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पाकिस्तान और चीन पलायन कर गए लोगों का भारत की संपत्ति पर नहीं होगा हक

Wed, 15 Mar 2017 08:00 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट Updated Wed, 15 Mar 2017 08:00 AM IST
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Parliament passes Enemy Property bill
पाकिस्तान और चीन में पलायन कर गए लोग अब भारत में छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा नहीं कर सकेंगे। संसद में शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक को मंजूरी मिल गई है। इस संशोधन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी पहले ही मिल गई है। मंगलवार को लोकसभा ने भी ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।
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शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक में युद्ध के बाद चीन और पाकिस्तान पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति के उत्तराधिकार या हस्तांतरण के दावों को खारिज करने का प्रावधान है। बताया जा रहा है कि कानून संशोधन के बाद यूपी में राजा महबूबाबाद की संपत्ति पर भी ग्रहण लग जाएगा। 
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विधेयक पर विपक्ष के आशंकाओं को दूर करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस कानून से मानवाधिकारों ओर नैसर्गिक सिद्धातों का उल्लंघन नहीं होता है। सरकार को अपने शत्रु राष्ट्र या उनके नागरिकों की संपत्ति रखने या फिर किसी व्यवसायिक हित में मंजूरी नहीं देनी चाहिए। ऐसी संपत्ति पर सरकार का अधिकार होना चाहिए न कि शत्रु देश के नागरिकों के पास इसका अधिकार होना चाहिए।
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राजनाथ सिंह ने कहा यह कानून पाकिस्तान समेत चीन और अन्य देशों में भी लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा यह सिर्फ पाकिस्तान गए लोगों की संपत्ति का नहीं बल्कि चीन गए लोगों की संपत्ति का मामला है। 

'1 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की होगी रक्षा '

Parliament passes Enemy Property bill
यूपी में राजा महबूबाबाद की जमीन का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि महबूबाबाद के पुरखे राजा आमिद मोहम्मद को जमीन अंग्रेजो के जरिए तालूकदारी संपत्ति के रूप में मिली थी। महबूबाबाद अब भी जमीन के नॉन आकूपेंसी टेनेंट हैं।

राजनाथ ने कहा कि तालूकदारी संपत्ति वह संपत्ति है जोकि अंग्रेजो के जरिए स्वतंत्रता संग्राम के विरोधियों को दी गई थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने 1857 में कुछ लोगों को स्वतंत्रता संग्राम को कूचलने के कार्य में जुटाया था। बाद में उन लोगों को तालूकदारी के तहत भारी मात्रा में भूसंपत्ति प्रदान किया। शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक 2016 की वकालत करते हुए राजनाथ ने कहा कि इससे 1 लाख करोड़ से ज्यादा के संपत्ति की रक्षा होगी। देश में शत्रु संपत्ति से जुड़े 1000 से ज्यादा मामले हैं। 

दरअसल शत्रु संपत्ति (संशोधन और मान्यकरण) विधेयक 2016, 10 मार्च को राज्यसभा में ऐसे समय में पारित किया गया था, जब विपक्षी सदस्य सदन में लगभग नदारद थे। लोकसभा में इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक के तहत शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968, को संशोधित किया गया है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार शत्रु संपत्ति के सभी अधिकार कस्टोडियन के अधीन होंगे और इसके अनुसार शत्रु संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा।

यह कानून अबतक हुए सभी शत्रु संपत्ति हस्तांतरणों पर मान्य होगा। नए विधेयक के अनुसार, शत्रु के उत्तराधिकारी या कानूनी उत्तराधिकारी उसकी संपत्ति के हकदार नहीं होंगे। विधेयक के अनुसार, नागरिक अदालतों और अन्य प्राधिकारों को शत्रु संपत्ति से संबंधित मुद्दों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं होगा। 
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