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Parliament: राज्यसभा में भाजपा सांसद ने TMC पर साधा निशाना; लोकसभा में द्रमुक सदस्य ने उठाया परिसीमन का मुद्दा

Wed, 12 Mar 2025 03:57 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 12 Mar 2025 03:57 PM IST
सार

Parliament: राज्यसभा में रेल मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा। द्रमुक सांसद डी.ए.काथिर ने परिसीमन की प्रक्रिया पर चर्चा की। वहीं, लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाया। 

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Parliament Lok Sabha Rajya Sabha updates bjp tmc dmk congress discussion on delimitation exercise railways
लोकसभा - फोटो : एक्स/संसद टीवी

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को राज्यसभा में दिल्ली विधानसभा चुनावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के चुनाव में हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई। पश्चिम बंगाल से सांसद भट्टाचार्य ने इस दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर भी निशाना साधा। 

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रेल मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरुआत करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल में रेलवे की कई परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं, जिसकी मुख्य वजह जमीन अधिग्रहण में अड़चनें हैं। भाजपा सांसद ने कहा, पश्चिम बंगाल में 43 रेलवे परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण के कारण रुकी पड़ी हैं। सरकार को जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को हल करना चाहिए। इस दौरान टीएमसी के सांसदों ने विरोध किया, लेकिन भट्टाचार्य ने अपनी बात जारी रखी। भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा का भी जिक्र किया, जिसके बाद टीएमसी के सांसद और अधिक भड़क गए। 
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उन्होंने कहा, कोलकाता जैसे शहरी इलाकों में रेलवे की संपत्तियों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन चुकी है। भाजपा सांसद ने इसके बाद दिल्ली चुनाव की सराहना करते हुए कहा कि दिल्ली चुनावों के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई, न ही किसी की जान गई, न गोलियां चलीं, न ही किसी के घर को जेसीबी से तोड़ा गया। टीएमसी सांसदों के विरोध के बीच भट्टाचार्य ने आगे यह भी कहा, पश्चिम बंगाल में राहुल गांधी के काफिले पर पत्थरबाजी की गई थी और उन्होंने एक गेस्ट हाउस भी नहीं मिल सका था।  
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तमिलनाडु जैसे प्रगतिशील राज्यों को नुकसान पहुंचाएंगी परिसीमन प्रक्रिया: द्रमुक सांसद
वहीं, लोकसभा में शून्यकाल के दौरान द्रमुक सांसद डी.एम. काथिर आनंद ने परिसीमन को लेकर कहा कि यह प्रक्रिया तमिलनाडु जैसे प्रगतिशील राज्यों को नुकसान पहुंचाएं, जिन्होंने अपनी जनसंख्या को काबू में किया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सभी राज्यों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए और केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन न किया जाए। 

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आनंद ने कहा, परिसीमन प्रक्रिया के दौरान सरकार को जनसंख्या के अलावा सकल घरेलू राज्य उत्पाद (जीएसडीपी), प्रति व्यक्ति आय और बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की आबादी पिछले कुछ वर्षो में अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम रही है और राज्य ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। इस कारण राज्य की लोकसभा सीटों की संख्या घटने की संभावना है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आश्वासन नहीं दिया है। 

भाजपा सांसद ने उठाया निशिकांत दुबे ने उठाया बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा
वहीं, भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने पश्चिम बंगाल के सीमा क्षेत्रों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रवेश का मुद्दा उठाया। दुबे ने कहा कि परिसीमन के दौरान इन घुसपैठियों को बाहर रखा जाना चाहिए। उन्होंने झारखंड में आदिवासियों की आबादा में 1951 के मुकाबले 2011 की जनगणना में कमी आने का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों की आबादी में भारी वृद्धि हुई है। दुबे ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठिये आदिवासी लड़कियों से जबरन विवाह कर रहे हैं और उनका धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर रखा जाए। 

