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जय शाह मामले में जदयू नेता शरद यादव का हमला, कहा- अपने लोगों पर मोदी का कानून काम नहीं करता
डिजिटल ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Sat, 21 Oct 2017 04:34 PM IST
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अमित शाह के पुत्र जय शाह के मामले को लेकर जदयू नेता शरद यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। जय मामले के जरिए पीएम मोदी पर सियासी हमला बोलते हुए यादव ने कहा है कि शाहजादे हैं, शाहजादे के बारे में देश बड़ा मुरीद रहता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की ये सरकार विपक्ष के लोगों पर सारे नियम कायदे, कानून और संस्थानों को लागू करती है। लेकिन अपनों पर नहीं, इसकी लंबी फेहरिस्त है।
जदयू नेता ने कहा कि सबका साथ सबका विकास और अच्छे दिन के वायदे के साथ केंद्र की सरकार सत्ता में आई थी। मगर किसान, व्यपारी और युवा से लेकर देश का हर तबका परेशान है। किसान आत्म हत्या को मजबूर हैं तो व्यापारी का व्यापार चौपट है।
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ताज पर सवाल उठाने वालों पर तंज
ताजमहल पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए शरद यादव ने कहा कि ताज को दुनिया सातवें आश्चर्य के रूप में देखती है।
मगर जाने कैसे-कैसे कुछ लोग हैं जो कि ताज पर सवाल उठा रहे हैं और अयोध्या में दीये जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश धरोहर दूसरों की देन हैं। संसद भवन हों या राष्ट्रपति भवन इसे अंग्रेजों ने बनाया है। यही नहीं समूची लूटियन दिल्ली अंग्रेजों की देन है।
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उन्होंने कहा कि केंद्र की ये सरकार विपक्ष के लोगों पर सारे नियम कायदे, कानून और संस्थानों को लागू करती है। लेकिन अपनों पर नहीं, इसकी लंबी फेहरिस्त है।
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जदयू नेता ने कहा कि सबका साथ सबका विकास और अच्छे दिन के वायदे के साथ केंद्र की सरकार सत्ता में आई थी। मगर किसान, व्यपारी और युवा से लेकर देश का हर तबका परेशान है। किसान आत्म हत्या को मजबूर हैं तो व्यापारी का व्यापार चौपट है।
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ताज पर सवाल उठाने वालों पर तंज
ताजमहल पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए शरद यादव ने कहा कि ताज को दुनिया सातवें आश्चर्य के रूप में देखती है।
मगर जाने कैसे-कैसे कुछ लोग हैं जो कि ताज पर सवाल उठा रहे हैं और अयोध्या में दीये जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश धरोहर दूसरों की देन हैं। संसद भवन हों या राष्ट्रपति भवन इसे अंग्रेजों ने बनाया है। यही नहीं समूची लूटियन दिल्ली अंग्रेजों की देन है।
सरकार के कुशासन से आधी आबादी त्रस्त
शरद यादव ने कहा कि सबका साथ सबका विकास के वायदे से आई सरकार के कुशासन का आलम यह है कि देश की आधे से ज्यादा आबादी त्रस्त है। देश में सबसे बड़ी आबादी किसानों की है।
मगर देश का किसान आत्म हत्या को मजबूर है। यादव ने कहा कि भाजपा ने देश के किसानों को उसके लागत मूल्य का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था। मगर मामला जस का तस है।
किसानों की आय दोगुना करने के कवायद में स्वामीनाथन आयोग कि सिफारिशें लागू करने के दावे किए गए थे। लेकिन यह भी चुनावी वायदे तक सिमट कर रह गया। उल्टे सरकार ने गेंहू और दाल के मामले में गलत नीति अपना कर किसानों के जीवन से खिलवाड़ किया है।
जदयू नेता के अनुसार गेंहू की नई फसल आने वाली है। मगर सरकार ने गेंहू का आयात कर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले गेंहू पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत था। केंद्र सरकार ने इसे शून्य कर दिया।
जब संसद में सरकार पर दबाव बनाया गया तब उसने गेंहू पर आयात शुल्क की दर 10 प्रतिशत तय की और भारी मात्रा में गेंहू का आयात कर लिया है। उन्होंने कहा कि दाल के मामले में भी ऐसा ही है। सरकार के जरिए भारी मात्रा में दाल आयात होने की वजह से देशी दाल पर दबाव है। इससे किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा।
सरकार के आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना
शरद यादव ने केंद्र सरकार के आर्थिक नीति की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि जीएसटी और नोटबंदी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। व्यपारियों की दिवाली फीकी रही है।
उन्होंने कहा कि पुराने वायदों को भूला पीएम मोदी ने अब वर्ष 2022 तक के लिए केदारनाथ का नया वायदा किया है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए जदयू नेता ने कहा कि पीएम कहते हैं कि देश जवान है।
लेकिन देश के नौजवानों के पास रोजगार नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद रोजगार के सबसे कम अवसर इस सरकार के शासन में सृजित हुए हैं। भारत सरकार में तो वर्ष में केवल 400 से 500 ही नौकरियां निकली हैं।
मगर देश का किसान आत्म हत्या को मजबूर है। यादव ने कहा कि भाजपा ने देश के किसानों को उसके लागत मूल्य का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था। मगर मामला जस का तस है।
किसानों की आय दोगुना करने के कवायद में स्वामीनाथन आयोग कि सिफारिशें लागू करने के दावे किए गए थे। लेकिन यह भी चुनावी वायदे तक सिमट कर रह गया। उल्टे सरकार ने गेंहू और दाल के मामले में गलत नीति अपना कर किसानों के जीवन से खिलवाड़ किया है।
जदयू नेता के अनुसार गेंहू की नई फसल आने वाली है। मगर सरकार ने गेंहू का आयात कर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले गेंहू पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत था। केंद्र सरकार ने इसे शून्य कर दिया।
जब संसद में सरकार पर दबाव बनाया गया तब उसने गेंहू पर आयात शुल्क की दर 10 प्रतिशत तय की और भारी मात्रा में गेंहू का आयात कर लिया है। उन्होंने कहा कि दाल के मामले में भी ऐसा ही है। सरकार के जरिए भारी मात्रा में दाल आयात होने की वजह से देशी दाल पर दबाव है। इससे किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा।
सरकार के आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना
शरद यादव ने केंद्र सरकार के आर्थिक नीति की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि जीएसटी और नोटबंदी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। व्यपारियों की दिवाली फीकी रही है।
उन्होंने कहा कि पुराने वायदों को भूला पीएम मोदी ने अब वर्ष 2022 तक के लिए केदारनाथ का नया वायदा किया है। पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए जदयू नेता ने कहा कि पीएम कहते हैं कि देश जवान है।
लेकिन देश के नौजवानों के पास रोजगार नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद रोजगार के सबसे कम अवसर इस सरकार के शासन में सृजित हुए हैं। भारत सरकार में तो वर्ष में केवल 400 से 500 ही नौकरियां निकली हैं।