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PFI: कथित आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला, ईडी ने पीएफआई के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया
Sat, 21 Oct 2023 10:07 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 21 Oct 2023 10:07 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय ने कथित आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित धन शोधन मामले में पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस मामले के आरोपियों में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का नाम भी शामिल है।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कथित आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस मामले के आरोपियों में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का नाम भी शामिल है। सैयद मोहम्मद कासिम इब्राहिम को भी ईडी ने आरोपी बनाया है।
26 अक्तूबर को अगली सुनवाई
इब्राहिम वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने उसके खिलाफ पूरक आरोप पत्र 20 अक्टूबर को दायर किया था। ईडी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन गुप्ता के समक्ष अभियोजन शिकायत (एजेंसी के आरोप पत्र के बराबर) दायर की। अदालत ने इस मामले पर अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को तय की।
120 करोड़ रुपये की कथित लॉन्ड्रिंग का मामला
ईडी की तरफ से विशेष लोक अभियोजक एन के मट्टा ने पैरवी की। उनके सहयोगी वकील मोहम्मद फैजान खान ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। बता दें कि यह मामला कई वर्षों में 120 करोड़ रुपये की कथित लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।
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पिछले साल सितंबर में लगा बैन
गौरतलब है कि पीएफआई को आतंकवादी गतिविधियों और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंधों के आरोप में केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में बैन लगाया था।
NIA की प्राथमिकी के आधार पर ईडी का मामला
बता दें कि ईडी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दंडनीय कथित आतंकवाद-संबंधी गतिविधियों के लिए मामला दर्ज किया था। इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज किया था।
गैरकानूनी गतिविधियों में फंड का इस्तेमाल
ईडी ने आरोप लगाया था कि आरोपियों और संगठन से जुड़े अन्य सदस्यों ने दान, हवाला, बैंकिंग चैनलों आदि के माध्यम से धन एकत्र किया। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, फंड का उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों और विभिन्न अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
कई साल रची गई साजिश, भारत में पैसे ट्रांसफर के आरोप
मनी लॉन्ड्रिंग रोधी एजेंसी- ईडी ने आरोप लगाया कि उसकी जांच में पाया गया कि फर्जी नकद दान और बैंक हस्तांतरण किए गए थे। ईडी ने दावा किया कि पीएफआई के पदाधिकारियों ने कई साल तक साजिश रची। इसी के तहत गुप्त चैनल के माध्यम से विदेशों से भारत में धन हस्तांतरित करने का भी आरोप लगाया गया था।
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26 अक्तूबर को अगली सुनवाई
इब्राहिम वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने उसके खिलाफ पूरक आरोप पत्र 20 अक्टूबर को दायर किया था। ईडी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन गुप्ता के समक्ष अभियोजन शिकायत (एजेंसी के आरोप पत्र के बराबर) दायर की। अदालत ने इस मामले पर अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को तय की।
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120 करोड़ रुपये की कथित लॉन्ड्रिंग का मामला
ईडी की तरफ से विशेष लोक अभियोजक एन के मट्टा ने पैरवी की। उनके सहयोगी वकील मोहम्मद फैजान खान ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। बता दें कि यह मामला कई वर्षों में 120 करोड़ रुपये की कथित लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।
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पिछले साल सितंबर में लगा बैन
गौरतलब है कि पीएफआई को आतंकवादी गतिविधियों और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ कथित संबंधों के आरोप में केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्र सरकार ने पिछले साल सितंबर में बैन लगाया था।
NIA की प्राथमिकी के आधार पर ईडी का मामला
बता दें कि ईडी ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दंडनीय कथित आतंकवाद-संबंधी गतिविधियों के लिए मामला दर्ज किया था। इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज किया था।
गैरकानूनी गतिविधियों में फंड का इस्तेमाल
ईडी ने आरोप लगाया था कि आरोपियों और संगठन से जुड़े अन्य सदस्यों ने दान, हवाला, बैंकिंग चैनलों आदि के माध्यम से धन एकत्र किया। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, फंड का उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों और विभिन्न अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
कई साल रची गई साजिश, भारत में पैसे ट्रांसफर के आरोप
मनी लॉन्ड्रिंग रोधी एजेंसी- ईडी ने आरोप लगाया कि उसकी जांच में पाया गया कि फर्जी नकद दान और बैंक हस्तांतरण किए गए थे। ईडी ने दावा किया कि पीएफआई के पदाधिकारियों ने कई साल तक साजिश रची। इसी के तहत गुप्त चैनल के माध्यम से विदेशों से भारत में धन हस्तांतरित करने का भी आरोप लगाया गया था।