ड्रग की समस्या पर एक सुर में बोले भाजपा-कांग्रेस सांसद
वहीं, लोकसभा में कांग्रेस और भाजपा के सांसदों ने एक सुर में देश में बढ़ते ड्रग के खतरे पर चिंता जताई और इस संकट से निपटने के लिए तत्काल और एकीकृत कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हर दिन हम ड्रग से जुड़े अपराधों की खबरें सुनते हैं। माता-पिता सहमे हुए हैं, शिक्षक भयभीत हैं और समाज भी डरा हुआ है। हम जो देख रहे हैं, वह महज आंकड़े नहीं हैं बल्कि समाज की लाचारी और हमारे घरों का खामोश क्षरण है। पिछले दो महीनों में ही केरल में 63 हत्याएं नशीली दवाओं के सेवन से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने कहा कि बेटे मां को मार रहे हैं, भाई बहनों को मार रहे हैं। पिछले चार सालों में केरल में ड्रग से जुड़े 87,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 93,599 गिरफ्तारी हुई हैं। 

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं से संबंधित मामलों में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने फिल्मों में हिंसा के महिमामंडन को हतोत्साहित करने की मांग की क्योंकि उनका मानना है कि इससे युवा मस्तिष्क प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शिक्षकों, सामुदायिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि वे मिलकर व्यापक और तत्काल कार्रवाई करें। हम अपने बच्चों को इस त्रासदी का सामना करने के लिए नहीं छोड़ सकते। निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में, राजनीतिक सीमाओं से परे, हमें इस चिंता को गंभीरता से संबोधित करना चाहिए।

कांग्रेस सांसद की चिंताओं का समर्थन करते हुए भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने ड्रग के खतरे को खत्म करने के लिए एकजुट प्रयास की अपील की। उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल ने जो मुद्दा उठाया है, वह बहुत गंभीर है। नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ केंद्र या राज्य सरकारों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज, शिक्षकों और सभी हितधारकों की भी जिम्मेदारी है। हमें नशे को जड़ से खत्म करने और अपने युवाओं को बचाने के लिए एकजुट होना होगा, ताकि भारत का सुरक्षित और सशक्त भविष्य सुनिश्चित हो सके।

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नई दिल्ली स्टेशन भगदड़ : 33 प्रभावित परिवारों को 2.01 करोड़ दिए : सरकार
सरकार ने लोकसभा को बताया कि 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में मारे गए या घायल हुए 33 परिवारों को कुल 2.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, भगदड़ मामले में प्रत्येक मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2.50 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई है। हालांकि, संसद में अपने जवाब में वैष्णव ने मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई, लेकिन घटना के बाद अधिकारियों ने 18 लोगों की मौत और 15 के घायल होने की पुष्टि की थी। वैष्णव ने कहा कि घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

कानून बनने के बाद से तीन तलाक के मामलों पर कोई डाटा नहीं रखा गया : केंद्र
केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि देश में तीन तलाक कानून पारित होने के बाद से दर्ज मामलों की संख्या पर कोई केंद्रीय डाटा नहीं रखा गया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को तीन तलाक कानून पारित होने के बाद से दर्ज मामलों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर कहा, इस तरह का कोई आंकड़ा केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। राज्य सरकारें मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 सहित कानूनों के मौजूदा प्रावधानों के तहत अपराधों से निपटने में सक्षम हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा तीन तलाक कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद यह कानून 19 सितंबर, 2018 से प्रभावी हो गया था। इस कानून में इस प्रथा के तहत तलाक देने वाले पति को तीन साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

