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नडियाद की जनता की राय: पीएम मोदी ने सरदार पटेल को दिलाई पहचान, कांग्रेस ने नहीं दिया उनका हक
Wed, 30 Nov 2022 03:55 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, नडियाद
एएनआई, नडियाद
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 30 Nov 2022 03:55 AM IST
सार
31 अक्टूबर, 2018 को भारत के लौह पुरुष पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा लगवाई गई। तभी से हर साल सरदार पटेल की जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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सरदार वल्लभभाई पटेल
- फोटो : Social media
विस्तार
गुजरात का नडियाद धरती पुत्र सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मस्थली होने की वजह से सुर्खियों में रहा है। एएनआई की टीम नडियाद पहुंची सरदार पटेल के घर का दौरा किया जहां उनका जन्म हुआ था।
स्थानीय निवासी मनीष देसाई ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि पीएम की वजह से सरदार पटेल को जानने में लोग अधिक रुचि ले रहे हैं। मनीष पटेल के परिजनों की अनुपस्थिति में घर की देखभाल करते हैं। एएनआई को मनीष ने बताया कि पहले उनकी जयंती पर केवल कुछ ही लोग आते थे और दीया जलाकर चले जाते थे, लेकिन अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनने से बड़ी संख्या में लोग यह जानने के लिए आते है कि उन्होंने देश की आजादी के लिए क्या किया।
स्थानीय निवासी हर्षल पटेल ने कहा कि सरदार की विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वह एक महान एकीकरणकर्ता थे। कांग्रेस पार्टी चाहती तो उन्हें बहुत पहले सम्मानित कर सकती थी। 2014 में भाजपा ने सरदार को उनके कार्यो के अनुसार पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल अपने लाभ के लिए सरदार पटेल के नाम का उपयोग करना चाहती थी। वहीं, गिरीश बारोट ने कहा कि कांग्रेस ने पटेल को वह सम्मान नहीं दिया जो मिलना चाहिए था। उनका भारत के लिए एक बड़ा योगदान था। गांधी परिवार ने उन्हें हक नहीं दिलाया, जबकि उनकी संपत्ति, सड़कें आदि सभी गांधी परिवार के नाम पर थीं। यहां तक की संसद में सरदार पटेल का चित्र भी नरेंद्र द्वारा लगाया गया था। नडियाद में प्रैक्टिस कर रहे एक वकील निर्मल ने कहा कि सरदार एक बैरिस्टर भी थे और स्थानीय स्तर पर प्रैक्टिस करते थे। अब भी जिला अदालत में उनके द्वारा हस्ताक्षरित कागजात गुजरात सरकार द्वारा विरासत के रूप में संरक्षित हैं।
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2018 में लगाई गई भारत के लौह पुरुष की सबसे ऊंची प्रतिमा
31 अक्टूबर, 2018 को भारत के लौह पुरुष पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा लगवाई गई। तभी से हर साल सरदार पटेल की जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रतिमा के निर्माण में करीब 2,989 करोड़ का खर्च आया। 182 मीटर की यह वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष नाम दिया था, लेकिन इतिहास ने उनके साथ न्याय किया है। स्थानीय लोगों को लगता है कि उनके बारे में विस्तार से बताया जाना चाहिए और भारत की आजादी में उनके योगदान के बारे में इतिहास की किताबें अनुचित हैं।
पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को संगठित
पटेल को भारत की 550 से अधिक रियासतों को एक देश में एकीकृत करने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार पुरजोर तरीके से रखे। पटेल 1947 से 1950 तक भारत के पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री थे।
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स्थानीय निवासी मनीष देसाई ने एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि पीएम की वजह से सरदार पटेल को जानने में लोग अधिक रुचि ले रहे हैं। मनीष पटेल के परिजनों की अनुपस्थिति में घर की देखभाल करते हैं। एएनआई को मनीष ने बताया कि पहले उनकी जयंती पर केवल कुछ ही लोग आते थे और दीया जलाकर चले जाते थे, लेकिन अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनने से बड़ी संख्या में लोग यह जानने के लिए आते है कि उन्होंने देश की आजादी के लिए क्या किया।
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स्थानीय निवासी हर्षल पटेल ने कहा कि सरदार की विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वह एक महान एकीकरणकर्ता थे। कांग्रेस पार्टी चाहती तो उन्हें बहुत पहले सम्मानित कर सकती थी। 2014 में भाजपा ने सरदार को उनके कार्यो के अनुसार पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल अपने लाभ के लिए सरदार पटेल के नाम का उपयोग करना चाहती थी। वहीं, गिरीश बारोट ने कहा कि कांग्रेस ने पटेल को वह सम्मान नहीं दिया जो मिलना चाहिए था। उनका भारत के लिए एक बड़ा योगदान था। गांधी परिवार ने उन्हें हक नहीं दिलाया, जबकि उनकी संपत्ति, सड़कें आदि सभी गांधी परिवार के नाम पर थीं। यहां तक की संसद में सरदार पटेल का चित्र भी नरेंद्र द्वारा लगाया गया था। नडियाद में प्रैक्टिस कर रहे एक वकील निर्मल ने कहा कि सरदार एक बैरिस्टर भी थे और स्थानीय स्तर पर प्रैक्टिस करते थे। अब भी जिला अदालत में उनके द्वारा हस्ताक्षरित कागजात गुजरात सरकार द्वारा विरासत के रूप में संरक्षित हैं।
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2018 में लगाई गई भारत के लौह पुरुष की सबसे ऊंची प्रतिमा
31 अक्टूबर, 2018 को भारत के लौह पुरुष पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा लगवाई गई। तभी से हर साल सरदार पटेल की जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रतिमा के निर्माण में करीब 2,989 करोड़ का खर्च आया। 182 मीटर की यह वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष नाम दिया था, लेकिन इतिहास ने उनके साथ न्याय किया है। स्थानीय लोगों को लगता है कि उनके बारे में विस्तार से बताया जाना चाहिए और भारत की आजादी में उनके योगदान के बारे में इतिहास की किताबें अनुचित हैं।
पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को संगठित
पटेल को भारत की 550 से अधिक रियासतों को एक देश में एकीकृत करने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार पुरजोर तरीके से रखे। पटेल 1947 से 1950 तक भारत के पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री थे।