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Pakistan Occupied Kashmir: पाकिस्तान से छुटकारा चाहते हैं पीओके के लोग, 11 मई को मुजफ्फराबाद तक निकलेगा मार्च

Fri, 10 May 2024 09:57 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Fri, 10 May 2024 09:57 PM IST
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सार

Pakistan Occupied Kashmir: 11 मई को मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकालने की तैयारी हो रही है, जिसे लेकर पाकिस्तान टेंशन में है और इस आंदोलन को कुचलने की पूरजोर कोशिश में जुट गया है। 

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People of PoK want to get rid of Pakistan, will march till Muzaffarabad on 11th May
मुजफ्फराबाद में प्रदर्शन की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक तरफ बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए नासूर बनता जा रहा है, तो वहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में भी आजादी की मांग उठने लगी है। वहां ‘पाकिस्तान से लेकर रहेंगे आजादी' के नारे जगह-जगह गूंज रहे हैं। खबर है कि पीओके में 11 मई को मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकालने की तैयारी हो रही है, जिसे लेकर पाकिस्तान टेंशन में है और इस आंदोलन को कुचलने की पूरजोर कोशिश में जुट गया है। आलम यह है कि 11 मई से पहले ही पीओके के कई हिस्सों मीरपुर, मुजफ्फराबाद, ददयाल, गिलगित-बालटिस्तान, तत्ता पानी और सुधनोती में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पीओके के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान में लोगों के पास खाना नहीं है, आटा-दाल नहीं है और बिजली कटौती चरम पर है। चारों तरफ भुखमरी फैली है और लोग लोग मर रहे हैं। वहीं भारत के सेव शारदा संगठन ने भी पीओके के लोगों की मांगों का समर्थन किया है।



पाकिस्तान ने रेंजर्स और क्विक रिस्पांस फोर्स को तैनात किया
हालांकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) और ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पाकिस्तान को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी बल के इस्तेमाल की चेतावनी दी है। लेकिन, पीओके के कई हिस्सों में हो रहे इस कथित शांति प्रदर्शन ने अब हिंसा का रूप ले लिया है। पाकिस्तान ने 11 मई को यहां होने वाले विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए पंजाब प्रांत से भारी संख्या में फ्रंटियर कोर सुरक्षा बलों को तैनात किया है। साथ ही, रेंजर्स और क्विक रिस्पांस फोर्स को भी यहां भेजा है, जिससे यहां के लोग उग्र हो गए हैं। ददयाल इलाके में तो भीड़ ने असिस्टेंट कमिश्नर के दफ्तर पर धावा बोल दिया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को जमकर पीटा। असिस्टेंट कमिश्नर ददयाल (मीरपुर) ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज का आदेश दिया था, जिससे लोग भड़क गए। वहीं ददयाल के व्यापारिक संघों ने व्यापार और परिवहन को पूरी तरह बंद करने का आह्वान भी कर दिया है। 


लोगों को सस्ता आटा और सस्ती बिजली चाहिए 
पीओके स्थित ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सदस्य शौकत नवाज ने अमर उजाला को बताया कि पीओके की सरकार के कहने पर पाकिस्तान ने यहां बड़ी तादाद में सुरक्षाबल तैनात कर दिए हैं और धारा 144 लगा दी है। उन्होंने कहा 'यहां की अवाम सस्ता आटा और सस्ती बिजली चाहती है, जो गरीबों का हक है। लेकिन, सरकार हमें यह मुहैया नहीं करा रही है। आवाज उठाने वाले लोगों की धरपकड़ हो रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई जा रही हैं।' वह कहते हैं कि पाकिस्तान सरकार जिस तरह से यहां दमनकारी नीतियों का इस्तेमाल कर रही है, उन्हें पूरी दुनिया को इसका जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य मानवाधिकार संगठनों से अनुरोध किया है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें और यहां के बिगड़ते हालात को संभालें। 

