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संविधान संशोधन पर रार: 'कसकर जवाब देंगे', संसद में अमित शाह की दो-टूक, विरोध कर रहे विपक्ष में किसने क्या कहा?

Thu, 16 Apr 2026 11:28 AM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Thu, 16 Apr 2026 11:28 AM IST
सार

संसद के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) और परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सरकार ने लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू की, जबकि विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। सरकार इसे चुनावी व प्रशासनिक सुधार बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे असंतुलन पैदा करने वाला कदम मान रहा है।

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Parliament Session 131st Constitution Amendment UT Laws Amendment and Delimitation Bill 2026 Who Said What
महिला आरक्षण बिल पर संसद में चर्चा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

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देश की चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इसी बीच बुधवार को संसद के विशेष सत्र की कार्यवाही जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुई। सत्र की शुरुआत में ही सरकार ने तीन अहम विधेयकों को लोकसभा में पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में पेश करने का प्रस्ताव रखा। 

इसके साथ ही दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 को पेश करने का प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव रखने के साथ ही संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। विपक्ष ने इन प्रस्तावों पर आपत्ति जताई, जबकि सरकार का कहना है कि ये बदलाव देश की चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं।

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मेघवाल ने की चर्चा की शुरुआत
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने की। उन्होंने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की प्रगति से तय होती है। मेघवाल ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का भी हवाला दिया और कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का समय अब आ गया है।

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उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पास हो चुका है और इसे 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा। मेघवाल ने यह भी कहा कि इससे किसी भी राज्य या पुरुष सांसद को नुकसान नहीं होगा और सभी की वर्तमान स्थिति बरकरार रहेगी।


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केसी वेणुगोपाल ने किया विरोध
सरकार की ओर से इस विधेयक को सामने रखने के साथ ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन तीनों विधेयकों के पेश किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में लाने के खिलाफ आपत्ति जताई। इसको लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।

वेणुगोपाल के बयान पर अमित शाह का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। अमित शाह ने कहा कि केसी वेणुगोपाल विधेयकों के गुण-दोष पर टिप्पणी नहीं कर सकते और वे केवल तकनीकी आपत्तियां ही उठा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बहस के दौरान विपक्ष को मजबूत जवाब देगी।

अखिलेश यादव ने सरकार पर जल्दीबाजी करने का लगाया आरोप
वहीं सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि महिला विधेयक के पक्ष में हैं हम। आपको जल्दीबाजी क्यों है? आप जनगणना क्यों नहीं कराना चाहते? सेंसस ये इसलिए नहीं करना चाहते हैं कि जैसे ही जनगणना होगी, हम सब लोग जाति गणना मांगेंगे, जाति की गिनती के बाद हम आरक्षण मांगेंगे। इसलिए धोखा देकर लाना चाहते हैं।


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अखिलेश के आरोपों पर शाह का पलटवार
वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने अखिलेश कहा कि मैं देश की जनता को बताना चाहता हूं कि देश में जनगणना का काम जारी है। सरकार जाति गणना का निर्णय भी ले चुकी है... अभी घरों की गिनती हो रही है। घरों की कोई जाति नहीं होती। समाजवादी पार्टी की चले तो घरों की भी जाति तय कर दे। जब नागरिकों की जनगणना होगी तब उसमें जाति का कॉलम रखा है। ये मेरा विभाग है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये जनगणना जाति के साथ ही होने वाली है।

अब समझिए पूरा मामला
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 की जा सकती है, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। इसके लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी, और ये सीटें रोटेशन के आधार पर तय होंगी। विपक्षी दलों ने बुधवार को ही तय किया था कि वे परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का संयुक्त रूप से विरोध करेंगे, हालांकि महिला आरक्षण का समर्थन जारी रहेगा।

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