त्रिपुरा चुनाव के बाद कर्नाटक को मथेंगे PM मोदी और शाह
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त्रिपुरा में चुनावी शोर थमने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कर्नाटक की ओर रुख करेंगे। दक्षिण के इस किले को कांग्रेस से छीनने की कवायद में पार्टी ने मोदी और शाह के जरिए पूरे कर्नाटक को मथने की तैयारी कर रखी है। केंद्रीय चुनाव आयोग के जरिए राज्य विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी करने से पहले भाजपा की रणनीति सूबे के लगभग सभी प्रमुख इलाकों में पीएम मोदी और अमित शाह की रैलियां आयोजित कराने की हैं।
इसी लिहाज से दोनों नेताओं के कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि 19 फरवरी से पीएम मोदी कर्नाटक में ताबड़तोड दौरे कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे। तो पार्टी की रणनीति को जमीन पर अंजाम देने के लिए खुद अमित शाह अपना ज्यादा से ज्यादा समय कर्नाटक में लगाएंगे।
मोदी की 4 रैलियां तय, शाह का भी बना तीन दिवसीय कार्यक्रम
आयोग के जरिए कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजाने से पहले राज्य भाजपा ने सूबे में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पीएम मोदी की 4 रैलियां तय की हैं। 19 फरवरी के बाद से अगले 20 दिनों में कर्नाटक के लिए पीएम मोदी की 4 रैलियां तय की गई हैं। 19 फरवरी को मोदी कर्नाटक के मैसूर में भाजपा की रैली को संबोधित करेंगे। तो 27 फरवरी को दावनगीरी, 4 मार्च को बीजापुर और 13 मार्च को रायचूर में उनकी रैलियों का आयोजन रखा गया है।
ऐसे ही दौरे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी तय किए हैं। सूबे की चुनावी रणनीति से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार 20 से 22 फरवरी तक शाह कर्नाटक के दौरे पर रहेंगे। इन तीन दिनों में वे अपना पूरा ध्यान तटवर्ती कर्नाटक में केंद्रित रखेंगे। यह इलाका भगवा परिवार के लिए मजबूत गढ़ माना जाता है। इन इलाकों में सघन दौरे कर शाह जनता के बीच रैलियों को संबोधित करने के अलावा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के लिए उनका सम्मेलन करेंगे।
अप्रैल में होने है कर्नाटक विधानसभा के चुनाव
कर्नाटक विधानसभा चुनाव अप्रैल माह के अंत में होने की संभावना है। सूत्र बताते हैं कि 20 मार्च के आसपास केंद्रीय चुनाव आयोग कर्नाटक विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान करेगा। सूबे की विधानसभा में 224 सीटें हैं। भाजपा के लिए कर्नाटक दक्षिण भारत का ऐसा राज्य है जहां भाजपा की सरकार रही है।
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की यहां हार उसकी अपनी करतूतों के वजह से हुई थी। बीएस येद्दियूरप्पा को मुख्यमंत्री के पद से हटाकर भाजपा ने सदानंद गौड़ा और जगदीश शेट्टार पर दांव लगाया था। मगर जनता ने इन्हें खारिज कर दिया। तब कांग्रेस की जीत के बाद सिद्दारमैया सूबे के मुख्यमंत्री बने। इस दफे भाजपा ने अपनी भूल सुधारते हुए दोबारा से बीएस येद्दियूरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है।
सूबे के प्रभावशाली लिंगायत बिरादरी में उनकी मजबूत पैठ है। मगर देश के अन्य हिस्सों की तरह दक्षिण को भी कांग्रेस मुक्त बनाने की कवायद में भाजपा अकेले येद्दियूरप्पा के ही भरोसे नहीं रहना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी रणनीतिकारों ने पीएम मोदी और अमित शाह के आयोजनों की संख्या बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे भी कर्नाटक में बढ़ाए जाएंगे।