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले टैरिफ नुकसान कम करते हैं, और भारतीय कंपनियों को वैश्विक वैल्यू चेन में मजबूत तरीके से जोड़ते हैं। यही भारत को एक अधिक खुली, आत्मविश्वासी और विश्व से गहराई से जुड़ी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाते हैं और यही विकसित भारत 2047 की दीर्घकालिक दिशा से मेल खाता है।
प्रश्न: हाल के व्यापार समझौतों में MSME का जिक्र प्रमुखता से हो रहा है, जो पहले नहीं दिखता था। क्या यह MSME की बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का संकेत है, या फिर वैश्विक वैल्यू चेन में छोटे उद्योगों को जोड़ने के लिए एक जानबूझकर किया गया नीति बदलाव?
पीएम मोदी बोले, हम इन ऐतिहासिक व्यापार समझौतों में ताकत की स्थिति से प्रवेश कर रहे हैं। “मेड इन इंडिया” की सोच ने हमारे एमएसएमई में नया आत्मविश्वास और ऊर्जा भरी है। जब आप कई व्यापार समझौतों का हिस्सा होते हैं, तो जरूरी हो जाता है कि भारतीय उत्पाद और सेवाएँ दुनिया के मानकों पर प्रतिस्पर्धी हों। “जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट” का विचार युवाओं, स्टार्टअप्स और छोटे-मझोले उद्यमों में खासा असर छोड़ रहा है।
व्यापार प्रतिस्पर्धा केवल टैरिफ नहीं होती। असली चुनौती होती है वर्किंग कैपिटल, सर्टिफिकेशन, टेक्नोलॉजी अपनाना और वैश्विक मानकों के अनुसार कंप्लायंस। हमारे FTAs का उद्देश्य नॉन-टैरिफ बाधाएँ घटाना और एमएसएमई के लिए बाजार पहुँच बढ़ाना है खासकर टेक्सटाइल, लेदर, प्रोसेस्ड फूड, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, हैंडीक्राफ्ट और जेम्स-ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में।
लक्ष्य साफ है कि एमएसएमई को “परिधि” पर नहीं रहना है। उन्हें तकनीकी रूप से अपग्रेड होकर, वैश्विक रूप से इंटीग्रेट होकर, निर्यात-उन्मुख उद्यम बनना है जो भारत की ग्लोबल वैल्यू चेन भागीदारी की रीढ़ बनें।
आज कई वैश्विक ब्रांड चाहे स्मार्टफोन हों या एविएशन, भारतीय एमएसएमई को अपनी सप्लाई चेन में जोड़ चुके हैं। इसलिए एमएसएमई की बढ़ती भूमिका दो बातों को दिखाती है:
1. हमारी एमएसएमई पहले से ज़्यादा निर्यात-तैयार हुई हैं, और
2. हमारी ट्रेड पॉलिसी जानबूझकर एमएसएमई को वैश्विक एकीकरण के केंद्र में रख रही है।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूके, ईयू और अमेरिका जैसे देशों के साथ हुए समझौतों से खासकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में एमएसएमई को लगभग शून्य या बहुत कम टैरिफ पर निर्यात के अवसर मिलेंगे। इससे टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, इंजीनियरिंग, प्रोसेस्ड फूड, केमिकल्स, हैंडीक्राफ्ट और जेम्स-ज्वेलरी को सीधा लाभ होगा।
ये समझौते केवल व्यापार बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि एमएसएमई को वैश्विक बाजार में “स्थायी तौर पर जमाने” के लिए हैं। साथ ही, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन के लिए फंडिंग के रास्ते खुलेंगे और पर्यावरणीय टिकाऊपन पर भी मदद मिलेगी।
इससे भारत एक भरोसेमंद साझेदार और भारतीय एमएसएमई भरोसेमंद सप्लायर के रूप में स्थापित होंगे। यानी उत्तर स्पष्ट है कि दोनों: एमएसएमई की क्षमता बढ़ी भी है और नीति स्तर पर एमएसएमई को केंद्र में लाने का स्पष्ट फैसला भी हुआ है। व्यापक स्तर पर ये सब विकसित भारत 2047 की दिशा में किए गए सोच-समझकर कदम हैं।
साथ ही, घरेलू स्तर पर भी एमएसएमई को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइज़ को बैंक क्रेडिट में बढ़त और वित्तीय प्रणाली की एसेट क्वालिटी में सुधार का ज़िक्र है। इस बजट में MSME की एक पुरानी समस्या…सस्ती वर्किंग कैपिटल की उपलब्धता… पर काम किया गया है: क्रेडिट गारंटी बढ़ाना, TReDS के जरिए रिसीवेबल फाइनेंसिंग मजबूत करना, GST प्रक्रियाओं को सरल बनाकर वर्किंग कैपिटल फँसने से बचाना, और एमएसएमई लेंडिंग को प्राथमिकता देना। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी छोटे उद्योगों के लिए बेहतर क्रेडिट असेसमेंट फ्रेमवर्क लागू किए हैं।
ये भी पढ़ें: अगले दशक के लिए क्या हैं भारत की बड़ी प्राथमिकताएं?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताए यह तीन अहम सुधार, जानें
बजट 2026-27: रणनीतिक प्राथमिकताएं
प्रश्न: सरकार ने हाल ही में संसद में बजट 2026-27 पेश किया। इस साल भी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर जारी है। इस बजट में आपकी सरकार के कुछ प्रमुख रणनीतिक फैसले क्या हैं?
