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Opposition Meet: संयोजक-लोगो से लेकर PM उम्मीदवार तक, जानें मुंबई में क्यों जुटा विपक्ष और अब तक क्या-क्या हुआ

Thu, 31 Aug 2023 05:47 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 31 Aug 2023 05:47 PM IST
सार

इस बैठक में इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) गठबंधन के संयोजक का नाम तय करने के अलावा समन्वय समिति का गठन किए जाने की उम्मीद है। इस दौरान गठबंधन के ‘लोगो’ और ‘एक सीट एक उम्मीदवार’ के फाॅर्मूले के तहत चुनी गई 450 सीटों पर चर्चा हो भी सकती है।

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Patna to Mumbai via Bengaluru: opposition meeting timeline and agenda
विपक्षी एकता की बैठक - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले ही चुनावी सरगर्मियाां बहुत बढ़ चुकी हैं। विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता आज से मुंबई में होने वाली दो दिवसीय बैठक में शामिल होने के लिए जुटे हुए हैं। इससे पहले इन नेताओं के बीच पटना और बंगलूरू में भी बैठकें हो चुकीं हैं।  
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पटना और बंगलूरू में हुई बैठकों के बाद से बहुत कुछ घट चुका है। पहली बैठक में क्या हुआ था? इसमें किन पार्टियों ने हिस्सा लिया था? दूसरी बैठक में क्या-क्या हुआ? इसमें किन दलों की सहभागिता हुई? अब तीसरी बैठक में क्या होने जा रहा है? इसमें किन दलों की भागीदारी होगी? इस बार की बैठक का एजेंडा क्या है? आइये जानते हैं… 
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Patna to Mumbai via Bengaluru: opposition meeting timeline and agenda
पटना में विपक्षी एकता की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
पहली बैठक में कब हुई थी और इसमें किन पार्टियों ने हिस्सा लिया था?
बिहार की राजधानी पटना में 15 विपक्षी राजनीतिक दलों की पहली बैठक 23 जून को हुई। यह बैठक बिहार के  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना के एक अणे मार्ग स्थित सरकारी आवास पर हुई। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी बैठक में मेजबान की भूमिका में नजर आए।  बैठक में ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान जैसे मुख्यमंत्रियों ने तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, डीएमके और आम आदमी पार्टी (आप) का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस बैठक में शामिल हुए।  

इस बैठक को बुलाने की कवायद राज्य के महागठबंधन के घटक दलों जदयू, राजद और कांग्रेस ने की। बैठक में समाजवादी पार्टी, एनसीपी, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेएंडके) और शिव सेना (यूबीटी) के नेता मौजूद रहे। वाम गुट का प्रतिनिधित्व सीपीएम, सीपीआई और सीपीआई (एमएल) ने किया। वहीं, बैठक में वरिष्ठ नेताओं के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव, फारूक अब्दुल्ला, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती और उद्धव ठाकरे भी मौजूद रहे। 

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विपक्षी दलों की बैठक के प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल और खरगे। - फोटो : सोशल मीडिया
पहली बैठक में क्या हुआ?
पहली बैठक में नेताओं ने विपक्षी दलों के नए गठबंधन को बनाने के तौर-तरीकों, प्रस्तावित गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम और 2024 के लोकसभा चुनावों से संबंधित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों में आम सहमति बनाना था।