कारगिल को रेल संपर्क अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपये : अश्विनी वैष्णव
सरकार ने कहा कि नई बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन की अनुमानित लागत 1.31 लाख करोड़ रुपये है। यह लाइन कारगिल को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बिलासपुर-मनाली-लेह नई लाइन परियोजना (489 किमी) का सर्वेक्षण पूरा हो गया है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। पिछली श्रीनगर-कारगिल-लेह (480 किलोमीटर) रेल परियोजना के बारे में वैष्णव ने कहा कि इसके लिए सर्वेक्षण 2016-17 में किया गया था और परियोजना की अनुमानित लागत 55,896 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा, हालांकि, कम यातायात अनुमानों के कारण परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।

पिछले 13 महीनों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 2,601 बांग्लादेशी पकड़े गए : गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने राज्यसभा को बताया कि पिछले 13 महीनों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर भारतीय क्षेत्र में घुसने का प्रयास करते हुए कुल 2,601 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री (एमओएस) नित्यानंद राय ने बुधवार को जानकारी साझा करते हुए कहा कि इन 2,601 बांग्लादेशियों को 1 जनवरी, 2024 और 31 जनवरी, 2025 के बीच पकड़ा गया। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में 176 , जबकि 2024 में 2,425 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा गया था। नित्यानंद राय ने 2024 के आंकड़े महीने के अनुसार साझा किए, जिसके अनुसार 2024 के दिसंबर में 253, नवंबर में 310, अक्तूबर में 331, सितंबर में 300, अगस्त में 214, जुलाई में 267, जून में 247, मई में 32 अप्रैल में 91, मार्च में 118, फरवरी में 124 और जनवरी में 138 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं थीं।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5,400 से अधिक शिक्षण पद रिक्त हैं, इनमें से आधे आरक्षित : केंद्र
 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5,400 से अधिक शिक्षण पद रिक्त हैं, जिनमें से आधे से अधिक ओबीसी, एसटी और एससी श्रेणियों के लिए आरक्षित हैं। बुधवार को केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा को बताया कि विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से इन विश्वविद्यालयों में 7,825 से अधिक शिक्षण पद भरे गए हैं। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी, 2025 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुल 5,410 शिक्षण पद रिक्त थे, जिनमें एससी के लिए 788, एसटी के लिए 472 और ओबीसी के लिए 1,521 पद शामिल हैं। मजूमदार ने कहा, रिक्तियों का होना और उन्हें भरना एक सतत प्रक्रिया है। ये रिक्तियां सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र और छात्रों की बढ़ी हुई संख्या के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं के कारण उत्पन्न होती हैं और इन पदों को भरने की जिम्मेदारी केंद्रीय विश्वविद्यालयों (सीयू) पर है।

प्रतियोगी परीक्षाओं को ईमानदारी और पारदर्शिता से कराने को सरकार प्रतिबद्ध : मजूमदार
केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में कहा कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं को ईमानदारी और पारदर्शिता से कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार ने नए कानून में कई प्रावधान किए है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

कई सवालों के जवाब में शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कोई गड़बड़ी न हो। इसे रोकने और व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितता के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कोई प्रणालीगत नाकामी नहीं थी। इस मामले में सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है। पेपर लीक के मामले में 45 लोगों के खिलाफ पांच आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक नया कानून सार्वजनिक परीक्षा ( अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 पारित किया गया है। इसके अलावा राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू किया है। केंद्र सरकार प्रतिबद्ध हैं कि परीक्षा साफ सुथरी और पारदर्शी तरीके से हो। नरेंद्र मोदी की सदारत में चल रही सरकार में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।

लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की कांग्रेस सांसद ने की मांग
कांग्रेस सांसद गोवाल कागडा पडवी ने लोकसभा में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की। संविधान के अनुच्छेद 244(2) और 275(1) छठी अनुसूची से संबंधित हैं और इनमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सितंबर 2019 में सुझाव दिया था कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए। कई समूहों ने भी इसकी मांग की है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने स्थायी समिति को जवाब दिया है कि इसे शामिल नहीं किया जाना चाहिए लेकिन डर है कि व्यवसाय और समूह लद्दाख की संस्कृति और परंपरा पर कब्जा कर लेंगे और निश्चित रूप से लद्दाख में छठी अनुसूची लागू करने की आवश्यकता है।
 

