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संसद बजट सत्र: राज्यसभा के सभापति धनखड़ बोले- विपक्ष का हंगामा दुर्भाग्यपूर्ण, जनता के पैसे की हो रही बर्बादी

Sat, 04 Feb 2023 06:08 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 04 Feb 2023 06:08 AM IST
सार

विपक्षी सांसदों का हंगामा न थमने पर आहत सभापति धनखड़ ने कहा कि वह करोड़ों देशवासियों के दुख और नाराजगी को प्रकट कर रहे हैं। सदन में शिष्टाचार का अभाव दिख रहा है, जिसकी वह सांसदों से अपेक्षा करते हैं।

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Parliament Budget Session: Jagdeep Dhankhar said Opposition uproar unfortunate, public money being wasted
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़। - फोटो : PTI

विस्तार

अदाणी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर विपक्षी सांसदों के बार-बार हंगामे पर शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने नाराजगी जताई। उन्होंने सांसदों को संसदीय परंपरा के अनुरूप व्यवहार की नसीहत देते हुए कहा, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जनता के पैसे की बर्बादी हो रही है और जनकल्याण के मुद्दे उठाने के बजाय सदस्य हंगामा कर रहे हैं।

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सभापति की बात का विपक्षी सांसदों पर कोई असर नहीं हुआ और हंगामा लगातार जारी रहा। विपक्षी सांसदों का हंगामा न थमने पर आहत सभापति धनखड़ ने कहा कि वह करोड़ों देशवासियों के दुख और नाराजगी को प्रकट कर रहे हैं। सदन में शिष्टाचार का अभाव दिख रहा है, जिसकी वह सांसदों से अपेक्षा करते हैं। वह चर्चा करें और संसदीय परंपराओं का पालन करें।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस, वाम दल, एआईएडीएमके, शिवसेना समेत राजनीतिक दलों के सांसदों से 15 नोटिस तहत मिले हैं। सबसे अधिक छह नोटिस कांग्रेस सांसदों की ओर से मिले हैं। द्रमुक के त्रिची शिवा का भी एक पत्र मिला, जिसमें उन्होंने उनसे नियम-267 के तहत दिए जाने वाले नोटिस के बाबत सही रूपरेखा को लेकर मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने कहा कि वह इस पर गौर करते हुए सभी सदस्यों को भोजनकाल में उनके पसंदीदा भोजन के साथ नियम-267 को लेकर जानकारी देने का आमंत्रण दे रहे हैं। इसके बावजूद विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए।
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अदाणी मामले पर सरकार को छोड़कर सब चिंतित : विपक्ष
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि अदाणी के घटनाक्रम से लोग चिंतित हैं, लेकिन सरकार नहीं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हमने सदी के सबसे बड़े घोटाले के खिलाफ नियम 267 के तहत नोटिस दिया था। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सरकार किसी भी उस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती है जो उसे लगता है कि इससे उसकी किरकिरी हो सकती है। सरकार ने पिछले सत्र में चीन के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने दी और अब वह अदाणी मसले पर भी यही कर रही है।

बार-बार कार्यवाही रोकी,वे नहीं चाहते संसद चले : केंद्र
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विपक्ष बार-बार संसद की कार्यवाही ठप कर रहा है और वह नहीं चाहता है कि सदन चले। मेघवाल ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री ने एक दिन पहले भी कहा था कि हम सभी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करनी चाहिए। विपक्षी सांसद चर्चा के दौरान कुछ भी बोल सकते हैं, लेकिन लगता है कि वे सदन की कार्यवाही ही नहीं चलने देना चाहते हैं। हम विपक्ष से आग्रह करते हैं कि वे सदन को चलने दें।

वित्त मंत्री का भाजपा सांसदों को मंत्र... लोगों को सरल भाषा में समझाएं बजट की खूबियां
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भाजपा सांसदों को सरल भाषा में बजट की बारीकियां समझाई। उन्होंने उन्हें सांसदों से भी अपने मतदाताओं को इसी तरह सरल भाषा में बजट की खूबियां बताने को कहा। बैठक में मौजूद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भी सांसदों को बजट से जुड़े तकनीकी शब्दों को समझाया।

संसद के बालयोगी सभागार में बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने सांसदों को विभिन्न वर्गों के अलग-अलग समूह से संवाद करने की सलाह दी। साथ ही संवाद से पहले बजट में उनके लिए की गई घोषणाओं का होमवर्क करें। वित्त मंत्री ने कहा, बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए उनकी चिंता की गई है। एक तरफ जहां अर्थव्यवस्था के समक्ष बढ़ती चुनौतियों के कारण कई देश राहत देने से परहेज बरत रहे हैं, उसी समय यहां मध्य वर्ग को आय कर मामले में अब तक की सबसे बड़ी राहत दी गई है। बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक निवेश के जरिये रोजगार के अवसर बढ़ाने की चिंता की गई है। वंचितों, महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अब यह आपकी जिम्मेदारी है कि इन वर्गों को बजट के जरिए दी गई राहत की जानकारी दें।


जिस भाषा में समझा, उसी में समझाएं
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सांसदों ने जिस आसान भाषा और तरीके से बजट को यहां समझा है, उन्हें उसी तरह आसान भाषा में लोगों को भी समझाना होगा। लोगों को यह बताना होगा कि केंद्र की मोदी की सरकार वाकई न सिर्फ उनकी चिंता करती है, बल्कि उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बीते करीब नौ सालों से गंभीर प्रयास कर रही है।

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