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PM Speech: प्रधानमंत्री बोले, 10 देशों के पास एक जैसे सुरक्षा उपकरण होंगे तो नहीं रहेगा अनोखापन, सभी देश खुद करें निर्माण
Fri, 25 Feb 2022 02:44 PM IST
मेघा चौधरी
न्यूज डेस्क/अमर उजाला/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क/अमर उजाला/नई दिल्ली
Published by: मेघा चौधरी
Updated Fri, 25 Feb 2022 02:44 PM IST
सार
शुक्रवार को देश के रक्षा क्षेत्र की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यदि 10 देशों के पास एक ही प्रकार के उपकरण होंगे तो उनमें कोई अनोखापन नहीं होगा। पीएम मोदी ने देश की सेनाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना भी डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का महत्व समझाते हुए बड़े निर्णय लेती हैं।
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पीएम मोदी
- फोटो : ANI
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विस्तार
शुक्रवार को देश के रक्षा क्षेत्र की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि 10 देशों के पास एक ही प्रकार के उपकरण होंगे तो उनमें कोई अनोखापन नहीं होगा। यह तभी संभव होगा जब सुरक्षा उपकरण सभी देश खुद बनाएंगे। ऐसा करने से उपकरणों में अनोखापन और आश्चर्य तत्व मौजूद रहेंगे।
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प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि बीते कुछ वर्षों से भारत अपने रक्षा क्षेत्र में जिस आत्मनिर्भरता पर बल दे रहा है। उसका कमिटमेंट आपको इस वर्ष के बजट में भी दिखेगा। गुलामी के कालखंड में और आजादी के तुरंत बाद भी हमारी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की ताकत बहुत थी। दूसरे विश्व युद्ध में भारत में बने हथियारों ने बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि बाद के वर्षों में हमारी ताकत कमजोर होती गई।
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पीएम मोदी ने कहा कि इस साल के बजट में देश के भीतर ही रिसर्च, डिजाइन और डेवलपमेंट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का एक वाइब्रेंट इकोसिस्टम विकसित करने का ब्लूप्रिंट है। जब हम बाहर से अस्त्र-शस्त्र लाते हैं, तो उसकी प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि जब वो हमारे सुरक्षाबलों तक पहुंचते हैं, तब तक उसमें से कई पुराने हो चुके होते हैं। इसका समाधान भी 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' और 'मेक इन इंडिया' से ही संभव है।
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देश में बना साजो-सामान बढ़ाता है सैनिकों का आत्मविश्वास
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश की सेनाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना भी डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का महत्व समझाते हुए बड़े निर्णय लेती हैं। आज हमारी फौज के पास भारत में बने साजो-सामान होते हैं तो उनका आत्मविश्वास, उनका गर्व भी नई ऊंचाई पर पहुंचता है। इसमें हमें सीमा पर डटे जवानों की भावनाओं को भी समझना चाहिए। भारत में बनी चीजों को लेकर सैनिकों में अलग स्वाभिमान होता है। इसलिए हमें हमारे रक्षा उपकरणों के लिए अपने सैनिकों की भावना का आदर करना चाहिए। ये हम तभी कर सकते हैं जब हम आत्मनिर्भर होंगे।
IT क्षेत्र को बताया देश का सामर्थ्य
पीएम ने भारत की IT की ताकत को बहुत बड़ा सामर्थ्य बताया। उन्होंने कहा कि इस ताकत को हम अपने रक्षा क्षेत्र में जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही सुरक्षा में हम आश्वस्त होंगे। जैसे साइबर सेक्योरिटी अब सिर्फ डिजिटल वर्ल्ड तक सीमित नहीं रह गई है। ये राष्ट्र की सुरक्षा का विषय बन चुका है। पहले के समय में बाहर की कंपनियों से जो सामान खरीदा जाता था उसमें अक्सर भांति-भांति के आरोप लगते थे। हर खरीदे से विवाद पैदा होता था। अलग-अलग मैन्युफैक्चरर के बीच जो कंपटीशन होता है, उससे भ्रष्टाचार के दरवाजे भी खुलते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान से हमें इसके भी समाधान मिलते हैं।
ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों पर भी बोले पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि जब पूरी निष्ठा के साथ संकल्प लेकर हम आगे बढ़ते हैं तो क्या परिणाम आते हैं, इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां हैं। पिछले साल 7 नई डिफेंस पब्लिक अंडरटेकिंग का निर्माण किया गया था। आज ये तेजी से अपने बिजनेस का विस्तार कर नए मार्केट में पहुंच रही हैं।
डिफेंस एक्सपोर्ट में हुई 6 गुना वृद्धि
बीते 5-6 सालों में डिफेंस एक्सपोर्ट में 6 गुना वृद्धि होने की बात भी पीएम ने कही। उन्होंने कहा कि आज हम 75 से भी ज्यादा देशों को मेड इन इंडिया डिफेंस उपकरण और सेवा दे रहे हैं। मेक इन इंडिया को सरकार के प्रोत्साहन का परिणाम है कि पिछले 7 सालों में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए 350 से भी अधिक, नए इंडस्ट्रियल लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। जबकि 2001 से 2014 के 14 वर्षों में सिर्फ 200 लाइसेंस जारी हुए थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रायल, टेस्टिंग और प्रमाणीकरण की व्यवस्था का पारदर्शी, समयबद्ध, व्यावहारिक और और निष्पक्ष होना एक जीवंत रक्षा क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए एक स्वतंत्र प्रणाली, समस्याओं को दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। ये देशभक्ति का काम है, ये देश सेवा का काम है। मुनाफे के बारे में बाद में सोचिए, देश को ताकतवर कैसे बनाया जाए, पहले इसे सोचिए। आज हमारी सेना के तीनों अंग, बड़ी उमंग और उत्साह के साथ इस काम के लिए प्रोत्साहन दे रहे हैं।