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सुबह 8.45 पर फोन और उसके बाद वीडियो कॉल, इस तरह पीएलए ने पीछे खींचे कदम 

Tue, 07 Jul 2020 09:20 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 07 Jul 2020 09:20 AM IST
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PLA started withdrawal from LAC phone call then video call between doval and wang yi make this possible
एस जयशंकर-अजित डोभाल-नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

चीन और भारत के बीच पूर्वी लद्दाख में पिछले काफी समय से गतिरोध जारी है। ऐसे में अब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) कुछ प्वाइंट से पीछे हटनी शुरू हो गई है। चीन लगातार सीमा पर हेकड़ी दिखा रहा था, लेकिन भारत के सख्त रुख ने उसे झुकने पर मजबूर कर दिया। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को बातचीत हुई और उसका नतीजा सामने है। 

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सोमवार शाम को पीएलए के जवानों ने फिंगर फोर क्षेत्र से पीछे हटना शुरू किया। भारतीय सैन्य कमांडर ने कहा, ‘हमें किसी भी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पैंगोंग त्सो में गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है।’ सैन्य अधिकारी ने कहा पीएलए गलवां, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स में अपनी सैन्य पोजिशन को लेकर प्रतिकूल स्थिति में थे।
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उन्होंने कहा कि हालांकि पैंगोंग त्सो में चीनी पक्ष को फायदा हुआ क्योंकि उन्होंने फिंगर फोर तक एक सड़क बनाई थी। अधिकारियों का कहना है कि दोनों सेनाएं क्रमिक तरीके से पीछे हट रही हैं। प्रत्येक प्वाइंट को लेकर सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत की जा रही है। बता दें कि दोनों सेनाओं के बीच 15 जून को खूनी झड़प हुई थी। इसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।
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पहले चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने कदम पीछे करने को तैयार नहीं था। इसके बाद रविवार को सुबह 8.45 बजे सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया। फिर दोनों देशों के राजनयिकों के बीच बातचीत हुई। शाम को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात हुई। 

डोभाल और वांग यी के बीच लगभग दो घंटे तक वार्ता चली। गतिरोध और 15 जून की हिंसा के लिए किसे दोषी ठहराया जाए, इस बात पर असहमति थी। इसके बावजूद दोनों कई मुद्दों पर सहमत हुए। डोभाल ने वांग से कहा कि बीजिंग को शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलएलसी के चार बिंदुओं पर भारतीय सेना के गश्त अधिकारों को बहाल करने की आवश्यकता है। विश्लेषकों का कहना है कि डोभाल और वांग के बीच हुई बातचीत का ही नतीजा है कि सेना को पैंगोंग झील पर सेना को अपनी गश्ती के अधिकार वापस मिल गए हैं।

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