{"_id":"6ae768c45b9bd87e76000d0c","slug":"phone-used-in-siddaramaiah-sting-changed-hands-at-kumaraswamy-s-delhi-residence-police-2026-11-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिद्धारमैया स्टिंग केस: पुलिस का खुलासा- दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया फोन; कुमारस्वामी के घर कैसे पहुंचा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सिद्धारमैया स्टिंग केस: पुलिस का खुलासा- दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया फोन; कुमारस्वामी के घर कैसे पहुंचा?
Sun, 01 Nov 2026 10:02 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 01 Nov 2026 10:02 PM IST
सार
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ कथित स्टिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल फोन दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया था। पुलिस के मुताबिक, इसे केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर प्रज्वल प्रसाद को सौंपा गया। इस मामले में किसकी क्या भूमिका थी और जांच में अब तक क्या सामने आया है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
विज्ञापन
सिद्धारमैया
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल मोबाइल फोन नई दिल्ली से खरीदा गया था। इसके बाद यह फोन राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर प्रज्वल प्रसाद को सौंपा गया था। बंगलूरू के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी रितेश पांडे ने अपने बयान में यह बात कही है। फोन प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर सौंपा गया था।
दिल्ली के रहने वाले रितेश पांडे को 24 अक्तूबर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है। इस मामले में गिरफ्तार होने वाला वह पहला व्यक्ति था। बंगलूरू पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने उसे दिल्ली में पकड़ा था। इसके बाद पूछताछ के लिए उसे बंगलूरू लाया गया। यहां उससे पूछताछ की गई।
फोन किसने और कहां से खरीदा था?
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह के अनुसार, रितेश पांडे और विनोद शर्मा ने मिलकर फोन खरीदा था। उन्होंने दिल्ली के करोल बाग इलाके की एक दुकान से यह फोन लिया था। इसके बाद दोनों ने इसे प्रज्वल प्रसाद को सौंप दिया। यह फोन कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर दिया गया था।
विज्ञापन
सितंबर में यूट्यूब पर दो वीडियो अपलोड किए गए थे। इनमें सिद्धारमैया पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। बताया गया था कि ये वीडियो कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता ने अदालत का रुख किया। उन्होंने अदालत से एक आदेश हासिल किया। इस आदेश के तहत मीडिया को इन वीडियो के बारे में खबरें प्रकाशित करने से रोक दिया गया।
उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। इसमें मामले की जांच की मांग की गई। इस मामले में सीसीबी पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस की कई टीमें जांच कर रही हैं। वे कथित स्टिंग ऑपरेशन के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस आयुक्त सिंह ने बताया कि जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं। इनके आधार पर पुलिस ने विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद को नोटिस जारी किए हैं। लेकिन दोनों फरार हैं। दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में आवेदन भी किया है।
सिंह ने कहा, हमने विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन वे फरार हैं। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी दाखिल किए हैं। पुलिस को पांडे और प्रसाद के बीच कुछ वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली है। इन लेनदेन की जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं ने तकनीकी सबूत भी जुटाए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल जानकारियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि तीनों लोग सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने का काम करते थे। जांचकर्ता उनके आपसी संबंधों की पड़ताल कर रहे हैं। वे यह भी पता लगा रहे हैं कि इस मामले में किसकी क्या भूमिका थी। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि तीनों के बीच कितने समय से संपर्क था।
क्या कुमारस्वामी को भी नोटिस दिया गया है?
पुलिस आयुक्त सिंह से पूछा गया कि क्या कुमारस्वामी को नोटिस जारी किया गया है। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या कथित स्टिंग ऑपरेशन में कुमारस्वामी की सीधी भूमिका सामने आई है। इस पर सिंह ने कहा कि जांच अभी जारी है। इसलिए अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा, फिलहाल हमने केवल रितेश पांडे को गिरफ्तार किया है। उसने बताया है कि वह मोबाइल फोन लेकर आया था और प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर उसे सौंपा था। इस स्तर पर हम किसी भी बात की पक्के तौर पर पुष्टि नहीं कर सकते। सिंह ने फिर दोहराया कि पांडे के बयान के अनुसार, फोन सौंपते समय प्रसाद कुमारस्वामी के आवास पर मौजूद था। उन्होंने कहा,बाकी दोनों लोगों का पता चलने और उनसे पूछताछ होने के बाद हमें और जानकारी मिलेगी।
वायरल वीडियो को पुलिस ने क्या बताया था?
