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Lifestyle for the Environment Life: लाइफ आंदोलन का आगाज कर पीएम मोदी ने धरती के अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर

Mon, 06 Jun 2022 06:32 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Mon, 06 Jun 2022 06:32 AM IST
सार

भारतीय संस्कृति के पर्यावरण संरक्षण के संस्कारों की बात करते हुए मोदी ने कहा, चक्रीय अर्थव्यवस्था हमारी संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न अंग है और रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल के सिद्धांत हमारे जीवन में गुंथे हैं। 

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PM Modi Launching the Lifestyle for the Environment Life emphasized on adopting a friendly lifestyle on earth
PM Modi and Bill Gates - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक पहल के तहत रविवार को ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरमेंट (लाइफ)’ आंदोलन की शुरुआत की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस कार्यक्रम में शामिल हुए मोदी ने कहा, लाइफ के पीछे विचार यह है कि हम ऐसी जीवनशैली अपनाएं जो हमारी धरती के अनुकूल हो और इसे नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा, ‘लाइफ मिशन’ अतीत से सीखता है, वर्तमान में संचालित होता है और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करता है।

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भारतीय संस्कृति के पर्यावरण संरक्षण के संस्कारों की बात करते हुए मोदी ने कहा, चक्रीय अर्थव्यवस्था हमारी संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न अंग है और रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल के सिद्धांत हमारे जीवन में गुंथे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में हर देवी-देवता से पौधे और जानवर जुड़े हुए हैं और यहां प्रकृति को देवता के तुल्य माना गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के 1.3 अरब लोगों के आभारी हैं जिनके कारण वह देश में पर्यावरण के लिए कई अच्छी चीजें करने में सफल हुए हैं।
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पीएम ने कहा, हमारी धरती की चुनौतियां जगजाहिर हैं और समय की मांग है कि सतत विकास सुनिश्चित करने वाले वाले मनुष्य-केंद्रित सामूहिक प्रयास और मजबूत कार्य किए जाएं। प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के कॉप-26 सम्मेलन में उन्होंने ही लाइफ की अवधारणा पेश की थी।
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इस मौके पर एक धरती, कई प्रयास (वन अर्थ-मेनी एफर्ट्स) का नारा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, भारत पर्यावरण को बेहतर बनाने और वैश्विक कल्याण को और मजबूती देने के लिए पूरा समर्थन देने को तैयार है।

पीएम ने कहा, महात्मा गांधी ने शून्य कार्बन जीवनशैली की बात की थी। आइए अपने दैनिक जीवन में हम ज्यादा स्थाई विकल्पों को चुनें। आइये हम रियूज, रिड्यूस और रिसाइकिल के सिद्धांत का पालन करें। हमारी धरती एक है लेकिन हमारे प्रयास कई होने चाहिए।

भारत के प्रयासों से प्रेरित हूं : बिल गेट्स
कार्यक्रम में शामिल हुए माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयासों और भारतीय नेतृत्व से वह प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, लाइफ आंदोलन और सामूहिक प्रयास की इसकी क्षमता के बारे में जानने के लिए बेहद उत्सुक हूं। ग्रीनहाउस गैसों को खत्म करने के लिए हमें नई प्रौद्योगिकी और सभी की भागीदारी की जरूरत है।

वैश्विक पर्यावरण पहल का केंद्र : यूएनईपी प्रमुख
यूएनईपी की वैश्विक प्रमुख इनगेर एंडरसन ने लाइफ की शुरुआत का स्वागत करते हुए कहा, 1 अरब से ज्यादा लोगों और नवोन्मेष और उद्यमिता की एक पूरी पीढ़ी के साथ भारत वैश्विक पर्यावरण पहल का केंद्र बन गया है।

गतिज ऊर्जा के साथ काम कर रहा है भारत : स्टेनर
यूएनडीपी के वैश्विक प्रमुख एचिम स्टेनर ने इस मौके पर कहा, भारत जैसे देश वैश्विक मंच पर निर्णायक पर्यावरण गतिविधियों में गतिज ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं।

  • इसमें ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’, ‘आपदा लोच अवसंरचना गठजोड़’ और ‘एक सूर्य एक विश्व एक ग्रिड’ जैसी पहलें शामिल हैं।
  • लाइफ आंदोलन की शुरुआत के साथ ‘लाइफ ग्लोबल कॉल फॉर पेपर्स’ पहल की शुरुआत हुई है जिसके तहत शिक्षविदों, विश्वविद्यालयों व अनुसंधान संस्थानों से इस बारे में विचारों और सुझावों को आमंत्रित किया जाएगा।

प्राकृतिक खेती चुनौतियों का बड़ा समाधान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ पर एक कार्यक्रम में कहा कि प्राकृतिक खेती में भी आज की चुनौतियों के लिए बहुत बड़ा समाधान है। हमने तय किया है कि गंगा किनारे बसे गांवों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशाल कॉरिडोर बनाएंगे। औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर हमने सुना है। हमने नया कॉरिडोर शुरू किया है। इससे हमारे खेत तो रसायन मुक्त होंगे ही, नमामि गंगे अभियान को भी नया बल मिलेगा।

मिट्टी की सेहत सुधरने से किसानों की लागत में आठ से 10 प्रतिशत की बचत हुई है और उपज में बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वस्थ हो रही है तो उत्पाद भी बढ़ रहा है। सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की वजह से और अटल योजना की वजह से देश के अनेक राज्यों में मिट्टी की सेहत भी संवर रही है। पिछले आठ वर्षों में भारत के वन क्षेत्र में 20 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है और वन्यजीवों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। बाघ, शेर, तेंदुआ, हाथी, सभी की संख्या देश में बढ़ रही है।

पीएम ने की सद्गुरु की तारीफ, कहा- भारत की मिट्टी की ताकत से दुनिया को कराया परिचित
पीएम मोदी ने ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, सदगुरु जग्गी वासुदेव के मिट्टी बचाओ अभियान की तारीफ की। अभियान को मानवता के लिए एक महान सेवा बताते हुए पीएम ने सद्गुरु की मोटरसाइकिल यात्रा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के कारण दुनिया ने मिट्टी के प्रति प्रेम विकसित कर लिया होगा। साथ ही चुटकी ली कि उन्होंने भारतीय मिट्टी की ताकत को भी देख लिया होगा। सद्गुरु ने पीएम को सेव सॉयल नीति हैंडबुक भी भेंट की।


 
 27 देशों से होकर उनकी अकेले मोटरसाइकिल की 100 दिवसीय यात्रा का 75वां दिन था। अभियान ने अब तक 2.5 अरब लोगों से संपर्क किया है और 74 देश अपने देश की मिट्टी को बचाने के लिए कार्यवाही करने को सहमत हो गए हैं। भारत में 15 लाख से ज्यादा बच्चों ने देश की मिट्टी और उनके सामूहिक भविष्य को बचाने के लिए कार्यवाही करने हेतु प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है।

वहीं सद्गुरु ने कहा कि किसी समाधान को हासिल करने के लिए सारे नागरिकों को खड़ा होना चाहिए और इसे ठीक करने के लिए सरकार से अपेक्षित दीर्घकालिक पहल का समर्थन करना चाहिए। इस अभियान का मकसद देशों पर जोर डालना है कि तत्काल नीति सुधारों के जरिए कृषि भूमि में कम से कम 3-6 प्रतिशत जैविक तत्व का होना जरूरी बनाया जाए। इस न्यूनतम जैविक तत्व के बिना मृदा वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मिट्टी की मृत्यु पक्की है, एक ऐसी घटना जिसे वे ‘मिट्टी-विलोपन’ बता रहे हैं।

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