पीएम मोदी ने कहा, लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाला इंफ्रास्ट्रक्चर उपेक्षित रहा है जिसका असर आम लोगों और व्यवसायों दोनों पर पड़ा। टूटा-फूटा और पुराना ढांचा “विकसित भारत” के लक्ष्य के साथ मेल नहीं खाता। इसलिए हमने स्पीड, स्केल और भविष्य-दृष्टि के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को एक मिशन की तरह आगे बढ़ाया।
पिछले दशक में भारत ने शायद अपने इतिहास की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर-बिल्डिंग ड्राइव देखी है और इसमें “गुणवत्ता” पर जोर भी अभूतपूर्व रहा। सबसे अहम बात यह कि हमने इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल आज के लिए नहीं, भविष्य के लिए तैयार किया।
आज जब भारत हजारों विमानों का ऑर्डर दे रहा है, एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी हुई है। जब शहरीकरण बढ़ रहा है, मेट्रो वाले शहर चार गुना से ज्यादा हुए हैं। जब ग्रामीण आकांक्षाएं बढ़ रही हैं, ग्रामीण सड़कें और इंटरनेट कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ रही है। और जब 38 देशों के साथ बड़े व्यापार समझौते हो चुके हैं और व्यापार बढ़ने की संभावना है तो फ्रेट कॉरिडोर, पोर्ट्स और कोस्टल कनेक्टिविटी का विस्तार भी उसी रणनीति का हिस्सा है। आर्थिक सर्वेक्षण ने बताया है कि कैपिटल एक्यूम्यूलेशन, लेबर फॉर्मलाइजेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर भारत की संभावित विकास दर को 7% तक ले गए हैं। यही बजट की सोच का आधार है।
2026-27 के लिए कुल कैपेक्स लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये है-जो 2013 के मुकाबले करीब पाँच गुना है। यह एक स्पष्ट नीति विकल्प है: अल्पकालिक लोकलुभावन कदमों के बजाय ऐसे एसेट्स में निवेश, जो उत्पादकता, रोजगार और भविष्य की आर्थिक क्षमता बढ़ाएँ।
रेलवे के लिए लगभग 3 लाख करोड़ का पूंजीगत प्रावधान है हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, फ्रेट क्षमता और सेफ्टी पर फोकस के साथ। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें “साउथ हाई-स्पीड डायमंड कॉरिडोर” भी है जो कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी को लाभ देगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार यात्रियों के रूट्स को डीकंजेस्ट करेगा और लॉजिस्टिक्स लागत घटाएगा। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन एक दशक में लगभग 500% बढ़ा है।
इस बजट का एक अहम पहलू “ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस” है कागजी कार्रवाई कम करना, अपराधों को डी-क्रिमिनलाइज करना, कंप्लायंस घटाना। क्योंकि हमारी सोच में राज्य “रोकने वाला” नहीं, “सक्षम बनाने वाला” है और नागरिकों पर भरोसा हमारी नीति का आधार है।
बही-खाता नहीं, विजन डॉक्यूमेंट
प्रश्न: यह बजट किसी सामान्य “बही-खाता” दस्तावेज़ जैसा नहीं लगता, बल्कि भारत के भविष्य का विज़न स्टेटमेंट लगता है। खासकर अभी क्यों? क्या यह “अब या कभी नहीं” जैसी स्थिति थी?
