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हाईकोर्ट में जजों की संख्या दोगुनी करने की मांग, सीजेआई समेत सात वरिष्ठतम जज करेंगे जनहित याचिका पर सुनवाई
Tue, 29 Dec 2020 02:58 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 29 Dec 2020 02:58 AM IST
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
देश के सभी हाईकोर्ट और निचली अदालतों में जजों की संख्या दोगुनी की जाए और इस बारे में पर्याप्त कदम उठाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए। यह मांग एक जनहित याचिका में की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल की गई है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि शीर्ष अदालत न्यायिक चार्टर का पालन करने के लिए सभी अदालतों को निर्देश जारी करे, ताकि मामलों को तीन साल में निपटाया जा सके और पुराने मामलों को 2023 तक निपटारा कर दिया जाए।
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वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि न्यायिक चार्टर को सही तरीके से लागू करने पर मामले तीन साल के भीतर निपटाए जा सकेंगे। इनमें वे भी मामले आएंगे, जो तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम, सीओ के पास लंबित है। संविधान और मौलिक अधिकारों का संरक्षक होने के नाते शीर्ष अदालत को केंद्र और राज्यों को विधि आयोग की रिपोर्ट संख्या 245 की सिफारिश को लागू करने का निर्देश देना चाहिए।
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हाईकोर्ट में 50 लाख मामले लंबित
याचिका के मुताबिक, हाईकोर्ट के समक्ष 50 लाख मामले लंबित हैं। इनमें से 10 लाख मामले 10 साल से ज्यादा समय, दो लाख मामले 20 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। यही नहीं 45,000 मामले तीस साल से ज्यादा वक्त से लंबित हैं। जजों की संख्या भी प्रति 10 लाख आबादी के लिहाज से 20 से कम ही है।
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नया रोस्टर...सीजेआई समेत सात वरिष्ठतम जज करेंगे जनहित याचिका पर सुनवाई
सर्दी की छुट्टियों के बाद चार जनवरी से शुरू हो रहे सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठाें की सुनवाई का नया रोस्टर सोमवार को जारी किया गया। इसके तहत प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस एसए बोबडे सहित सात वरिष्ठतम जज जनहित याचिकाओं की सुनवाई करेंगे।
इसके मुताबिक सीजेआई के अलावा जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव जनहित याचिका, पत्र याचिका और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों की सुनवाई करेंगे। सीजेआई ने अपने पास मानहानि, बंदी प्रत्यक्षीकरण, सामाजिक न्याय और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर से जुड़े मामले भी रखे हैं। इसके अलावा चुनाव से जुड़े मामले तथा सांविधानिक संस्थाओं में नियुक्ति संबंधी मामले भी सीजेआई की पीठ ही सुनेगी।