इटली में IS जैसे हमले की साजिश रच रहा था क्रिकेट टीम का पाकिस्तानी कप्तान
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पाकिस्तानी मूल के एक युवक को इटली में इस्लामिक स्टेट जैसी वारदात की साजिश रचने के आरोप में देश से निष्कासित कर दिया गया है। बताया जाता है कि युवक इटली की एक क्रिकेट टीम का कप्तान भी था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आफताब फारुक नाम का युवक टेलीफोनिक बातचीत के बाद पकड़ में आया जिसमें वह क्लाशनिकोव रायफल और बम के द्वारा मिलान में एक शराब की दुकान और बेरगामो एयरपोर्ट पर हमले की साजिश रच रहा था। इतालवी समाचारपत्रों के अनुसार युवक यह वारदात गौरे लोगों को डराने के लिए करना चाहता था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को इटली सरकार के मंत्री एंजीलिनो अल्फानो ने बताया कि 26 साल का आईएस समर्थक फारुक सीरिया जाकर आतंकवादियों में शामिल होने की फिराक में था।
इटली की अंडर 19 टीम का कप्तान था आरोपी युवक
मंगलवार को जैसे यह खबर मिलान के निकटवर्ती शहर वैप्रियो डी अड्डा में पहुंची लोग यह जानकर दंग रह गए कि उनके निकट में रहने वाला फारुक इस साजिश में शामिल था। उसका परिवार तब से यहां रह रहा था जब वह 13 साल का था।
इस साजिश का खुलासा होने के बाद मीडिया में साल 2009 की वो फोटो भी सामने आई जिनमें फारुक इटली की अंडर 19 क्रिकेट टीम के कप्तान के तौर पर इटेलियन ड्रेस में दिख रहा है।
फारुक से नजदीकी रिश्ता रखने वाले इटली के किंग्सग्रोव मिलानो क्रिकेट क्लब के अध्यक्ष फैबियो माराबिनी ने बताया कि "हमारे लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं थी जिससे हम अभी तक नहीं उबर पाए हैं। मैंने उसके इस्लामाबाद जाने से कुछ दिन पहले ही उससे बात की थी।"
"उसने मुझे हर चीज के लिए धन्यवाद दिया। उसने मुझे बताया था कि वह कुछ डरा हुआ है क्योंकि पाकिस्तान में अब उसका किसी से नजदीकी संबंध नहीं है।"
फैसले को कोर्ट में चुनौती देगा आरोपी का परिवार
इटली के ला स्टैंपा अखबार ने बताया कि फारुख यहां खेल के सामानों के वितरक के तौर पर काम करता था। खाली समय में वह विकलांग लोगों के लिए चलने वाली बस के ड्राइवर के तौर पर भी मदद करता था।
वहीं मारबिनी ने बताया कि उसने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया वह अच्छा इंसान है। उसे इटली की नेशनल क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया था क्योंकि वह एक विश्वासपात्र और काबिल इंसान था जो हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहता था।
वहीं अखबार ने बताया कि पुलिस के अनुसार फारुक पिछले कुछ समय से बदल गया था। वह लगातार अपनी पत्नी को पीटता था और बुर्का पहनने के लिए मजबूर करता था। इसलिए पुलिस की उस पर लगातार नजर बनी हुई थी। मंगलवार को उसे इटली से निष्कासित कर दिया गया।
हालांकि उसका परिवार इस फैसले को मानवाधिकार पर बने यूरोपियन कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।