पीएम मोदी ने कहा, मैं आदरपूर्वक कहूंगा कि हमारे बजट कभी “साधारण बही-खाता” सोच के साथ बने ही नहीं। यह हमारी कार्यशैली नहीं है। मुझे जनता का आशीर्वाद लंबे समय से मिला है और मैंने 25 वर्षों तक शासन का नेतृत्व किया है पहले राज्य में और अब केंद्र में। अगर इन वर्षों को ध्यान से देखें तो साफ दिखता है कि हमारा काम छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं चलता। इसके पीछे एक व्यापक रणनीति, कार्ययोजना और निरंतर अमल की प्रक्रिया रहती है कि “Whole of Nation” सोच के साथ।
2014 के बाद बजट केवल आंकड़ों की किताब नहीं रहा। हर बजट में इरादा, रोडमैप, टाइमलाइन और कदमों की कड़ी रही और फिर हम उसके इम्प्लीमेंटेशन पर काम करते हैं, अगले बजट में उसे अगले स्तर पर ले जाते हैं। इन वर्षों में हमने पहले की सरकारों से रह गई संरचनात्मक कमियों को भरा, बड़े सुधार किए, गरीबों के लिए अवसर बढ़ाए, युवाओं को सशक्त किया, महिलाओं की भूमिका मज़बूत की और किसानों की गरिमा व सुरक्षा को प्राथमिकता दी। साथ ही, टेक-ड्रिवन लेकिन इंसान-केंद्रित कल्याण व्यवस्था बनाई जो आखिरी व्यक्ति तक पहुँचे।
यह बजट इसी यात्रा का अगला स्तर है ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को नई गति देने के लिए, और तेजी से बदलती दुनिया में युवाओं को अवसरों के लिए तैयार करने के लिए। मैंने कुछ साल पहले लाल किले से कहा था कि “यही समय है, सही समय है।” आज यह भावना केवल सरकार की नहीं रही, यह राष्ट्र का सामूहिक संकल्प बन चुकी है।
यह मजबूरी का “अब या कभी नहीं” पल नहीं है। यह तैयारी और प्रेरणा से पैदा हुआ “हम तैयार हैं” का पल है। इसलिए इसे केवल बजट 2026 नहीं समझना चाहिए यह 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। जैसे 1920 के दशक के फैसलों ने 1947 की नींव रखी, वैसे ही आज के फैसले 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।
प्रश्न: बजट से लगता है सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग पर दांव और बढ़ा दिया है इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, कंटेनर, बायोफार्मा, टेक्सटाइल। पहले के प्रयासों से क्या नतीजे आए? और मैन्युफैक्चरिंग रोजगार व विकास का सबसे बड़ा इंजन क्यों बन सकता है?
पीएम मोदी ने कहा, औद्योगीकरण और शहरीकरण के साथ बड़ी संख्या में युवा गांवों और कस्बों से शहरों की ओर बढ़ते हैं—वैश्विक उद्योगों में काम करने की आकांक्षा के साथ। उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में क्रांति जरूरी है। यह काम बहुत पहले होना चाहिए था, लेकिन पहले की सरकारों में इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं हुए। हमने अपना दृष्टिकोण बदला।
विकसित भारत की कल्पना में मैन्युफैक्चरिंग हमेशा केंद्र में रहा है। कोई भी देश केवल उपभोक्ता बनकर तेज़ी से नहीं बढ़ सकता। उसे उच्च गुणवत्ता वाले, वैश्विक प्रतिस्पर्धी उत्पादों का निर्माता बनना पड़ेगा। इसी सोच से ‘Make in India’ शुरू हुआ और आगे चलकर PLI जैसी पहलें आईं जो हमारे औद्योगिक आधार को मजबूत कर रही हैं, हमें ग्लोबल वैल्यू चेन में जोड़ रही हैं, और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर रही हैं।
नतीजे साफ दिखते हैं। भारत के गुड्स एक्सपोर्ट ने कई बार पुराने रिकॉर्ड तोड़े हैं। एक दशक पहले जो देश लगभग सारे मोबाइल फोन आयात करता था, आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है और एक्सपोर्ट उत्पादन का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
आईटी, डेटा सेंटर और AI
प्रश्न: आईटी सेक्टर और डेटा सेंटर को कुछ टैक्स इंसेंटिव मिले हैं। इससे भारत का टेक पावरहाउस और AI लीडर बनने का लक्ष्य कैसे आगे बढ़ेगा?
पीएम मोदी ने कहा, दुनिया में तकनीक का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब केवल डिजिटल अपनाना काफी नहींडिजिटल नेतृत्व जरूरी है। जैसे UPI के जरिए हमने डिजिटल पेमेंट में नेतृत्व दिखाया, वैसे ही अगली लहर डेटा और AI की है। इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में हम उपनिवेशवाद के कारण पीछे रह गए। पिछली मैन्युफैक्चरिंग रिवोल्यूशन में उपेक्षा के कारण। लेकिन इस डेटा-ड्रिवन टेक रिवोल्यूशन में हमें लीड करना है। भारत 140 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया के सबसे बड़े डेटा जनरेटर और उपभोक्ताओं में है। इतना बड़ा और विविध डेटा पूल तभी शक्ति बनता है जब उसे सुरक्षित और उत्पादक तरीके से उपयोग किया जाए। इसलिए सुरक्षा, स्किल्स, सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर सब पर समान ध्यान है।
डेटा सुरक्षा के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून लाया गया। स्किल्स के लिहाज से भारतीय युवाओं की पहचान दुनिया में पहले से मजबूत है। अब ज़रूरत है उस बुनियादी ढांचे की जो AI को चलाता है और वो है डेटा सेंटर। AI को कंप्यूटिंग पावर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। आज क्षमता बढ़ाकर हम भारतीय AI इकोसिस्टम की नींव रख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों ने निवेश की घोषणाएँ की हैं। बजट के टैक्स इंसेंटिव निवेश को तेज़ करेंगे, लागत घटाएंगे और भारत को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाएंगे। इसका परिणाम भी युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के रूप में सामने आएगा।
अन्य वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.