इस बैठक में आप की ओर से केजरीवाल ने तब दिल्ली अध्यादेश के विरोध में अन्य विपक्षी दलों का साथ मांगा था। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एतराज जताया था। उन्होंने कहा था कि जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब तो आपकी पार्टी ने हमारा समर्थन नहीं किया था और संसद में सरकार का साथ दिया था। बैठक में केजरीवाल जिस दिल्ली अध्यादेश को लेकर कांग्रेस का हाथ अपने साथ चाहते थे, उस पर बात नहीं बनी और आप नेता मीडिया के सवालों का जवाब दिए बगैर निकल गए। 
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अजित पवार और शरद पवार के बीच राकांपा के लिए रस्साकशी। - फोटो : Amar Ujala
दूसरी बैठक की तैयारी के बीच एनसीपी में हुई टूट 
बिहार में 23 जून को हुई विपक्ष की बैठक के बाद 13-14 जुलाई को बंगलूरू में बैठक होने की जानकारी दी गई। इसी बीच, दो जुलाई को महाराष्ट्र में एनसीपी में अजित पवार के नेतृत्व में एक धड़ा टूटकर एनडीए में शामिल हो गया। 

बंगाल में पंचायत चुनाव में हिंसा को लेकर भिड़े विपक्षी दल
दूसरी विपक्षी बैठक से पहले पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव हुए। इस दौरान राज्यभर में हिंसा की घटनाएं हुईं और कई लोगों की मौत हुई। इन घटनाओं की निंदा उन दलों ने भी की, जो कुछ दिन पहले पटना में इकट्ठा बैठे थे। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो हिंसा के बीच धरने पर भी बैठे रहे और आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के गुंडों को खुली छूट मिल रही है और जनादेश को लूटा गया है। 

इसके अलावा माकपा ने घटनाओं के पीछे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का हाथ बताया। आरोपों का जवाब देते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'चुनावों के दौरान हिंसा के कारण जानमाल के नुकसान के लिए 'राम, शाम और वाम - भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम जिम्मेदार हैं।' 
 

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Opposition Meet - फोटो : ANI
दूसरी बैठक में कौन-कौन आया?
विपक्षी एकता की दूसरी बैठक बेंगलुरु में 17 और 18 जुलाई को हुई थी। विपक्षी एकता की बढ़ती ताकत को दिखाते हुए बंगलूरू में कुल 26 दल शामिल हुए। यह संख्या पटना में हुई बैठक से 10 से भी ज्यादा थी। पहले दिन विपक्षी नेता एक अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। 17 जुलाई को ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रात्रिभोज आयोजित किया जबकि अगले दिन सुबह 11 बजे से एक मैराथन बैठक हुई।

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Bengaluru Opposition Meeting - फोटो : Agency
दूसरी बैठक में ये नई पार्टियां जुड़ीं
  • मरूमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके)
  • कोंगु देसा मक्कल काची (केडीएमके)
  • विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके)
  • रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी)
  • ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक
  • इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 
  • केरल कांग्रेस (जोसेफ)
  • केरल कांग्रेस (मणि)

इसके अलावा कृष्णा पटेल का अपना दल (कामेरावादी) और एमएच जवाहिरुल्ला के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की मनिथानेया मक्कल काची (एमएमके) को भी निमंत्रण भेजे जाने के बाद मोर्चे में शामिल हुए। वहीं आरएलडी की ओर से जयंत चौधरी ने इस जुटान में शिरकत की जो पहली बैठक में नहीं पहुंचे थे।

दूसरी बैठक के एक दिन पहले कांग्रेस ने दिल्ली अध्यादेश पर आप के साथ जाने का एलान किया। इसके साथ ही आप के बैठक में शामिल होने की पुष्टि हो गई। शरद पवार पहले दिन हुए भोज में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन दूसरे दिन की बैठक में शामिल हुए। 

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सीएम आवास के पास तिरंगा लेकर नेताओं का स्वागत करते समर्थक। - फोटो : अमर उजाला
दूसरी बैठक में क्या-क्या हुआ?
बैठक में पार्टियों ने उन साझा कार्यक्रमों पर गौर किया, जिन पर काम किया जा सकता है। जैसे- आम मुद्दे जिन्हें उजागर किया जाना चाहिए और आने वाले समय के लिए एक रोडमैप तैयार किया जा सके। इसके अलावा इन सामान्य मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे- पार्टियों को भविष्य में क्या करने की आवश्यकता है? वर्तमान राजनीतिक स्थिति का आकलन करने के बाद आगामी संसद सत्र के लिए रणनीति बनाई गई और समस्याओं पर रोडमैप की तैयारी हुई।

