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Parliamentary Friendship Groups: स्पीकर बिरला बनाए 60+ देशों के समूह, सरकार बोली- विदेश नीति को मिलेगी मजबूती

Tue, 24 Feb 2026 04:11 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 24 Feb 2026 04:11 PM IST
सार

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसका सुझाव दिया था। इसमें सभी दलों के सांसद शामिल हैं। इसका उद्देश्य दुनिया भर की संसदों के साथ भारत के रिश्तों और संसदीय कूटनीति को मजबूत करना है।

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Parliamentary Friendship Group Speaker Om Birla foreign policy Operation Sindoor success PM Narendra Modi
किरेन रिजिजू केंद्रीय मंत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत ने दुनिया के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका प्रस्ताव रखा था। पीएम मोदी चाहते थे कि भारत और अन्य देशों के बीच संबंध और गहरे हों।
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क्या है इन समूहों का काम?
रिजिजू ने ट्वीट कर बताया कि भारत की वैश्विक उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। यह पहल प्रमुख देशों के साथ रिश्तों को गहरा करेगी। इसका मकसद सिर्फ सरकारों के बीच नहीं, बल्कि संसदों के बीच भी सीधा संपर्क बढ़ाना है। इससे पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ संसदीय कूटनीति भी मजबूत होगी। सांसद अपने विदेशी समकक्षों से सीधे बात करेंगे, अनुभव साझा करेंगे और व्यापार, तकनीक व संस्कृति जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
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कौन-कौन है शामिल?
खास बात यह है कि इन समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को जगह मिली है। इसमें रवि शंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, अखिलेश यादव, असदुद्दीन ओवैसी, सुप्रिया सुले, शशि थरूर, हेमा मालिनी, अनुराग ठाकुर, संजय सिंह, के.सी. वेणुगोपाल, अभिषेक बनर्जी और निशिकांत दुबे जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। जो यह दिखाता है कि विदेश नीति पर पूरा देश एक है।
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किन देशों के साथ बने समूह?
जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी, इजराइल, सऊदी अरब, श्रीलंका, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। पहले चरण में 60 से ज्यादा देश चुने गए हैं, जल्द ही अन्य देशों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।


ऑपरेशन सिंदूर और एकजुटता का संदेश
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी ने दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे थे। इसने संदेश दिया कि देश की सुरक्षा और हितों पर भारत एकजुट है। अब ये मैत्री समूह इसी दिशा में अगला कदम हैं। ओम बिरला का मानना है कि इससे भारत एक जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

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