राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है। राज्य में पहले जहां वरिष्ठ बनाम युवा की लड़ाई चल रही थी। वहीं अब इसमें फोन टैपिंग का भी मामला जुड़ गया है। दरअसल, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की निष्ठा खरीदने की कोशिश की है। सबूत के तौर पर पार्टी ने दो ऑडियो क्लिप जारी की हैं, जिसमें कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा, भाजपा विधायक संजय जैन और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बात करते हुए सुनाई दे रहे हैं।
क्या सरकार कर सकती है आपका भी फोन टैप, क्या है कानून, कब-कब बना सियासी मुद्दा, जानें सब कुछ
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दस एजेंसियों के पास है फोन टैपिंग का अधिकार
खुफिया ब्यूरो, केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, रॉ, सिग्नल इंटेलिजेंस निदेशालय और दिल्ली पुलिस आयुक्त के पास फोन टैपिंग करने का अधिकार है। हालांकि किसी पर भी निगरानी रखने से पहले उन्हें केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी लेनी होती है। यह जानकारी पिछले साल लोकसभा में दी गई थी।
फोन टैपिंग नहीं है निजता का उल्लंघन
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं रहेगा। व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में 'निजता का अधिकार' शामिल है। यानी एक नागरिक को अन्य मामलों के अलावा अपने परिवार, शिक्षा, विवाह, मातृत्व, बच्चे पैदा करने की अपनी व्यक्तिगत गोपनीयता को सुरक्षित रखने का अधिकार है। ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि क्या किसी की बात सुनना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है। इसका जवाब है नहीं। यदि इसे जनता के हित या किसी आपातकाल की स्थिति में किया जा रहा है तो यह गलत नहीं है। बिना सरकार की इजाजत के आप देश के किसी भी नागरिक का फोन टैप नहीं कर सकते हैं।
भारतीय राजनीति का फोन टैपिंग से है पुराना नाता
- फरवरी 2007 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का उस समय फोन टैप किया गया था जब वे सरदार पटेल मार्ग पर अपनी कार में पंजाब के एक कांग्रेसी नेता से बात कर रहे थे। दोनों सीडब्ल्यूसी चुनावों के लिए उम्मीदवारों पर चर्चा कर रहे थे।
- अक्तूबर 2007 में जदयू नेता नीतीश कुमार का फोन टैप किया गया था। उस समय वे अपनी आधिकारिक कार में बिहार भवन से साउथ ब्लॉक की ओर जाते हुए केंद्र से धन प्राप्त करने को लेकर एक सहयोगी के साथ बात कर रहे थे। कुमार तत्कालीन बिहार के कमिश्नर का फोन इस्तेमाल कर रहे थे।
- जुलाई 2008 में सीपीएम नेता प्रकाश करात का फोन टैप किया गया था। ऐसा भारत-अमेरिका परमाणु समझौते और संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी नेताओं की रणनीति का पता लगाने के लिए किया गया था।
- अप्रैल 2010 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार का फोन उस समय टैप किया गया जब वे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) प्रमुख ललित मोदी से बातचीत कर रहे थे। बिडिंग (बोली) प्रक्रिया के दौरान हुए सौदों पर रिकॉर्ड की गई बातचीत का इस्तेमाल कथित तौर पर पवार पर मोदी को हटाने के लिए दबाव बनाने के लिए किया गया।
मुलायम-अमर समेत इन मामलों ने भी बटोरी सुर्खियां
2009 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के बीच हुई एक कथित वार्ता सामने आई थी। बातचीत के लिखित अंश प्रकाशित होने पर अमर सिंह ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
अरुण जेटली के फोन टैपिंग का मामला
तब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 केंद्र सरकार या एक राज्य सरकार को यह शक्ति देती है कि वो देश की संप्रभुता या अखंडता के हित में किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्न, संचारित, प्राप्त या संग्रहीत किसी भी सूचना को इंटरसेप्ट, मॉनिटर या डिक्रिप्ट या इंटरसेप्ट कर सकती है।
फोन टैपिंग के मामले में यह भी नियम है कि किसी भी व्यक्ति का फोन एक बार अनुमति मिलने के बाद दो महीने तक टैप किया जाएगा। इसके बाद समय अवधि बढ़ाने के लिए फिर से अनुमति लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति का फोन अधिकतम छह महीने ही टैप किया जा सकता है।
2013 में भाजपा नेता अरुण जेटली के फोन टैपिंग मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है। इसमें दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अरविंद डबास और तीन अन्य जासूसों अनुराग, नीरज और नीतीश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 464, 467, 468, 471, 120 (बी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था। डबास को 2013 में कथित रूप से जेटली की कॉल डिटेल की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार डबास ने वरिष्ठ भाजपा नेता के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) के लिए मोबाइल सेवा प्रदाता को अनुरोध भेजने के लिए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) की आधिकारिक ईमेल आईडी इस्तेमाल किया था।