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अल्पसंख्यक की सही परिभाषा तय करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

Tue, 17 Dec 2019 12:11 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 17 Dec 2019 12:11 PM IST
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Petition files against 26-year-old ordinance granting minority status dismissed in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

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उच्चतम न्यायालय ने पांच समुदायों- मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों को अल्पसंख्यकों का दर्जा देने वाली केंद्र सरकार की 26 साल पुरानी अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में किसी समुदाय की राज्यवार आबादी के आधार पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने के संबंध में दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

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पीठ ने कहा, 'धर्म को पूरे देश के परिदृश्य में जोड़ कर देखा जाना चाहिए।' इस पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे।

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