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Goa: 'गोवा में कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर से वकालत शुरू करना पसंद करूंगा', बोले निवर्तमान राज्यपाल पिल्लई

Thu, 17 Jul 2025 10:55 AM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 17 Jul 2025 10:55 AM IST
सार

Goa: वरिष्ठ तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पुसापति अशोक गजपति राजू को सोमवार को पीएस श्रीधरन पिल्लई के स्थान पर गोवा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। उसके बाद 70 वर्षीय निवर्तमान राज्यपाल ने कहा कि वे पदमुक्त होने के बाद अपने गृह राज्य केरल वापस जाकर वकील के रूप में काम करना चाहते हैं। उन्होंने आगे क्या कहा, आइए जानें।

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Plan to resume legal practice after my tenure in Goa: Outgoing Governor Pillai
पीएस श्रीधरन पिल्लई - फोटो : PTI

विस्तार

गोवा के निवर्तमान राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा है कि वह कार्यभार से मुक्त होने के बाद वकील के रूप में अपनी प्रैक्टिस फिर से शुरू करना पसंद करेंगे। पिल्लई ने कहा कि गोवा में अपने कार्यकाल के दौरान कठिन मुद्दों को मुस्कुराते हुए निपटाना उनका काम करने का तरीका था।

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वरिष्ठ तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पुसापति अशोक गजपति राजू को सोमवार को पिल्लई के स्थान पर गोवा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। 70 वर्षीय निवर्तमान राज्यपाल ने कहा कि वह अपने गृह राज्य केरल वापस जाकर वकील के रूप में काम करना चाहते हैं।
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पिल्लई ने कहा, "इसीलिए, मैंने अपना नामांकन (वकील के रूप में) वापस नहीं लिया है।" पिल्लई 2019 में मिजोरम और बाद में 2021 में गोवा में गवर्नर पद संभालने से पहले एक प्रैक्टिसिंग वकील और केरल भाजपा इकाई के दो बार अध्यक्ष रहे थे।
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यह पूछे जाने पर कि क्या राज्यपाल का पद संभालने के बाद अदालतों में बहस करना अजीब नहीं होगा, उन्होंने कहा, "यह अहंकार है। प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्यपाल केंद्रीय सूची (वरीयता तालिका) में चौथे स्थान पर हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश छठे स्थान पर हैं।"

उन्होंने कहा कि इसलिए हर कोई कहता है कि राज्यपाल कैसे अदालत में जाकर प्रैक्टिस कर सकते हैं। पिल्लई ने कहा, "अदालत न्याय का मंदिर है और जो भी कुर्सी (न्यायाधीश) पर बैठा है वह महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा, "आपको उन्हें (न्यायाधीशों को) सम्मान देना चाहिए। मुझे उन्हें (न्यायाधीश को) माननीय कहने में क्यों चिंता होनी चाहिए, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।"

पिल्लई ने कहा कि राज्यपाल के पद से मुक्त होने के बाद उनके वकील के रूप में प्रैक्टिस करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरे पास काला कोट और गाउन हो।" पिल्लई ने आगे कहा कि राज्यपाल के रूप में अपने चार साल के कार्यकाल के दौरान उन्हें गोवा के समुद्र तटों पर जाने का अवसर नहीं मिला, जबकि उन्होंने अपनी "ग्रामीण यात्रा" के तहत तटीय राज्य के सभी तालुकों की यात्रा की थी।

उन्होंने कहा, "मैं अपने कार्यकाल के दौरान गोवा के समुद्र तटों पर नहीं गया, क्योंकि अगर मैं जाता तो मेरे साथ सात-आठ वाहन और सभी प्रोटोकॉल होते। इससे समुद्र तटों पर आने वाले पर्यटकों को असुविधा होती।"

पिल्लई ने कहा कि गोवा के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने आसपास "कम प्रोटोकॉल" लागू करने की पूरी कोशिश की।

राज्य के राजनीतिक हलकों में असहमति से निपटने के बारे में पूछे जाने पर पिल्लई ने कहा कि जब भी विपक्षी पार्टी के सदस्य उनके पास शिकायत लेकर आते थे, तो वह अगले दिन मुख्यमंत्री को चाय पर बुलाते थे और मुद्दे पर चर्चा करते थे। पिल्लई ने कहा कि कठिन मुद्दों से वे मुस्कुराहट के साथ निपटते रहे हैं। उन्होंने कहा, "जब भी मुझे कठिन निर्णय लेने होते थे, मैं दूसरों को इसके बारे में समझाता था।"

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