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Parliament Pannel: 'अग्निवीरों की भर्ती के लिए कानून लाने की जरूरत',सिविल सेवा को लेकर भी समिति ने दिया सुझाव
Thu, 03 Aug 2023 10:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 03 Aug 2023 10:03 PM IST
सार
संसदीय समिति ने गुरुवार को संसद में 'भारत सरकार के भर्ती संगठनों के कामकाज की समीक्षा' पर 131वीं रिपोर्ट पेश की। इसमें संसदीय पैनल ने कहा कि नौकरी पर चार साल की सेवा के बाद 75 प्रतिशत सैनिकों को उनकी सेवाओं से छुट्टी दे दी जाएगी और केवल 25 प्रतिशत को मौजूदा नियमों के अनुसार सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि सवाल यह है कि बाकी 75 प्रतिशत का क्या होगा?
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संसद (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : ANI
विस्तार
अग्निवीरों की भर्ती को लेकर एक संसदीय समिति ने सरकार को सुझाव दिया है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को देश के सशस्त्र बलों में 'अग्निवीरों' की भर्ती को नियंत्रित करने के लिए एक कानून लाने की संभावना तलाशनी चाहिए। साथ ही संसदीय समिति ने अग्निवीरों के बीच किसी भी प्रकार के असंतोष को रोकने के लिए अन्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण या प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया है।
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संसदीय समिति ने गुरुवार को संसद में 'भारत सरकार के भर्ती संगठनों के कामकाज की समीक्षा' पर 131वीं रिपोर्ट पेश की। इसमें संसदीय पैनल ने कहा कि नौकरी पर चार साल की सेवा के बाद 75 प्रतिशत सैनिकों को उनकी सेवाओं से छुट्टी दे दी जाएगी और केवल 25 प्रतिशत को मौजूदा नियमों के अनुसार सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि सवाल यह है कि बाकी 75 प्रतिशत का क्या होगा?
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ऐसे में इन अग्निवीरों के बीच असंतोष को रोकने के लिए समिति का सुझाव है कि शेष अग्निवीरों को अन्य सरकारी नौकरियों में यथासंभव अधिकतम सीमा तक आरक्षण या वरीयता दी जा सकती है। जिससे प्रशिक्षित व्यक्तियों और बलों में सेवा के दौरान उनके कौशल का उपयोग किया जा सके। समिति ने यह भी बताया है कि अग्निवीरों को पुलिस बल, संसद सुरक्षा सेवा और कोई अन्य लड़ाकू बल में वरीयता देना व्यावहारिक है।
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सिविल सेवक बनने का प्रलोभन अन्य पेशे में डाल रहा असर
भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सिविल सेवाओं में 70 प्रतिशत से अधिक भर्तियां तकनीकी और मेडिकल वर्ग से की जा रही हैं, इसके चलते देश की अन्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सिविल सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। समिति ने कहा कि एक सिविल सेवक सरकार और आम लोगों के बीच एक सेतु के रूप में जमीनी स्तर पर काम करता है। इसके लिए लोगों के प्रति काफी मानवीय स्पर्श और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। एक सिविल सेवक को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वह मुद्दों के प्रति मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से काम कर सके। मौजूदा चयन प्रक्रिया से हम हर साल सैकड़ों टेक्नोक्रेट खो रहे हैं। इनकी देश के लिए महत्वपूर्ण अन्य विशिष्ट क्षेत्रों में भी आवश्यकता है।
स्कूल, कॉलेज में नशीले पदार्थों पर फैलाएं जागरूकता
एक संसदीय समिति ने स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों की लत, इसके परिणामों और नशामुक्ति उपायों पर अध्याय शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति की रिपोर्ट बृहस्पतिवार को लोकसभा में रखी गई। समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उचित परामर्श दिया जाए। देश का लक्ष्य एक ऐसे समाज को बढ़ावा देना है, जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग को एक चरित्र दोष के बजाय एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में समझे।
993 वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस जारी
केंद्र सरकार ने कहा कि इस साल 24 जुलाई तक कुल 993 वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस जारी किए गए हैं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वीके सिंह ने लोकसभा को बताया कि 57 हवाईअड्डों पर 36 उड़ान प्रशिक्षण संगठन काम कर रहे हैं। एक लिखित उत्तर के हिस्से के रूप में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल 24 जुलाई तक 407 ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस जारी किए गए हैं।
नौ साल में पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर खर्च किए गए 3.37 लाख करोड़
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा को बताया कि सरकार ने पिछले नौ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में विकास कार्यों पर 3.37 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वर्तमान में यहां केंद्र सरकार के सभी विभागों में 15,760 करोड़ रुपये की 1,350 परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। पिछले नौ वर्षों में पूर्वोत्तर में सड़क नेटवर्क 8,480 से लगभग बढ़ाकर 16,000 किमी तक विस्तारित किया गया है। पिछले नौ वर्षों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है और रेल कनेक्टिविटी में सुधार किया जा रहा है।
आईएएस के 1,365 व आईपीएस के 703 पद खाली
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को बताया गया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में 1,365 और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में 703 पद खाली हैं। केंद्रीय मंत्री ने एक लिखित उत्तर में कहा कि इनके अलावा, भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में 1,042 और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में 301 रिक्तियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा, रिक्तियों का होना और उन्हें भरना एक सतत प्रक्रिया है। केंद्र सरकार का प्रयास है कि रिक्त पदों को तेजी से भरा जाए।