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Corona Deaths Audit: संसदीय पैनल ने कहा- दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों का ऑडिट करे सरकार

Tue, 13 Sep 2022 05:58 AM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 13 Sep 2022 05:58 AM IST
सार

समाजवादी पार्टी के सदस्य राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाले पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि समिति सरकार की इस घोर अज्ञानता से निराश है और परिवार कल्याण मंत्रालय को विशेष रूप से कोविड की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली मौतों की संख्या की जांच करने की जोरदार सिफारिश करती है।

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Parliamentary Panel says Govt. must audit deaths due to Oxygen shortage in Covid second wave
संसद भवन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

विस्तार

देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के दावे को सरकार लगातार नकारती रही है। इसी बीच स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट में सिफारिश की है कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ऑक्सीजन की कमी के कारण कोविड की मौतों की जांच करे और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा सुनिश्चित करे।

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समिति सरकार की घोर अज्ञानता से निराश
समाजवादी पार्टी के सदस्य राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाले पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि "समिति सरकार की इस घोर अज्ञानता से निराश है और परिवार कल्याण मंत्रालय को विशेष रूप से कोविड की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली मौतों की संख्या की जांच करने की जोरदार सिफारिश करती है।"
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समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि "मंत्रालय को राज्यों के साथ समन्वय कर ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली मौतों का ऑडिट करना चाहिए और कोविड से होने वाली मौतों के ठोस दस्तावेज को सबके सामने लाना चाहिए, जो वास्तव में सरकार की उत्तरदायी और जिम्मेदार भावना है। इस दस्तावेज के सामने आने से नीति के सतर्क सूत्रीकरण और स्थितिजन्य स्वास्थ्य आपातकालीन देखभाल का सामना करने में मदद मिलेगी।"
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सरकारी एजेंसियों से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा
समिति ने कहा कि वह सरकारी एजेंसियों से अधिक पारदर्शिता और अधिक जवाबदेही की अपेक्षा करती है। मंत्रालय को ऑक्सीजन से प्रभावित कोविड मौतों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ितों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई थी फटकार
रिपोर्ट में कहा गया है कि "कोरोना मरीजों के परिवारों द्वारा ऑक्सीजन के लिए गुहार लगाने और ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए कतार में प्रतीक्षा करने के कई उदाहरण सामने आए थे। मीडिया ने अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और हताश करने वाली अपील को दिखाया था, जब अस्पतालों को केवल कुछ घंटों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ छोड़ दिया गया था। इस मामले में अप्रैल, 2021 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने चिकित्सा ऑक्सीजन के वितरण में कथित कुप्रबंधन के लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने मई, 2021 में केंद्र सरकार को ऑक्सीजन के अप्रयुक्त टैंकरों को उन राज्यों से दिल्ली लाने के लिए भी कहा था, जहां कोविड-19 की स्थिति में सुधार हो रहा था। "

इससे पहले, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों की पुष्टि करने को लेकर अनुरोध किया था। जिसके जवाब में 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने बताया था कि उसके यहां ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है। अब, समिति ने अपने अवलोकन में कहा है कि मंत्रालय को राज्यों के साथ समन्वय करना चाहिए और ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली मौतों का ऑडिट करना चाहिए।

कोविड -19 की उत्पत्ति के रहस्य जैव-सुरक्षा के बड़े परिणाम हो सकते हैं: संसदीय समिति
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की स्थायी समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि वह अपनी कूटनीति के तहत राष्ट्रों के समूह से अपील करे कि वह कोविड-19 की उत्पत्ति की पहचान करने के लिए अध्ययन करे क्योंकि इससे दुनियाभर में जीवों की हिफाजत और जैव-सुरक्षा के संबंध में व्यापक परिणाम सामने आ सकते हैं। विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने "वैक्सीन विकास, वितरण प्रबंधन और कोरोना महामारी की गंभीरता के उपाय" पर अपनी 137वीं रिपोर्ट में यह सिफारिश की।


रिपोर्ट में कहा गया है, "अभी भी इस बात के पुख्ता सबूतों का अभाव है कि क्या कोरोनावायरस किसी प्रयोगशाला की घटना के जरिए इंसानों तक पहुंचा। फिर भी, समिति समझती है कि अगर कोरोनावायरस की उत्पत्ति को एक रहस्य बना रहने दिया गया, तो दुनिया की जीवों की हिफाजत और जैव-सुरक्षा पर इसके व्यापक परिणाम होंगे। इसलिए, समिति सरकार को अपनी कूटनीति पर विचार करने के लिए दृढ़ता से अनुशंसा करती है कि वह राष्ट्रों के समूह से अपील करे कि वे कोविड-19 की उत्पत्ति की पहचान करने के लिए और अधिक अध्ययन करें और दोषियों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दंडित करें।"

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