'बाबू ही सिस्टम का सबसे ताकतवर आदमी है'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने अनुभवों को साझा करते हुए जिलाधिकारी संजय अग्रवाल कहते हैं,'फाइल की जिंदगी तो बाबू पर ही निर्भर है। क्लर्क चाहे तो उस फाइल को मार दे या फिर जिंदा रखकर उसे अंजाम तक पहुंचाए। बाबू हमारे भारतीय सिस्टम का सबसे पावरफुल आदमी है।”
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ये नौबत क्यों आई? संजय अग्रवाल कहते है,'किसी भी आदमी को काम कराना है, तो उसका सबसे पहले क्लर्क से सामना होता है। लेकिन आप देखें तो क्लास तीन के स्तर पर ट्रेनिंग, मोटिवेशन, मॉनिटरिंग की कमी है।
वहां लोग काम नहीं कर रहे, क्योंकि उनकी जवाबदेही नहीं तय की गई है। ऐसे में जब कोई बड़ा अधिकारी उस जगह बैठता है, तो वो एक गाइडिंग फोर्स की तरह काम करता है। साथ ही उन पर एक तरह का दबाव भी बनता है।'
सबकी जवाबदेही तय हो
2008 में दरभंगा से रिटायर हुए जिलाधिकारी उपेन्द्र शर्मा के मुताबिक,'सिस्टम में सबका काम बंटा हुआ है। सबकी जवाबदेही तय हो और सख्ती से, ट्रेनिंग के जरिए काम कराया जाए तो फिर काम लंबित होने का सवाल ही नहीं है और यही ज्यादा कारगर तरीका है।' संजय अग्रवाल भी मानते हैं कि सिस्टम में अगर बाबुओं को ज्यादा जवाबदेह बना दिया जाए, काम निपटाने के लिए समय सीमा बांध दी जाए और लोगों को इस बात की जानकारी दे दी जाए कि उनका काम किस डेस्क पर होगा, तो आम आदमी की मुश्किलें बहुत आसान हो जाएंगी।
हालांकि संजय अग्रवाल का यह प्रयोग बहुत सफल हो रहा है, ऐसा फिलहाल तो नहीं लगता। 55 साल के बैजनाथ चौधरी दानापुर से आए हैं, वो गोताखोर हैं, 15 साल की उम्र से ही उन्होंने गोताखोरी करनी शुरू कर दी थी। त्यौहारों या किसी खास मौके पर प्रशासन उनकी मदद लेता है, ताकि पानी में डूबने वालों को बचाया जा सके।
अपनी अर्जी लेकर आए बैजनाथ चौधरी कहते हैं,'पानी से आदमी निकालना आसान है, लेकिन सरकार की जेब से पैसा नहीं।' छह बच्चों के पिता बैजनाथ ने साल 2014 के दुर्गा पूजा, छठ और कार्तिक पूर्णिमा में 29 नाव और गोताखोरों के साथ टीम लीडर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। इसके लिए सरकार को करीब एक लाख 38 हजार रुपए देने हैं, लेकिन अभी तक ये राशि बैजनाथ को नहीं मिल पाई है।
निराश बैजनाथ कहते हैं,'दानापुर में भागते भागते परेशान हो गए हैं। बाबू भगा देता है पैसा जारी नहीं करता। कोई सरकार आपने देखी है, जो गरीब का ही पैसा रख ले। सरकार और ये बाबू तो गरीब की सेवा करने के लिए बने हैं ना?' अनपढ़ बैजनाथ जो सवाल पूछ रहे हैं, शायद उससा जवाब ही पटना के जिलाधिकारी और भारत की ब्यूरोक्रेसी दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।