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कोरोना : फाइजर व मॉडर्ना के टीकों का दूसरी लहर के बाद होता परीक्षण तो नहीं मिलती मंजूरी, एला का बड़ा दावा

Wed, 01 Sep 2021 09:20 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 01 Sep 2021 09:20 PM IST
सार

भारत बायोटेक के प्रमुख कृष्णा एला ने अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर व मॉडर्ना के टीकों को लेकर बड़ा दावा किया। उनका कहना है कि यदि कोरोना की दूसरी लहर के बाद इन दोनों कंपनियों के टीकों का तीसरे चरण का ट्रायल होता तो उन्हें मंजूरी ही नहीं मिलती। 
 

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Pfizer, Moderna vaccines would not have got nod had they done phase third trials in second wave: Krishna Ella
भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एला - फोटो : twitter

विस्तार

 स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवॉक्सिन' बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एला ने अमेरिकी दवा कंपनियों- फाइजर व मॉडर्ना के टीकों को लेकर बड़ा दावा किया है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में एला ने कहा कि यदि कोरोना की दूसरी लहर के बाद इन दोनों कंपनियों के टीकों का तीसरा परीक्षण होता तो उन्हें मंजूरी ही नहीं मिलती। एला ने दावा किया कि दूसरी लहर, जिसमें डेल्टा वैरिएंट ने कहर बरपाया है, उससे मुकाबला करने में इन दोनों कंपनियों के टीके बहुत कम प्रभावी हैं। 

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हैदराबाद स्थित भारत बॉयोटेक के एमडी व चेयरमैन ने कहा कि हमारा कोवॉक्सिन टीका चीन में मिले मूल कोरोना वायरस के खिलाफ 85 फीसदी असरकारी रहा होगा। मैं ईमानदारी से कह रहा हूं कि यदि फाइजर व मॉडर्ना ने दूसरी लहर के दौरान अपनी वैक्सीन का तीसरा क्लिनिकल परीक्षण किया होता तो उन्हें इनके उत्पादन का लाइसेंस ही नहीं मिलता। केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन कार्यरत टेक्नालॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। 
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इस्राइल में फाइजर व मॉडर्ना की वैक्सीन अब 35 फीसदी असरकारी
एला ने कहा कि जब अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर व मॉडर्ना को मंजूरी मिली तब वुहान स्ट्रेन सक्रिय था। इसलिए उनकी वैक्सीन 90 फीसदी असरकारी होने में कामयाब रही, लेकिन अब इनकी वैक्सीन में 35 फीसदी असरकारी पाई गई है। डेल्टा वैरिएंट कोरोना का ज्यादा संक्रामक स्वरूप माना गया है। 
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एला ने कहा कि कोवॉक्सिन एकमात्र वैक्सीन है, जिसे नियामक प्रक्रिया पूरी करने में देरी हुई और हम दूसरी लहर में अटक गए, लेकिन हम बहुत भाग्यशाली हैं कि दूसरी लहर में हमारी वैक्सीन लगभग 77 फीसदी प्रभावी रही। उस वक्त यदि डेल्टा की बजाए वुहान वायरस सक्रिय होता तो हमारी वैक्सीन 85 फीसदी तक असरकारी होती। 


बता दें, भारत में लगाई जा रही तीन वैक्सीन में से एक कोवॉक्सिन है। इसके अलावा कोविशील्ड व स्पूतनिक वी को भी मंजूरी दी जा चुकी है। देश के दवा नियामक ने मॉडर्ना व जॉनसन की वैक्सीन को भी आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। 

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