पीओके से पाकिस्तान का बोरिया बिस्तर गोल होगा
वहीं इस प्रदर्शन का समर्थन कर रही पीओके की नेशनल इक्वैलिटी पार्टी जेकेजीबीएल के अध्यक्ष प्रोफेसर सज्जाद राजा ने कहा 'पिछले एक साल से लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं। पिछले एक साल से यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था, इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक पत्थर तक सुरक्षा बलों पर नहीं फेंका। लेकिन जब हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो लोगों का गुस्सा भड़कना लाजिमी था।' वह कहते हैं कि हमारी तीन मांगें हैं। पहली यह कि यहां के लोगों को सस्ती बिजली दी जाए। दूसरी, आटा उस रेट पर दिया जाए, जिस रेट पर भारत द्वारा कश्मीर के लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। तीसरी मांग यह है कि मुजफ्फराबाद में सरकारी विभागों में बैठे जो लोग कश्मीरी प्रवासियों द्वारा भेजे गए पैसे पर अय्याशी कर रहे हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पीओके के राजनीतिक दल अब कमर कस रहे हैं और आगामी 11 मई को मार्च हो कर ही रहेगा। 

अनुच्छेद 74 का उल्लंघन कर रहा पाकिस्तान 
भारत के कश्मीर में सेव शारदा संगठन भी पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों की मांग का समर्थन कर रहा है। सेव शारदा कमेटी के अध्यक्ष रविंदर पंडिता ने अमर उजाला को बताया कि हम भी सिविल सोसाइटी के तौर पर पीओके के नागरिकों की मांग का समर्थन करते हैं। हम पीओके में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान अनुच्छेद 74 का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा 'पीओके में फेडरल सरकार है, वहां सरकारी मशीनरी है और जबरन वहां सुरक्षा बलों को तैनात कर उन पर हिंसा करके वहां के लोगों के मानवाधिकारों का हनन कर रहा है।' वह कहते हैं कि उनकी छोटी सी ही मांग है। वे गरीब लोग हैं, उन्हें सस्ता आटा और बिजली ही तो चाहिए। वहां की सरकार इसे भी पूरा नहीं कर पा रही है। पंडिता ने आगे बताया कि भारत के कश्मीर की प्रगति देख कर वे लोग भी चाहते हैं कि उनका इलाका भी समृद्ध हो। वे भी क्रॉस बॉर्डर टेरेरिज्म के खिलाफ हैं, लेकिन पाकिस्तान वहां लगातार दखल दे रहा है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस पर ध्यान दे। 

लोगों को दी जा रहीं फोन पर धमकियां 
वहीं पीओके में इस लॉन्ग मार्च का समर्थन कर रहे लोगों को पाकिस्तान की तरफ से बकायदा लोगों को फोन पर धमकियां भी दी जा रही हैं। ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें भी पाकिस्तान के एक नंबर से कॉल आई थी और उसने अपना नाम जाहिर नहीं किया, लेकिन उन्हें धमकी दी। वह बताते हैं कि कई लोगों को इस तरह की धमकियां आई हैं। जेएएसी ने इस बार पीओके के मुद्दों को हल करने की कसम खाई है। 

लोगों ने बुजुर्गों की कब्रों पर खाई कसम
पीओके में सामाजिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि हालात बहुत ही विकट हैं। यहां की सरकार 11 मई के लॉन्ग मार्च और मुजफ्फराबाद विधानसभा में प्रस्तावित धरने को हिंसक बनाने की तैयारी कर रही है। वह कहते हैं कि इन विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले लोग पिछले नौ महीनों से शांत रहे हैं और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है। 

संसाधनों का उनका हक
यूकेपीएनपी और जेएएसी की तरफ से जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार प्रदर्शनकारी अनुचित टैक्स, ज्यादा बिजली बिल, महंगाई से परेशान हैं। वे आटा जैसी जरूरी वस्तुओं की कमी का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में स्थित बांधों में उत्पादित पनबिजली पर स्थानीय लोग रॉयल्टी देने की भी मांग कर रहे हैं। वह कहते हैं कि यहां के संसाधनों का उनका हक पहले है। जेएएसी का कहना है कि यहां के विकास के लिए कश्मीरी प्रवासी हर साल अरबों डॉलर यहां भेजते हैं, इसके बावजूद यहां का विकास नहीं होने से लोग संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि कथित तौर पर यह धनराशि पाकिस्तानी बैंकों को भेज दी जाती है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

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