फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Parliament Winter session 2021: Government saved from attacks of opposition in Parliament by farm laws repeal bill without discussion

शीतकालीन सत्र: बगैर चर्चा कृषि कानूनों की वापसी करके संसद में विपक्ष के तीखे हमलों से बच गई सरकार

Tue, 30 Nov 2021 11:30 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 30 Nov 2021 11:30 AM IST
सार

संसद का सत्र शुरू होने के पहले प्रधानमंत्री मीडिया के सामने आए। विपक्ष को हंगामा करने के बजाय सदन में चर्चा में भाग लेने, सवाल पूछने की नसीहत दे डाली। सरकार का संदेश दिया कि केंद्र सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा और विपक्ष के सवालों का जवाब तथा संसदीय परंपरा का निर्वाह करने के लिए तैयार है। लेकिन संसद के दोनों सदनों में हुआ इसका ठीक विपरीत...

विज्ञापन
Parliament Winter session 2021: Government saved from attacks of opposition in Parliament by farm laws repeal bill without discussion
राज्यसभा शीतकालीन सत्र - फोटो : Agency

विस्तार

तीनों कृषि कानून जिस तरह से अस्तित्व में आए थे, करीब-करीब ठीक उसी तरह से संसद से कृषि विधि निरसन विधेयक के रूप में पारित हो गए। केंद्र सरकार ने पहले ही तय कर लिया था कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कृषि विधि निरसन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पेश करेगी, लेकिन सरकार इसे बिना चर्चा कराए पारित कराएगी। चर्चा न कराने के पीछे भी रणनीति थी और ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार की और फजीहत होने से बचाना चाहते थे।

विज्ञापन


केंद्रीय कृषि मंत्री ने विधेयक के मसौदे को सदन के पटल पर रखते हुए कहा कि विपक्ष भी इसके लिए तैयार है। इस विधेयक पर कोई भी विषय आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। इस पर चर्चा कराए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसे सदन में पारित किया जाए। इसके बाद सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग, आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि की मांग के साथ शोरशराबा करना शुरू कर दिया। इसी शोर शराबे के बीच उपसभापति ने तीनों विधेयकों को पारित करने का प्रस्ताव किया और बिना चर्चा के सदन ने पारित कर दिया। कुछ ऐसा ही लोकसभा में भी हुआ।

विज्ञापन

खासा महत्वपूर्ण रहा शुरुआत का कुछ समय

राज्यसभा में उपसभापति ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को कृषि विधि निरसन विधेयक का प्रस्ताव पेश करने के लिए कहा। तोमर अपने स्थान पर खड़े हुए और उन्होंने कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्यि (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, आवश्यक वस्तु अधिनियम (सं) विधेयक-2020 का निरसन और आवश्यक वस्तु अधिनियम1955 का संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्रीय मंत्री के प्रस्ताव करने के बाद परंपरा के अनुरुप सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे खड़े हुए। उन्होंने उपसभापति से पूछा कि यह द फार्म लॉ रिपील बिल 2021 (कृषि निरसन विधेयक-2021) है? उपसभापति ने हां में उत्तर दिया। उसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सब इसका स्वागत करते हैं। कोई इसके विरोध में नहीं है, क्योंकि यह किसानों से जुड़ा मुद्दा है और सरकार को एक साल 13 महीने बाद पांच राज्यों में चुनाव, उपचुनाव के विपरीत नतीजे देखकर 700 किसानों की जानें जाने के बाद इसका ज्ञान आया है। मल्लिकार्जुन खड़गे के इतना कहने के बाद सत्ता पक्ष बिना चर्चा के बिल पारित कराने की रणनीति पर उतर आया और विपक्ष के सदस्य चर्चा कराने की मांग को लेकर हो-हल्ला, हंगामा करने लगे।

सरकार को फजीहत से बचा ले गए प्रधानमंत्री मोदी?

