Kerala: पीएफआई के सदस्य की जमानत याचिका खारिज, एनआईए ने लगाए हथियार प्रशिक्षण और कट्टरपंथ के आरोप
एनआईए की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित PFI के शिक्षा विंग के राष्ट्रीय प्रभारी अशरफ की जमानत याचिका खारिज कर दी। एजेंसी ने उन पर हथियार प्रशिक्षण आयोजित करने, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और गंभीर साजिशों में शामिल होने के आरोप लगाए थे।
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विस्तार
प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के शिक्षा विंग के राष्ट्रीय प्रभारी अशरफ उर्फ करमन्ना अशरफ मौलवी को एनआईए की विशेष अदालत से जमानत नहीं मिली है। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप पहली नजर में गंभीर और ठोस प्रतीत होते हैं, इसलिए इस चरण में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
एनआईए कोर्ट का तर्क
एनआईए कोर्ट के जज एमके मोहनदास ने शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अशरफ इस मामले में दूसरे आरोपी हैं, जो पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़ा है। वह पालक्काड में आरएसएस नेता श्रीनिवासन की हत्या के मामले में भी आरोपी बताए गए हैं।
जमानत का विरोध करते हुए एनआईए ने अदालत में कहा कि अशरफ ने कोच्चि के पेरियार वैली और तिरुवनंतपुरम के एक संस्थान में पीएफआई कैडरों के लिए हथियारों का प्रशिक्षण आयोजित कराया था। एजेंसी के मुताबिक, यह प्रशिक्षण कथित रूप से आतंकी गतिविधियों की तैयारी के लिए दिया जा रहा था।
अशरफ पर क्या-क्या आरोप लगाया गए?
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कुछ गवाहों ने बयान दिया है कि अशरफ ने हथियार प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया और संगठन के सदस्यों को उकसाने वाले भाषण दिए। एनआईए के अनुसार, उनके घर से बरामद पेन ड्राइव में ISIS से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और अन्य संदिग्ध सामग्री मिली, साथ ही हथियार रखने और कुछ संगठनों के नेताओं की सूची से जुड़े नोट्स भी पाए गए।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि वह आरएसएस नेता श्रीनिवासन की हत्या की साजिश से जुड़े थे। तलाशी के दौरान एक सह-आरोपी के घर से तलवारें और एक कुल्हाड़ी बरामद होने की बात भी अदालत में बताई गई।
बचाव पक्ष का तर्क
वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि अशरफ साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से जेल में हैं, वे बुजुर्ग हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनके वकील ने यह भी दलील दी कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई और तलाशी के दौरान बरामदगी की वैधता पर भी सवाल उठाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान और अन्य सामग्री से आरोपी की कथित भूमिका सामने आती है। अदालत ने यह भी नोट किया कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मामला ट्रायल के लिए तैयार है, इसलिए जमानत देने का आधार नहीं बनता।
यह मामला एनआईए ने वर्ष 2022 में दर्ज किया था। अब तक 65 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और 56 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 50 को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
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