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Opposition Alliance. - फोटो : Amar Ujala
गठबंधन को मिल गया 'इंडिया' नाम
दूसरी बैठक की सबसे बड़ी हाइलाइट विपक्षी गठजोड़ को मिला नया नाम 'इंडिया' था। वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन का नाम-INDIA पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा प्रस्तावित किया गया था। लंबी चर्चा के बाद इस पर मुहर लगाई गई।

'इंडिया' से जुड़े राजनीतिक दलों के संयुक्त प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था, 'हम उस मानवीय त्रासदी पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं जिसने मणिपुर को नष्ट कर दिया है। प्रधानमंत्री की चुप्पी चौंकाने वाली है।'

सामूहिक संकल्प में 26 विपक्षी दलों ने कही ये अहम बातें?
  • देश के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक एजेंडा पेश करेंगे।
  • शासन के सार और शैली दोनों को इस तरह से बदलने का वादा करते हैं कि वे अधिक परामर्शात्मक, लोकतांत्रिक, सहभागी हों।
  • अल्पसंख्यकों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, कश्मीरी पंडितों के खिलाफ घृणा, हिंसा को हराने के लिए एक साथ आए हैं।
  • 26 विपक्षी दलों के सामूहिक संकल्प में जातीय जनगणना कराने की वकालत।

अब तीसरी बैठक में क्या होने जा रहा है?
इस बैठक में इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) गठबंधन के संयोजक का नाम तय करने के अलावा समन्वय समिति का गठन किए जाने की उम्मीद है। इस दौरान गठबंधन के ‘लोगो’ और ‘एक सीट एक उम्मीदवार’ के फाॅर्मूले के तहत चुनी गई 450 सीटों पर चर्चा हो भी सकती है।

एक सचिवालय की घोषणा करने की भी संभावना
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा के मुताबिक मुंबई बैठक मौजूदा शासन की प्रतिगामी नीतियों के लिए एक प्रगतिशील विकल्प प्रदान करने के लिए स्पष्ट रोडमैप लेकर सामने आएगी। 'इंडिया' गुट द्वारा अपने घटक दलों के बीच सुचारू समन्वय के लिए एक सचिवालय की घोषणा करने की भी संभावना है और इसे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थापित किए जाने की संभावना है। इसके अलावा, सदस्य गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए एक संयोजक या अध्यक्ष बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा कर सकते हैं। 

इस बैठक में कौन-कौन से दल शामिल होंगे?
ऐसी अटकलें भी हैं कि मुंबई की बैठक में 26 दलों वाले इस विपक्षी गठबंधन में कुछ और क्षेत्रीय दल भी शामिल हो सकते हैं। मुंबई बैठक से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था, 'मेरी एकमात्र इच्छा यही है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा विरोधी अधिकतम दलों को एकजुट करें। मैं इसी दिशा में काम कर रहा हूं।'

उन्होंने रविवार को कहा था कि मुंबई बैठक के दौरान कुछ और राजनीतिक दलों के 'इंडिया' गठबंधन में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, नीतीश ने गुट में शामिल होने वाले संभावित नए दलों के नाम का खुलासा नहीं किया था। हाल ही में गठबंधन ने अपने साथ दो नए क्षेत्रीय संगठनों को जोड़ा एक पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (पीडब्ल्यूपी) और एक अन्य क्षेत्रीय संगठन।

अटकलें शिरोमणि अकाली दल के बारे में भी थीं लेकिन पार्टी ने स्पष्ट रूप से गठजोड़ में नहीं शामिल होने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने गांधी परिवार पर हमला बोला और कहा कि लगता है कि सभी दल एक परिवार को बचाने के लिए एक हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि अकाली दल न तो इंडिया न ही एनडीए के साथ है।
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