  नई सहकारिता मसौदा नीति तैयार, दिया जा रहा अंतिम रूप : शाह
 केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति की सोच के पीछे ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र है। उन्होंने कहा कि लंबी कवायद के बाद मसौदा नीति तैयार की जा चुकी है और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

शाह ने उच्च सदन में सहकारिता से जुड़े सवालों के लिखित जवाब में कहा कि सहकारिता नीति के लिए मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन 2 सितंबर 2022 को किया था। इसका नेतृत्व सुरेश प्रभाकर प्रभु कर रहे हैं। इसमें उनके साथ सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ, राष्ट्रीय, राज्य, जिला, प्राथमिक स्तर की सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, सचिव (सहकारी) और राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के रजिस्ट्रार और केंद्रीय मंत्रालयों के विभागों के अधिकारी शामिल हैं। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को अनलॉक करने के लिए नई सहकारिता नीति का निर्माण करना है। समिति ने हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए 17 बैठकें कीं। इसमें पूरे देश में चार क्षेत्रीय कार्यशालाएं की गईं। प्राप्त सुझावों को मसौदा नीति में शामिल किया गया है।

2,516 करोड़ से पैक्स का कंप्यूटरीकरण
एक अन्य सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि सरकार कार्यात्मक पैक्स के कंप्यूटरीकरण के लिए 2,516 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ परियोजना को कार्यान्वित कर रही है। इसमें सभी कार्यात्मक पैक्स को ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित सामान्य राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाना, उन्हें राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से नाबार्ड से जोड़ना शामिल है। परियोजना के तहत 30 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की कुल 67,930 पैक्स को मंजूरी प्रदान की गई है। इनमें से 27 जनवरी तक 50,455 पैक्स को ईआरपी सॉफ्टवेयर पर ऑन-बोर्ड किया जा चुका है।


महाराष्ट्र की 15 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को चुना गया
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में 12 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को कंप्यूटरीकरण के लिए चुना गया था। इसमें से 10,979 पैक्स के डिजिटलीकरण हो चुका है। राजस्थान में 6,781 पैक्स चुने गए थे, जिनमें से 4206 का डिजिटलीकरण हो चुका है। गुजरात में 5,754 पैक्स को चुना गया था, इसमें से 5249 का डिजिटलीकरण का काम हो गया है। उत्तर प्रदेश में 5,686 पैक्स चुने गए थे, जिनमें से 2,978 का डाटा डिजिटलीकरण का काम हो गया है। कर्नाटक में 5,491 में से 2,077 का डिजिटल किया जा चुका है। इस तरह से मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और पंजाब समेत देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में 67,930 हजार पैक्स को चुना गया है। इसमें से 50,455 के डिजिटलीकरण का काम हो गया है।
 

2 हजार से अधिक बच्चे गोद लेने की प्रतीक्षा में पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 309 : सरकार
सरकार ने बताया कि 2,000 से अधिक बच्चे गोद लिए जाने की प्रतीक्षा में हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल शीर्ष पर है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बुधवार को राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि संभावित दत्तक माता-पिता (पीएपी) में से अधिकांश केयरिंग पोर्टल के माध्यम से छोटे बच्चों (6 वर्ष से कम आयु के) को गोद लेना पसंद करते हैं। उन्होंने बताया, यदि गोद लेने वाले पूल में ऐसे बच्चों की संख्या कम है, तो पीएपी के लिए प्रतीक्षा अवधि अधिक हो सकती है। उन्होंने कुछ आंकड़ा भी साझा किए, जिसके अनुसार देश भर में 2,321 बच्चे गोद लिए जाने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे बच्चों की सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल में 309 है, इसके बाद महाराष्ट्र में 261, ओडिशा में 225, बिहार में 205 और तेलंगाना में 197 बच्चे हैं।

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