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सेवा तीर्थ: जिन भवनों का पीएम ने किया उद्घाटन वो कहां और क्यों बने, जहां से मंत्रालय चल रहे उनका क्या होगा?

Fri, 13 Feb 2026 07:34 PM IST
संध्या स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Fri, 13 Feb 2026 07:34 PM IST
सार

सेवा तीर्थ क्या है? यह परिसर क्यों खास है? इसे सेवा तीर्थ नाम क्यो दिया गया? सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना क्या है? इस योजना में किन-किन चीजों का पुनर्विकास शामिल है? इसके लिए कितना बजट आवंटित किया गया? अब तक इस योजना के तहत कितना काम हो चुका है? नए परिसर बनने के बाद पुराने परिसरों का क्या होगा?

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PM modi inaugurates new pmo office known as seva tirth project of central vista project
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास दोनों का नाम बदल चुका है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पीएम कार्यालय का उद्घाटन किया जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है। इसी के साथ कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन किया गया। सेवा तीर्थ परिसर में पीएम कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को एक ही जगह रखा गया है। 

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वहीं, नए कर्तव्य भवन 1 और 2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के दफ्तर स्थापित किए जाएंगे। यह परिसर भी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना का हिस्सा है। सरकार के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक समन्वय, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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ऐसे में यह जानना अहम है कि  सेवा तीर्थ क्या है? यह परिसर क्यों खास है? इसे सेवा तीर्थ नाम क्यो दिया गया? सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना क्या है? इस योजना में किन-किन चीजों का पुनर्विकास शामिल है? इसके लिए कितना बजट आवंटित किया गया? अब तक इस योजना के तहत कितना काम हो चुका है? नए परिसर बनने के बाद पुराने परिसरों का क्या होगा?

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सेवा तीर्थ क्या है?

प्रधानमंत्री के नए कार्यालय को सेवा तीर्थ का नाम दिया गया है। पहले प्रधानमंत्री का कार्यालय साउथ ब्लाक में मौजूद था। अब इसे सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए बनाए गए नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस परिसर को सेवा तीर्थ का नाम दिया गया है। इसी सेवा तीर्थ के अंदर पीएम कार्यालय के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS), कैबिनेट सचिवालय को भी एक ही स्थान पर हैं। पहले यह सभी कार्यालय अलग-अलग स्थानों से संचालित हुआ करते थे। अब सभी को एक ही छत के नीचे रखा गया है। 

कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन

सेवा तीर्थ के साथ-साथ पीएम मोदी ने दो और परिसरों का उद्घाटन किया है। इसे कर्तव्य भवन 1 और 2 नाम दिया गया है। इन भवनों में प्रमुख मंत्रालयों को जगह मिलेगी। कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य, जनजातीय कार्य सहित कई अहम मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुरानी इमारतों में फैले सरकारी दफ्तरों के कारण समन्वय की चुनौतियां, बढ़ती रखरखाव लागत और कार्य दक्षता से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं। नए समेकित परिसर से इन चुनौतियों को दूर करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह परिसर क्यों खास है?

दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, केंद्रीकृत स्वागत प्रणाली और सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र बनाए गए हैं, जो सहयोग, दक्षता और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देंगे। इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और उच्च-प्रदर्शन भवन संरचना जैसी पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली जैसी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

इसे सेवा तीर्थ नाम क्यों दिया गया?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस उद्घाटन को भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में एक "परिवर्तनकारी मील का पत्थर" बताया, जो आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के दृष्टिकोण को दर्शाता है। मोदी सरकार ने बीते 12 वर्षों में कई भवनों और स्थलों के नाम और स्थानों में बदलाव किया है। कुछ प्रमुख परिवर्तनों में प्रधानमंत्री कार्यालय को साउथ ब्लॉक से नवनिर्मित सेवा तीर्थ परिसर में स्थानांतरित करना, केंद्रीय सचिवालय का नाम बदलकर कर्तव्य भवन करना, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना, रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग करना और देश भर में विभिन्न राजभवनों और राजनिवासों को अब लोक भवन या लोक निवास के रूप में नामित करना शामिल है।

सेंट्रल विस्टा क्या है? 

नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 3.2 किमी लंबे क्षेत्र को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। दिल्ली के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में शामिल इस इलाके की कहानी 1911 से शुरू होती है। उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था। कलकत्ता उनकी राजधानी थी, लेकिन बंगाल में बढ़ते विरोध के बीच दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का एलान किया। दिल्ली में अहम इमारतें बनाने का जिम्मा मिला एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को। इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया। ये प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के कैपिटल कॉम्प्लेक्स और पेरिस के शान्स एलिजे से प्रेरित था। ये तीनों प्रोजेक्ट नेशन-बिल्डिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे।

लुटियंस और बेकर ने उस वक्त गवर्नमेंट हाउस (जो अब राष्ट्रपति भवन है), इंडिया गेट, काउंसिल हाउस (पुराना संसद भवन), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और किंग जॉर्ज स्टैच्यू (जिसे बाद में वॉर मेमोरियल बनाया गया) का निर्माण किया था। आजादी के बाद सेंट्रल विस्टा एवेन्यू की सड़क का भी नाम बदल दिया गया और किंग्सवे राजपथ बन गया। इसका नाम भी अब कर्तव्य पथ हो गया है।

सेंट्रल विस्टा के अंदर क्या-क्या आता है?
इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल और बीकानेर हाउस आते हैं

 

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना क्या है? 

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना में इस पूरे क्षेत्र को नए सिरे से विकसित करना शामिल है। इसमें मौजूदा कुछ इमारतों में कोई बदलाव नहीं होगा तो कुछ को किसी और काम में इस्तेमाल किया जाएगा, कुछ को रिनोवेट किया जाएगा तो कुछ को गिराकर उनकी जगह नई इमारतें बनाई जाएंगी। सेंट्रल विस्टा का ही हिस्सा सेवा तीर्थ का निर्माण पूरा होने के बाद आज इसका उद्घाटन पीएम मोदी द्वारा किया गया है। 

इस इलाके में स्थित छह इमारतें ऐसी है जिसमें इस योजना के तहत कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इनमें राष्ट्रपति भवन, हैदराबाद हाउस, इंडिया गेट, रेल भवन, वायु भवन और वॉर मेमोरियल शामिल हैं। वहीं, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक दोनों को नेशनल म्यूजियम में बदला जाएगा। संसद की पूरानी इमारत को पुरातात्विक धरोहर में बदल दिया जाएगा। मौजूदा जामनगर हाउस को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में बदल दिया जाएगा।

परियोजना में अब तक क्या-क्या हुआ

इसमें नए संसद भवन, कर्तव्य पथ, उप-राष्ट्रपति भवन, एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव और नया सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के लिए भवन शामिल थे। इन भवनों को कर्तव्य भवन नाम दिया गया है। 2022 में कर्तव्य पथ का निर्माण पूरा किया गाया, नए संसद भवन का 2023 में उद्घाटन हुआ, 2024 में उप-राष्ट्रपति भवन का उद्घाटन हुआ। 2025 में पीएम मोदी द्वारा कर्तव्य भवन 3 का उद्घाटन किया। यहां गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दफ्तरों को संचालित किया जा रहा है। आज 13 फरवरी 2026 को  एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव का उद्घाटन हुआ जिसे सेवा तीर्थ नाम दिया गया है। इसमें पीएम कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS), कैबिनेट सचिवालय और इंडिया हाउस शामिल हैं। इसके साथ कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन आज किया गया है। इस परियोजना पर कुल 608 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 

नए परिसर बनने के बाद पुराने परिसर का क्या होगा

अब सवाल ये है कि नए संसद भवन बनने के बाद पूराने भवन और नार्थ और साउथ ब्लॉक में खाली हुए दफ्तरों का क्या होगा। तो सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत  नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में नया नेशनल म्यूजियम बनने वाला है, जिसका नाम युगे युगीन भारत नेशनल म्यूजियम होगा। इसमें सिमेट्रिकल इमारतों के दो ब्लॉक को म्यूजियम स्पेस में बदलना शामिल है, ताकि हजारों साल पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को दिखाने वाला एक नया नेशनल म्यूजियम बनाया जा सके। इसे बनाने के लिए 9 दिसंबर, 2024 को नेशनल म्यूजियम और फ्रांस म्यूजियम डेवलपमेंट के बीच एक एग्रीमेंट साइन किया गया है।


 
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