बंगलूरू शहर की पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में एक दावा किया था। पुलिस के अनुसार, सिद्धारमैया से जुड़े वायरल स्टिंग वीडियो में यौन शोषण के आरोप दिखाए गए थे। पुलिस ने इन्हें मनगढ़ंत कहानी का हिस्सा बताया था। उसने कहा था कि यह कहानी जानबूझकर तैयार की गई थी।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी जांच को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच आगे बढ़ रही है। तकनीकी सबूतों की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली हो या किसी भी पद पर हो, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
खरगे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बात की। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया, सबूतों की तकनीकी जांच के दौरान कई अहम पहलू सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और इसके आगे बढ़ने के साथ और जानकारी सामने आएगी। इसमें शामिल पाया जाने वाला कोई भी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई का सामना करेगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
विज्ञापन
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी रितेश पांडे ने अपने बयान में यह बात कही है। फोन प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर सौंपा गया था।
दिल्ली के रहने वाले रितेश पांडे को 24 अक्तूबर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप है। इस मामले में गिरफ्तार होने वाला वह पहला व्यक्ति था। बंगलूरू पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने उसे दिल्ली में पकड़ा था। इसके बाद पूछताछ के लिए उसे बंगलूरू लाया गया। यहां उससे पूछताछ की गई।
विज्ञापन
फोन किसने और कहां से खरीदा था?
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह के अनुसार, रितेश पांडे और विनोद शर्मा ने मिलकर फोन खरीदा था। उन्होंने दिल्ली के करोल बाग इलाके की एक दुकान से यह फोन लिया था। इसके बाद दोनों ने इसे प्रज्वल प्रसाद को सौंप दिया। यह फोन कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर दिया गया था।
विज्ञापन
सितंबर में यूट्यूब पर दो वीडियो अपलोड किए गए थे। इनमें सिद्धारमैया पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। बताया गया था कि ये वीडियो कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता ने अदालत का रुख किया। उन्होंने अदालत से एक आदेश हासिल किया। इस आदेश के तहत मीडिया को इन वीडियो के बारे में खबरें प्रकाशित करने से रोक दिया गया।
उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। इसमें मामले की जांच की मांग की गई। इस मामले में सीसीबी पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस की कई टीमें जांच कर रही हैं। वे कथित स्टिंग ऑपरेशन के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस आयुक्त सिंह ने बताया कि जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं। इनके आधार पर पुलिस ने विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद को नोटिस जारी किए हैं। लेकिन दोनों फरार हैं। दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में आवेदन भी किया है।
सिंह ने कहा, हमने विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन वे फरार हैं। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी दाखिल किए हैं। पुलिस को पांडे और प्रसाद के बीच कुछ वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली है। इन लेनदेन की जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं ने तकनीकी सबूत भी जुटाए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल जानकारियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि तीनों लोग सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने का काम करते थे। जांचकर्ता उनके आपसी संबंधों की पड़ताल कर रहे हैं। वे यह भी पता लगा रहे हैं कि इस मामले में किसकी क्या भूमिका थी। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि तीनों के बीच कितने समय से संपर्क था।
क्या कुमारस्वामी को भी नोटिस दिया गया है?
पुलिस आयुक्त सिंह से पूछा गया कि क्या कुमारस्वामी को नोटिस जारी किया गया है। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या कथित स्टिंग ऑपरेशन में कुमारस्वामी की सीधी भूमिका सामने आई है। इस पर सिंह ने कहा कि जांच अभी जारी है। इसलिए अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा, फिलहाल हमने केवल रितेश पांडे को गिरफ्तार किया है। उसने बताया है कि वह मोबाइल फोन लेकर आया था और प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर उसे सौंपा था। इस स्तर पर हम किसी भी बात की पक्के तौर पर पुष्टि नहीं कर सकते। सिंह ने फिर दोहराया कि पांडे के बयान के अनुसार, फोन सौंपते समय प्रसाद कुमारस्वामी के आवास पर मौजूद था। उन्होंने कहा,बाकी दोनों लोगों का पता चलने और उनसे पूछताछ होने के बाद हमें और जानकारी मिलेगी।
वायरल वीडियो को पुलिस ने क्या बताया था?
बंगलूरू शहर की पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में एक दावा किया था। पुलिस के अनुसार, सिद्धारमैया से जुड़े वायरल स्टिंग वीडियो में यौन शोषण के आरोप दिखाए गए थे। पुलिस ने इन्हें मनगढ़ंत कहानी का हिस्सा बताया था। उसने कहा था कि यह कहानी जानबूझकर तैयार की गई थी।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी जांच को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच आगे बढ़ रही है। तकनीकी सबूतों की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली हो या किसी भी पद पर हो, उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
खरगे ने कलबुर्गी में पत्रकारों से बात की। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में उनके हवाले से कहा गया, सबूतों की तकनीकी जांच के दौरान कई अहम पहलू सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और इसके आगे बढ़ने के साथ और जानकारी सामने आएगी। इसमें शामिल पाया जाने वाला कोई भी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई का सामना करेगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।