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Parliament: 1952 के बाद से वर्तमान 17वीं लोकसभा पर लग सकता है सबसे छोटी पूर्णकालिक संसद का ठप्पा, यह है वजह

Thu, 20 Jul 2023 01:48 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 20 Jul 2023 01:48 PM IST
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सार
संसद सत्र के दौरान मणिपुर हिंसा, दिल्ली अध्यादेश बिल पर चर्चा हो सकती है। केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सरकार नियमों के तहत इन मुद्दों पर चर्चा करने की इच्छुक है, इसलिए इस बार 31 बिलों को सूचीबद्ध किया गया है...
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Parliament: Since 1952, the current 17th Lok Sabha may be labeled as the smallest full-time parliament
Parliament - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

संसद के इस मानसून सत्र के दौरान 11 अगस्त तक कुल 17 बैठकें होंगी। इस दौरान सरकार लोकसभा में 31 विधेयक पेश करने वाली है। समझा जा रहा है कि इस सत्र में भी सरकार और विपक्ष के बीच जमकर जुबानी उठापटक होगी। अगर संसद की कार्यवाही में कोई व्यवधान नहीं हुआ तब भी 1952 के बाद से वर्तमान 17वीं लोकसभा पर सबसे छोटी पूर्णकालिक लोकसभा होने का ठप्पा लग जाएगा।

इस वर्ष अप्रैल में बजट सत्र समाप्त होने तक 17वीं लोकसभा में 230 बैठक दिवस पूरे हो चुके हैं। जिन लोकसभाओं ने पांच वर्षों के कार्यकाल पूरे किए हैं, उनमें 16वीं लोकसभा में सबसे कम बैठक दिवस (331 दिन) हुए थे। वर्तमान लोकसभा पूरा होने में एक वर्ष और है और इस दौरान तीन सत्र आयोजित होंगे, जिनमें मॉनसून सत्र भी शामिल है। वर्तमान लोकसभा में प्रत्येक वर्ष औसतन बैठक दिवसों की संख्या 58 रही है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, निर्धारित समय (46 घंटे) में लोकसभा में मात्र 33 फीसदी हिस्से में ही काम हुआ, वहीं राज्यसभा निर्धारित 32 घंटे में 24 फीसदी समय का ही इस्तेमाल कर पाई। सत्र के दूसरे हिस्से में लोकसभा और राज्यसभा में महज 5 फीसदी और 6 फीसदी हिस्से में ही काम हो पाया।

यह भी पढ़ें: Manipur Woman Video: मणिपुर में महिला के साथ हुई दरिंदगी पर हंगामा, संसद में घमासान के आसार

मणिपुर के हालात, रेल सुरक्षा और दिल्ली अध्यादेश पर होगी चर्चा

संसद सत्र के दौरान मणिपुर हिंसा, दिल्ली अध्यादेश बिल पर चर्चा हो सकती है। केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सरकार नियमों के तहत इन मुद्दों पर चर्चा करने की इच्छुक है, इसलिए इस बार 31 बिलों को सूचीबद्ध किया गया है। सभी दल मणिपुर पर चर्चा करना चाहते हैं और सरकार इसके लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष की एकजुटता पर तंज कसते हुए इसे नई बोतल में पुरानी शराब बताया।

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों का कहना है कि वे मणिपुर के हालात, रेल सुरक्षा, आवश्यक जिंसों की कीमतों में वृद्धि और महिला पहलवानों द्वारा भाजपा के एक सांसद पर यौन उत्पीड़न के आरोप पर सरकार से जवाब मांगेगी। इधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को धन शोधन निरोधक अधिनियम के अंतर्गत लाने का मुद्दा उठाएगी। इससे लाखों व्यापारियों एवं लघु एवं सूक्ष्म कारोबारों पर असर हो रहा है। कांग्रेस ने कहा कि ‘नए पहलुओं के उजागर होने के बाद’ पिछले सत्र की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी और अदाणी समूह के बीच कथित संबंधों की जांच एक संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग करेगी।

संसद के मॉनसून सत्र में जिन विधेयकों पर चर्चा संभावित हैं, उनमें सर्वाधिक बखेड़ा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक पर हो सकता है। यह विधेयक उस अध्यादेश की जगह लेगा जिसमें दिल्ली सरकार के अंतर्गत अफसरशाही पर केंद्र को अधिकार दिए गए हैं। 11 मई को उच्चतम न्यायालय से पक्ष में निर्णय नहीं आने के बाद सरकार यह अध्यादेश लेकर आई थी।

आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद इस अध्यादेश का विरोध कर सकते हैं। पार्टी के राज्यसभा में 10 सांसद हैं। कांग्रेस ने भी शनिवार को आगामी मॉनसून सत्र के लिए रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई बैठक में इस विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया। रविवार को कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है। कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। कांग्रेस के इस बदले रुख के बाद बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक में आप के शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यसभा में भाजपा बहुमत से दूर है। उन क्षेत्रीय दलों के लिए राज्यसभा में इस विधेयक के पक्ष में मतदान करना फजीहत का कारण बन सकता है जिन्होंने (जैसे बीजू जनता दल) पिछले चार वर्षों के भाजपा का संसद के ऊपरी सदन में समर्थन किया है।

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