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रामदास बनाम अंबुमणि: PMK में पारिवारिक टकराव तेज, बेटे ने पिता के सबसे वफादार विधायक को पार्टी से निकाला
Wed, 02 Jul 2025 04:13 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 02 Jul 2025 04:13 PM IST
सार
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने सलेम पश्चिम से विधायक और पार्टी संस्थापक रामदास के समर्थक आर. अरुल को पार्टी से निकाल दिया है। अरुल पर पार्टी अनुशासन तोड़ने और मीडिया में बयानबाजी कर पार्टी की छवि खराब करने का आरोप है। पार्टी ने उन्हें 24 घंटे में माफी मांगने का मौका दिया था, लेकिन माफी न मांगने पर उन्हें निष्कासित कर दिया गया।
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सेलम पश्चिम विधानसभा से विधायक आर. अरुल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर अंबुमणि रामदास ने सलेम वेस्ट से पार्टी विधायक आर. अरुल को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। बता दें, विधायक अरुल को पार्टी के संस्थापक और वरिष्ठ नेता एस. रामदास का करीबी माना जाता है।
डॉक्टर अंबुमणि रामदास ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि आर. अरुल ने पार्टी की अनुशासन समिति के नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने मीडिया में ऐसे बयान दिए, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा। अनुशासन समिति ने उन्हें 24 घंटे में माफी मांगने का मौका दिया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी वजह से पार्टी के उपनियम 30 के तहत उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी गई।
मेरी वफादारी सिर्फ रामदास के प्रति- आर. अरुल
हाल ही में आर. अरुल ने एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि उनकी असली वफादारी डॉ. रामदास के प्रति है। उन्होंने कहा था कि डॉ. रामदास के बाद केवल डॉ. अंबुमणि ही उनके नेता हैं। इस बयान ने पार्टी में पहले से चल रही गुटबाजी को और हवा दे दी।
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अंबुमणि से रिश्ते सुधारने की अपील
सिर्फ इतना ही नहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर. अरुल ने डॉ. अंबुमणि रामदास से अपील की थी कि वह अपने पिता और पार्टी के संस्थापक डॉ. रामदास से रिश्ते सुधारें। उन्होंने कहा था कि पार्टी की मजबूती के लिए दोनों नेताओं के बीच बातचीत जरूरी है। इसी बयान को पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता माना।
ये भी पढ़ें: समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष के लिए दाखिल किया नामांकन
सलेम में पीएमके को झटका
आर. अरुल सलेम जिले के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। यह इलाका लंबे समय से पीएमके का गढ़ माना जाता है। ऐसे में अरुल की पार्टी से विदाई को पीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे सलेम में पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।
ये भी पढ़ें: सोनिया-राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, ईडी ने अधिग्रहण में फर्जी लेन-देन का किया दावा
पार्टी में टूट की अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से PMK में अंदरूनी कलह और गहरी हो सकती है। पहले से ही पार्टी दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट डॉ. रामदास का समर्थक है और दूसरा गुट उनके बेटे डॉ. अंबुमणि का। आर. अरुल की बर्खास्तगी से यह टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। अब देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है।
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डॉक्टर अंबुमणि रामदास ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि आर. अरुल ने पार्टी की अनुशासन समिति के नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने मीडिया में ऐसे बयान दिए, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा। अनुशासन समिति ने उन्हें 24 घंटे में माफी मांगने का मौका दिया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी वजह से पार्टी के उपनियम 30 के तहत उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी गई।
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मेरी वफादारी सिर्फ रामदास के प्रति- आर. अरुल
हाल ही में आर. अरुल ने एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि उनकी असली वफादारी डॉ. रामदास के प्रति है। उन्होंने कहा था कि डॉ. रामदास के बाद केवल डॉ. अंबुमणि ही उनके नेता हैं। इस बयान ने पार्टी में पहले से चल रही गुटबाजी को और हवा दे दी।
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अंबुमणि से रिश्ते सुधारने की अपील
सिर्फ इतना ही नहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर. अरुल ने डॉ. अंबुमणि रामदास से अपील की थी कि वह अपने पिता और पार्टी के संस्थापक डॉ. रामदास से रिश्ते सुधारें। उन्होंने कहा था कि पार्टी की मजबूती के लिए दोनों नेताओं के बीच बातचीत जरूरी है। इसी बयान को पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता माना।
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सलेम में पीएमके को झटका
आर. अरुल सलेम जिले के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। यह इलाका लंबे समय से पीएमके का गढ़ माना जाता है। ऐसे में अरुल की पार्टी से विदाई को पीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे सलेम में पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।
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पार्टी में टूट की अटकलें तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से PMK में अंदरूनी कलह और गहरी हो सकती है। पहले से ही पार्टी दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट डॉ. रामदास का समर्थक है और दूसरा गुट उनके बेटे डॉ. अंबुमणि का। आर. अरुल की बर्खास्तगी से यह टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। अब देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है।