संसद का सत्र शुरू होने के पहले प्रधानमंत्री मीडिया के सामने आए। विपक्ष को हंगामा करने के बजाय सदन में चर्चा में भाग लेने, सवाल पूछने की नसीहत दे डाली। सरकार का संदेश दिया कि केंद्र सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा और विपक्ष के सवालों का जवाब तथा संसदीय परंपरा का निर्वाह करने के लिए तैयार है। लेकिन संसद के दोनों सदनों में हुआ इसका ठीक विपरीत। न केवल कृषि मंत्री, बल्कि भाजपा के नेता राजीव प्रताप रूड़ी समेत मंत्रियों, सांसदों नें भी विधेयक पर चर्चा को गैर वाजिब बताया।

दरअसल, चर्चा की स्थिति आने पर एक दिन में तीनों विधेयकों के दोनों सदनों में पारित होने की कोई संभावना नहीं थी। इतना ही नहीं पहले ही विधेयक में किसानों को उनके अनाज का सही मूल्य दिलाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की किसानों को गारंटी देने, 700 किसानों की आंदोलन के दौरान मृत्यु, उनके लिए मुआवजे की मांग को झेलना सत्ता पक्ष के लिए मुश्किल हो जाता। संसदीय परंपरा के अनुरूप संसद की स्थायी समिति के पास विचारार्थ विधेयक को भेजने अथवा 15 महीने पहले सत्ता पक्ष द्वारा बिना चर्चा के विधेयक पारित करने के सवाल सत्ता पक्ष की फजीहत कराते।

सबसे मुश्किल सवाल, लखीमपुर खीरी प्रकरण

सरकार के लिए सबसे मुश्किल सवाल अपने ही गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के इस्तीफे की मांग और लखीमपुर खीरी की हिंसा थी। इस मामले की फॉरेंसिक रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें गृह राज्यमंत्री के बेटे की पिस्टल से गोली चलने, हिंसा के समय उसके गाड़ी में होने के सबूत सामने आ रहे हैं। ऐसे में जांच प्रक्रिया के प्रभावित होने समेत तमाम सवालों से केंद्र सरकार को दो-चार होना पड़ता।

पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल जैसे नेता इस दौरान केंद्र सरकार को घेरने की पूरी रणनीति के साथ आए थे। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी। एक पूर्व मंत्री का कहना है कि राज्य सभा में हमारे सदस्यों की संख्या ठीक-ठाक है। विपक्ष के सदस्य भी इस मुद्दे पर एकमत हैं। ऐसे में किसानों की मांग पर संशोधन के प्रस्ताव या फिर मत विभाजन की स्थिति सरकार की फजीहत करा सकती थी।


विपक्ष को चकमा देने, सेंध लगाने की बनी रही कोशिश

संसद के दोनों सदनों में कृषि विधि निरसन विधेयक को पेश करने की तैयारी के साथ-साथ सत्ता पक्ष ने फ्लोर मैनेजमेंट को साधने की कोशिशों को जारी रखा। संसद का सत्र आरंभ होने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। राज्यसभा में पार्टी के नेता शिव प्रताप शुक्ला ने सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयक का हवाला देकर सदन में उपस्थित रहने की व्हिप जारी की, और सत्ता पक्ष के फ्लोर प्रबंधकों ने विपक्ष की एकता में फूट के लिए सभी राजनीतिक दांव चले। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की हर राजनीतिक दल में पैठ है। सौम्य स्वभाव के पार्टी और सरकार के हर लक्ष्य को साधने में माहिर यादव ने 29 नवंबर को भी विपक्ष के हमलों को झेलने के साथ-साथ संकट मोचक की भी भूमिका निभाई। दरअसल सरकार की चिंता का विषय भी केवल राज्यसभा में ही विधेयक को पारित कराना था। लोकसभा में सत्ता पक्ष के पास पूर्ण बहुमत है।

विपक्ष को श्रेय लेने का कोई अवसर नहीं मिल पाया  

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी रणनीति के तहत खेती खलिहानी से जुड़े इन तीनों विधेयकों निरस्त कराया। 19 नवंबर को उन्होंने खुद तीनों कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। इसके लिए किसान नेताओं से मिलने, उनसे चर्चा करने के विकल्प को नहीं चुना। माना जा रहा है कि वह किसान संगठनों के नेताओं को इसका किसी तरह का श्रेय देने के पक्ष में नहीं थे। इसी तरह से संसद में कृषि विधि निरसन विधेयक पेश होने के बाद इसे पारित कराने में विपक्ष को किसी तरह का सहयोग करने का श्रेय लेने से वंचित कर दिया। इसकी पूरी खीझ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में उतारी। राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि सरकार ने एमएसपी, शहीद अन्नदाता के लिए न्याय, लखीमपुर खीरी मामले में गृह राज्य मंत्री की बर्खास्तगी पर चर्चा नहीं होने दी। 'जो छीने संसद में चर्चा का अधिकार, फेल है, डरपोक है वो सरकार!'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed