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बच्चे से बना रहे हैं दूरी तो कर रहे हैं बड़ी गलती, मां-बाप को भी उठाना पड़ेगा खामियाजा

Wed, 29 May 2019 09:17 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Wed, 29 May 2019 09:17 PM IST
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parents are keeping their kids away from them which is wrong
सांकेतिक तस्वीर

आजकल हर घर की यही कहानी है, मां-बाप अपने काम में व्यस्त होते हैं और अगर कोई दूसरा काम नहीं है तो मोबाइल और सोशल मीडिया है ही। इन दोनों ही स्थितियों में बच्चा आपको तंग करे तो गुस्सा आना लाजिमी है। बहुत से अभिभावक यह सोचकर कि बच्चा तंग न करे, वे उसे कार्टून देखने के लिए टीवी के आगे बैठा देते हैं। नतीजा, बच्चे के बचपन, मस्तिष्क विकास, शिक्षा और खेल से जुड़ी कई बातें पीछे छूट जाती हैं। बच्चे के साथ न खेलना या उससे दूरी बनाने की आदत, एक समय सीमा के बाद इसका खामियाजा मां-बाप और बच्चे, दोनों को उठाना पड़ता है। 

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बुधवार को दिल्ली में लेगो फाउंडेशन और सेसमी वर्कशॉप इंडिया द्वारा प्ले कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सेसमी वर्कशॉप इंडिया की प्रबंध निदेशक, सोनाली खान ने बताया कि अभिभावक अपने में व्यस्त रहते हैं। बाद में उन्हें यह महसूस होता है कि बहुत कुछ पीछे छूट गया है। यह सोचकर कि हम अपने बच्चे को महंगे खिलौने कहां से लाकर देंगे या बच्चा हमें तंग न करे, उसे टीवी के आगे बैठा देते हैं। वो भी खुश और आपका भी काम चल गया। 
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ये गलत है, कुछ समय बाद इसका खामियाजा न केवल बच्चों को, अपितु अभिभावकों को भी उठाना पड़ता है। माता-पिता एवं बच्चों के बीच खेल-कूद की गतिविधियां किस प्रकार जारी रहें, प्ले कॉन्फ्रेंस का मकसद यही है। मां-बाप अपने 3 से 8 साल की उम्र के बच्चों के साथ खेलकर उनमें रचनात्मकता, शिक्षा एवं विकास को प्रोत्साहन दे सकते हैं।

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समय की बर्बादी नहीं है खेलकूद

सेसमी वर्कशॉप ने भारत, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको में कमजोर समुदायों की मदद के लिए 'प्ले एवरीडे' नामक एक कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें बताया जाता है कि खेल-कूद समय की बर्बादी नहीं है। यह धारणा भी पूरी तरह गलत है कि बच्चों में रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए महंगे खिलौने आवश्यक हैं। भारत में लेगो फाउंडेशन के सहयोग से इस कार्यक्रम को दिल्ली के 9 समुदायों में शुरू किया गया है। विभिन्न समुदायों के 25 सौ परिवारों से बातचीत की गई।

फाइनल रिपोर्ट में पता चला कि बच्चों में 30 फीसदी तक रचनात्मकता बढ़ गई है। माता-पिता एवं देखभाल करने वालों की धारणाओं में बदलाव आ गया। डिएगो एडेम, इनिशिएटिव लीड, लर्निंग थ्रू प्ले इन अर्ली चाइल्डहुड, लेगो फाउंडेशन ने कहा कि हमारा संगठन एक ऐसे भविष्य के निर्माण की दिशा में प्रयासरत है, जिसमें खेल-कूद के माध्यम से बच्चों में सीखने की कला विकसित की जाती है। इससे बच्चों में रचनात्मकता और काम में संलग्नता का भाव पैदा होता है। इस मौके पर उन्होंने द पावर ऑफ प्ले पुस्तिका का विमोचन किया।

ऐसे मिले हैं सर्वे के नतीजे

कार्यक्रम के हिस्से के रूप में बच्चों का मूल्यांकन किया गया। उनकी रचनात्मकता में लगभग 33 फीसदी का बदलाव दिखाई दिया। बच्चों ने प्लास्टिक की बोतल, डिब्बे और कार्डबोर्ड सहित दूसरी पुरानी वस्तुओं का उपयोग करते हुए किसी नई वस्तु का निर्माण किया।

  • पहले की अपेक्षा 14 फीसदी अधिक माता-पिता खेल-कूद को बच्चों के विकास के साथ जोड़ने में सक्षम हुए
  • पहले की अपेक्षा 24 फीसदी अधिक माता-पिता खेल-कूद को बच्चों के लिए शैक्षणिक फायदे के साथ जोड़ने में सक्षम हुए
  • प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे, और कार्डबोर्ड रोल जैसी पुरानी  वस्तुओं का खेल-कूद की सामग्रियों के तौर पर उपयोग करने से उनके आत्मविश्वास में 24 फीसदी की वृद्धि हुई
  • देखभालकर्ताओं ने बताया कि इसके महत्व से अवगत होने के बाद वे अब निश्चित तौर पर अपने बच्चों के साथ खेल-कूद के लिए समय निकालेंगे।यह बात हमारे लिए बेहद उत्साहजनक है।
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