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पैंगोंग जाएगी रक्षा मामलों की संसदीय समिति, राहुल गांधी बैठक से रहे गायब

Sun, 14 Feb 2021 06:21 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 14 Feb 2021 06:21 AM IST
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Parliamentary panel on defence decides to visit Galwan Valley, Pangong in Eastern Ladakh
पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गलवां घाटी और पैंगोंग झील का दौरा करेगी रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति 15 मई के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गलवां घाटी और पैंगोंग झील का दौरा करेगी। यह वह क्षेत्र है जहां भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक गतिरोध हुआ था।

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम की अध्यक्षता में 30 सदस्यीय समिति के सदस्य मई के अंतिम हफ्ते में या जून में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र का दौरा करना चाहते हैं। राहुल गांधी भी इस समिति के सदस्य हैं। हालांकि वह इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
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इन क्षेत्रों का दौरा करने का निर्णय पैनल की पिछली बैठक में लिया गया था जिसमें राहुल गांधी शामिल नहीं थे। सूत्रों ने कहा, चूंकि पैनल एलएसी का दौरा करना चाहता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जाने के लिए समिति को सरकार से मंजूरी लेनी होगी।
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समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष ओराम ने बताया, दस दिन पहले हुई समिति की बैठक में कुछ सदस्यों ने यह सुझाव दिया था। स्पीकर की अनुमति के बाद सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि  हमारी समिति पहले भी भारत-चीन सीमा का दौर कर चुकी है। इसके अलावा हम नाथुला तवांग और भारत-बांग्लादेश सीमा का भी दौरा कर चुके हैं।

पैंगोंग से कम हो रहे सैनिक
पैंगोंग झील पर समझौते के बाद चीन और भारत की सेनाएं इलाके में सैनिकों की संख्या को लगातार कम कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि झील के दक्षिण तट पर टकराव के बिंदु से बख्तरबंद वाहनों को हटाया जा रहा है। बख्तरबंद वाहनों की वापसी का काम लगभग पूरा हो चुका है। अस्थायी ढांचे को अगले कुछ दिन में गिराया जाएगा।

सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया में भारत ने किसी भी इलाके से दावा नहीं छोड़ा : रक्षा मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो (झील) इलाके में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर समझौता करते हुए किसी भी इलाके से दावा नहीं छोड़ा है। वहीं, देपसांग, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा सहित अन्य लंबित ‘‘समस्याओं’’ को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच आगामी वार्ताओं में उठाया जाएगा।

सरकार का यह बयान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने भारत माता का एक टुकड़ा चीन को दे दिया।


कांग्रेस नेता ने सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर हुए समझौते को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर भाजपा ने भी गांधी के आरोपों पर पलटवार किया।

भारत-चीन सीमा गतिरोध के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राहुल गांधी द्वारा निशाना साधे जाने के बाद भाजपा ने शुक्रवार को उनपर जमकर पलटवार किया। पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कांग्रेस नेता के आरोपों को झूठा करार देते हुए पूछा कि क्या यह सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे सशस्त्र बलों का अपमान नहीं है।

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