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संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश: सोशल मीडिया मंचों को प्रकाशक मानें, मीडिया नियामक के गठन का भी प्रस्ताव

Thu, 16 Dec 2021 06:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 16 Dec 2021 06:05 PM IST
सार

रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों में डाटा संरक्षण विधेयक का दायर बढ़ाकर उसमें गैर निजी डेटा को भी शामिल करने, सोशल मीडिया मंचों के नियम और सख्त करने, एक वैधानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण का प्रस्ताव शामिल है।

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Par panel moots greater accountability for social media platforms, non-personal data regulation
व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम - फोटो : iStock

विस्तार

भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2019 पर संयुक्त समिति ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों में अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति ने सोशल मीडिया मंचों को प्रकाशक मानते हुए उन्हें और अधिक जवाबदेह बनाने की सिफारिश की है। समिति ने प्रस्तावित डाटा संरक्षण कानून के दायरे को व्यापक बनाने का भी प्रस्ताव किया। इसमें व्यक्तिगत और गैर-व्यक्तिगत दोनों तरह के डेटा को शामिल करने का भी सुझाव है।

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रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों में डाटा संरक्षण विधेयक का दायर बढ़ाकर उसमें गैर निजी डेटा को भी शामिल करने, सोशल मीडिया मंचों के नियम और सख्त करने, एक वैधानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण का प्रस्ताव शामिल है।
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हार्डवेयर निर्माताओं के नियमन के लिए बने ढांचा
समिति ने हार्डवेयर निर्माताओं को नियंत्रित करने के लिए एक ढांचा तैयार करने का भी समर्थन किया है, जो सॉफ्टवेयर के साथ डेटा भी एकत्र करते हैं। रिपोर्ट में सभी डिजिटल और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों के प्रमाणन के लिए एक तंत्र बनाने की भी सिफारिश की है। समिति ने सिफारिश की है कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रकाशक के रूप में माना जाना चाहिए।
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उनके द्वारा जारी की जाने वाली सामग्री के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

प्रेस काउंसिल की तर्ज पर बने वैधानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण
समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि भारतीय प्रेस परिषद की तर्ज पर एक वैधानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण बनाना चाहिए। यह सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सामग्री का नियमन कर सकता है। इसके दायरे में वह सारी सामग्री आ सकती है जो आनलाइन, प्रिंट या अन्य तरीकों से प्रकाशित की गई हो। 


भारत में बगैर कार्यालय खोले न दें संचालन की अनुमति
समिति ने सुझाव दिया है कि किसी भी ऐसी सोशल मीडिया कंपनी को भारत में तब तक संचालन की अनुमति नहीं दी जाना चाहिए, जब तक कि उसकी पैरेंट कंपनी भारत में अपना कार्यालय नहीं खोलती है।

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