ऑपरेशन राणा: पाकिस्तानी आतंकी गुट थे बड़ी चुनौती; खुद को नुकसान न पहुंचा ले तहव्वुर इसलिए NIA ने किया यह काम
मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पण के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 18 दिन की एनआईए रिमांड में भेज दिया गया है। अब उससे लंबी पूछताछ होनी है। वहीं प्रत्यर्पण के बाद भारत लाते समय एनआईए ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए थे। साथ ही इस बात का भी खास ख्याल रखा कि तहव्वुर राणा खुद को भी कोई नुकसान न पहुंचा सके।
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26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा भारत आ चुका है और फिलहाल एनआईए की 18 दिन की हिरासत में है। हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण को बेहद गोपनीय बनाए रखा।एनआईए के सामने ऑपरेशन राणा की भनक पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों को न लगने देना सबसे बड़ी चुनौती थी। इस ऑपरेशन की सफलता के लिए भारत और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट ने विशेष विमान पर रियल टाइम निगरानी रखी ताकि किसी भी मूवमेंट का आसानी से पता लगाया जा सके।
एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों और एनएसजी कमांडो की एक विशेष टीम लॉस एंजिलिस से एक विशेष विमान से राणा को लेकर रवाना हुई थी। राणा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और खुद को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाने के लिए एनआईए के एक अधिकारी ने पूरी यात्रा के दौरान उसका हाथ पकड़े रखा। सूत्रों के अनुसार, विमान अपने अंतिम चरण से पहले ईंधन भरने के लिए रुका था। इसके बाद बृहस्पतिवार शाम को यह दिल्ली में उतरा। ऑपरेशन राणा को महत्वपूर्ण खुफिया और कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। यह व्यापक समन्वय और उच्चस्तरीय सुरक्षा क्रियान्वयन का उदाहरण कहा जा रहा है।
सभी सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल जमा कराए गए
दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए थे। राणा के पालम एयरपोर्ट उतरने से पहले सभी कर्मचारियों व सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए थे ताकि कोई भी सूचना बाहर न जा सके।
मीडिया से बचने को जेल वैन में ले जाया गया
मीडिया से बचने के लिए राणा को दूसरे गेट से एयरपोर्ट से बाहर लाया गया। उसे एक अपारदर्शी जेल वैन में ले जाया गया। बाद में उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां कैमरों और मोबाइल फोन पर सख्त रोक लगाई गई थी।
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गौरतलब है कि साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस हमले में कई पुलिसकर्मी शहीद हुए थे, जिसमें मुंबई पुलिस के तीन बड़े अधिकारी भी शामिल थे। पाकिस्तान से आए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने इस भीषण हमले को अंजाम दिया था। इनमें से एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा भी पकड़ा गया था, जिसे साल 2012 में फांसी दे दी गई।
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