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मुख्य न्यायाधीश पर लगे आरोपों के प्रकाशन पर रोक लगाने वाली याचिका हाईकोर्ट में खारिज

Mon, 29 Apr 2019 01:56 PM IST
आसिम खान भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Mon, 29 Apr 2019 01:56 PM IST
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Petition seeking ban on Media publication of allegations on CJI rejected in Delhi High Court
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने से मीडिया को रोकने की मांग कर रही याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामला शीर्ष अदालत में पहले से विचाराधीन है और किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। 

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पीठ ने याचिका दाखिल करने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा, उच्चतम न्यायालय जाइए। एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा कि प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोप सीधे भारतीय न्यायिक प्रणाली पर प्रहार हैं। याचिका में तीन न्यायाधीशों वाली समिति की जांच का कोई निष्कर्ष निकलने तक इन आरोपों के प्रसारण या प्रकाशन से मीडिया को तत्काल रोकने की मांग की गई थी। 
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उच्चतम न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की जांच शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों वाली समिति कर रही है जिसने पिछले शुक्रवार को मामले में पहली सुनवाई की। याचिका में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के अलावा सोशल मीडिया मंचों के लिए भी निर्देश की मांग की गई है। इस याचिका में विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, दिल्ली सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली पुलिस आयुक्त को पक्ष बनाया गया है। 
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इसमें व्हाट्सऐप, गूगल, यूट्यूब एवं लिंक्डइन कॉर्पोरेशन और समाचार वेबसाइट स्क्रोल डॉट इन के लिए निर्देश मांगे गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि इस कृत्य में राष्ट्र विरोधी तत्वों की संलिप्तता का संदेह है और अगर इन आरोपों का प्रकाशन नहीं रोका गया तो, भारतीय न्यायिक प्रणाली पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा’ तथा राष्ट्र एवं उसके लोगों को हुए बड़े नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी।

 

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