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मंथन: शादी की उम्र बढ़ाने के विधेयक पर संसदीय समिति की पहली बैठक, 95 हजार में से 90 हजार ईमेल बिल के विरोध में
Wed, 13 Apr 2022 08:50 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 13 Apr 2022 08:50 PM IST
सार
अपनी पहली बैठक में पैनल ने जया जेटली समिति की रिपोर्ट के एक हिस्से का अध्ययन किया और यह विधेयक वर्तमान समय और युग में क्यों महत्वपूर्ण है।
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बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक पर मंथन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बुधवार को पहली बैठक हुई। विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था। भाजपा सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समिति की बैठक में 31 सदस्यों की संख्या में से सिर्फ छह सदस्य शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि समिति ने विधेयक के संबंध में जनता की सिफारिश पर चिंता व्यक्त की है। दिलचस्प बात यह है कि पैनल को करीब 95,000 ईमेल मिले और इनमें से 90,000 ईमेल बिल के विरोध में हैं।
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समिति की हुई पहली बैठक
सूत्रों ने कहा कि समिति आने वाले दिनों में इसकी जांच करना चाहेगी। अपनी पहली बैठक में पैनल ने जया जेटली समिति की रिपोर्ट के एक हिस्से का अध्ययन किया और यह विधेयक वर्तमान समय और युग में क्यों महत्वपूर्ण है। जेटली की रिपोर्ट के बारे में विस्तार से जानने के लिए समिति की कुछ और बैठकें होने की संभावना है। इसके अलावा समिति अन्य लोगों के साथ-साथ महिला कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ भी चर्चा करेगी। समिति को हाल ही में एक और तीन महीने का विस्तार दिया गया था क्योंकि शीतकालीन और बजट सत्र के कारण चर्चा नहीं हो सकी थी। पैनल को अब 24 जून 2022 तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
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लड़कियों की विवाह की उम्र 21 वर्ष करने का प्रस्ताव
'बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021' में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए विवाह की आयु 21 वर्ष करने के लिए 'बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए)' में संशोधन करने का प्रस्ताव है, जो वर्तमान में पुरुषों के लिए 21 वर्ष है और महिलाओं के लिए 18 वर्ष है। भारत के संविधान के तहत मौलिक अधिकार और राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (विशेषकर समानता का अधिकार और शोषण के खिलाफ अधिकार) लैंगिक समानता की गारंटी देते हैं। प्रस्तावित कानून उसी के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की दिशा में एक मजबूत उपाय है क्योंकि यह महिलाओं को पुरुषों के बराबरी पर लाएगा। मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर को कम करने और पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ जन्म के समय लिंग अनुपात में वृद्धि के लिए जरूरी हैं।
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