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'चुनाव आएंगे-जाएंगे, देश अमर रहेगा': पीएम मोदी की इन लाइनों पर क्यों याद आए अटल बिहारी? पढ़ें 1996 का भाषण

Thu, 05 Feb 2026 08:26 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 05 Feb 2026 08:26 PM IST
सार

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में भाषण देते हुए 2047 तक विकसित भारत का विजन साझा किया और उन्होंने कहा कि चुनाव आएंगे, जाएंगे, देश अजर-अमर रहेगा। इसके बाद ही पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के 1996 वाले भाषण को याद किया जाने लगा।

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PM Modi Speech in Rajya Sabha Reiterates Atal Bihari Vajpayee slogan; targets opposition
पीएम मोदी। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए करीब 1 घंटा 27 मिनट का भाषण दिया। इस दौरान विपक्ष ने नारेबाजी की, लेकिन पीएम मोदी ने शांति बनाए रखते हुए अपने दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साझा किया।

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'चुनाव आएंगे-जाएंगे, देश अजर-अमर रहेगा'
पीएम मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत बनाना है। उन्होंने वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। पीएम ने कहा कि हम दिशा तय करके चलते हैं। हमारे लिए अगला चुनाव लक्ष्य नहीं होता, हमारा लक्ष्य 2047 का विकसित भारत है। चुनाव आएंगे, जाएंगे, देश अजर-अमर रहेगा। आज जो गर्भ में बालक है, उसे देखकर भी मैं काम करता हूं कि समृद्ध भारत देकर जाऊं। जिसके बाद से ही 1996 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक भाषण को याद किया जाने लगा।
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भारत की वैश्विक स्थिति और क्रिटिकल मिनरल्स
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत अब दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ अब राजनीतिक हथियार बन गए हैं और भारत इस पर भी काम कर रहा है ताकि कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

पढ़ें अटल बिहारी का 1996 का भाषण
गौरतलब है कि 1996 में 13 दिन चली सरकार के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 31 मई 1996 को लोकसभा में यह भाषण दिया था। इसमें उन्होंने कहा, ''देश आज संकटों से घिरा है और ये संकट हमने पैदा नहीं किए हैं। जब-जब कभी आवश्यकता पड़ी, संकटों के निराकरण में हमने उस समय की सरकार की मदद की है। उस समय के प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव जी ने भारत का पक्ष रखने के लिए मुझे विरोधी दल के नेता के नाते जिनेवा भेजा था और पाकिस्तानी उसे देखकर चमत्कृत रह गए। उन्होंने कहा कि ये कहां से आए हैं। क्योंकि उनके यहां विरोधी दल का नेता ऐसे राष्ट्रीय कार्यों में भी सहयोग देने के लिए तैयार नहीं होता, वो हर जगह अपनी सरकार को गिराने में लगा रहता है। ये हमारी परंपरा नहीं है, ये हमारी प्रकृति नहीं है। और मैं चाहता हूं कि ये परंपरा बनी रही, ये प्रकृति बनी रहे। सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।"

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