चीनी कंपनियों के साथ व्यापारिक करार खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में चीन सरकार और चीनी कंपनियों के साथ भारत के कुछ राज्यों व कंपनियों के बीच कारोबार के लिए होने वाले करार (एमओयू) को रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इसके पीछे सीमा पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और भारत सरकार की ओर से 59 चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का हवाला दिया गया है। याचिका में चीन के साथ भारत की व्यापार नीति सार्वजनिक कराने का भी अनुरोध किया गया है।
विस्तार
याचिका में कहा गया है कि कुछ राज्य सरकारें और कंपनियां व्यापार के लिए चीनी कंपनियों और वहां की सरकार के साथ करार कर रहे हैं, जो कि देशहित और भावनाओं के खिलाफ है। इस अर्जी में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव चरम पर है। डाटा सुरक्षा को देखते हुए भारत ने चीनी कंपनियों के 59 मोबाइल एप्स पर भी प्रतिबंध लगाया है।
इसमें कहा गया है कि मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध का फैसला स्वागत योग्य कदम हो सकता है लेकिन दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा राज्य सरकारों और कारोबारी घरानों को चीनी कारोबारी घरानों के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जा रही है। इससे गलत संदेश जा रहा है।
देशवासियों ने इस फैसले को सर-आंखों पर लिया है। लेकिन, कुछ कंपनियां अपने निजी हित के लिए चीन की सरकार और वहां की कंपनियों के साथ व्यापारिक करार कर रहे हैं। इससे गलत संदेश जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि भारतीय कंपनियों और राज्य सरकारों का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत योजना के भी खिलाफ है।
चीन के साथ व्यापार नीति सार्वजनिक करने की मांग
यह याचिका जम्मू-कश्मीर की रहने वाली सुप्रिया पंडिता ने दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने गुजरात सरकार, महाराष्ट्र सरकार और एक व्यापारिक घराने को प्रतिवादी बनाया है। पंडिता ने कोर्ट से प्रतिवादी सरकारों को यह निर्देश देने की मांग भी की है कि वह चीन के साथ हुए करारों के रद्द करें। उन्होंने भारत की चीन के साथ व्यापार नीति के बारे में भी बताने को कहा है।
बता दें कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई स्थानों पर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। 15 जून की रात गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से वहां तनाव व्याप्त है। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे और चीन को भी क्षति उठानी पड़ी थी। लेकिन, चीन ने इस नुकसान का विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है।
याचिका में कहा गया है कि एलएसी पर 15 जून की घटना के बाद से भारतीय नागरिक और व्यापारिक संगठन देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान कर रहे हैं। बता दें कि गलवां घाटी की घटना के बाद सरकार ने 3500 किलोमीटर लंबी एलएसी पर चीन की सेना के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिये भारतीय सेना को खुली छूट दे दी है।