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India Pakistan Ceasefire: भारत के सामने कागजी साबित हुआ पाकिस्तान का वायु रक्षा तंत्र, फेल हो गए चीनी हथियार
Mon, 12 May 2025 05:01 AM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 12 May 2025 05:01 AM IST
सार
अमेरिका के विख्यात रक्षा विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने न केवल विभिन्न स्तरों पर एकीकृत ढंग से अपने वायु क्षेत्र की अभेद्य सुरक्षा की, बल्कि अपने विरोधी पाकिस्तान की ओर से तैनात की गई चीनी वायु रक्षा प्रणालियों को भी सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया।
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भारत-पाकिस्तान तनाव
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अमेरिका के विख्यात रक्षा विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु रक्षा की उभरती आधुनिक प्रकृति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत ने न केवल विभिन्न स्तरों पर एकीकृत ढंग से अपने वायु क्षेत्र की अभेद्य सुरक्षा की, बल्कि अपने विरोधी पाकिस्तान की ओर से तैनात की गई चीनी वायु रक्षा प्रणालियों को भी सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया। वास्तव में भारत के सामने विरोधी का वायु रक्षा तंत्र कागजी साबित हुआ।
मॉडर्न वार इंस्टीट्यूट में अर्बन वारफेयर स्ट्डीज के प्रमुख स्पेंसर ने रविवार को कहा कि इससे साबित होता है, आपकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर नहीं करती की आप किस से क्या खरीद लाए हैं, इसका सीधा संबंध इस तथ्य से है कि आप अपने रक्षा साधनों का उपयोग कितने एकीकृत ढंग से करते हैं। उन्होंने कहा, आज भारत का वायु रक्षा नेटवर्क आकाश और क्यूआरएसएएम जैसे स्वदेशी रूप से निर्मित प्लेटफार्मों का समायोजन है, जो इस्राइली बराक-8 प्रणालियों और रूस के एस-400 के साथ संयुक्त रूप से काम करता है।
ये भी पढ़ें: परमाणु हमले का खतरा मान खुद कूदा अमेरिका; पाकिस्तान ने लगाई थी गुहार, एयरबेस उड़ाए जाने के बाद झुका
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चीन निर्मित हथियार टिक नहीं पाए
उधर, सीमा पार पाकिस्तान ने खासकर चीन निर्मित प्रणाली जैसे एचक्यू-9/पी (एस-300 के समान एक लंबी दूरी की एसएएम), एलवाई-80 और एफएम-90 तैनात किया। ये प्रणालियां कागज पर भले ही एक बार सक्षम नजर आएं, लेकिन भारत के प्रभावी हमलों के सामने ये टिक नहीं पाई। भारत ने दिखा दिया कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, गतिज यानी काइनेटिक हमलों और सैद्धांतिक चपलता के संयुक्त उपयोग इसे ध्वस्त किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें: हमले से पहले नौ आतंकी ठिकानों की बारीकी से जांच, डीजीएमओ बोले- निर्माण सामग्री के भी जुटाए सबूत
यूक्रेन युद्ध से भी अहम सबक
रक्षा विशेषज्ञ ने कहा, वास्तव में यह सिर्फ हाल ही में भारत की सफलता की कहानी ही नहीं है, यूक्रेन युद्ध भी एक महत्वपूर्ण सबक देता है। यूक्रेन का 600,000 वर्ग किलोमीटर का खुला भूभाग और शहरी अवसंरचना, एक कठिन चुनौती है। इसलिए वायु रक्षा के लिए वह केवल केवल उच्च-स्तरीय, सीमित-मात्रा वाली प्रणालियों पर निर्भर नहीं रह सकता। उसे अपने हाथ में आने वाली हर चीज को एकीकृत करना होगा। यानी प्रभावी रक्षा तंत्र के लिए उसे पश्चिमी एसएएम, सोवियत युग की बुक और एस-300 इकाइयों, मोबाइल आईआरआईएस-टी बैटरियां, मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (एमएएनपीएडीएस) और सबसे महत्वपूर्ण, जर्मन निर्मित गेपार्ड्स जैसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन को भी अपनी रक्षा प्रणालियों में एकीकृत करना होगा।
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मॉडर्न वार इंस्टीट्यूट में अर्बन वारफेयर स्ट्डीज के प्रमुख स्पेंसर ने रविवार को कहा कि इससे साबित होता है, आपकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर नहीं करती की आप किस से क्या खरीद लाए हैं, इसका सीधा संबंध इस तथ्य से है कि आप अपने रक्षा साधनों का उपयोग कितने एकीकृत ढंग से करते हैं। उन्होंने कहा, आज भारत का वायु रक्षा नेटवर्क आकाश और क्यूआरएसएएम जैसे स्वदेशी रूप से निर्मित प्लेटफार्मों का समायोजन है, जो इस्राइली बराक-8 प्रणालियों और रूस के एस-400 के साथ संयुक्त रूप से काम करता है।
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चीन निर्मित हथियार टिक नहीं पाए
उधर, सीमा पार पाकिस्तान ने खासकर चीन निर्मित प्रणाली जैसे एचक्यू-9/पी (एस-300 के समान एक लंबी दूरी की एसएएम), एलवाई-80 और एफएम-90 तैनात किया। ये प्रणालियां कागज पर भले ही एक बार सक्षम नजर आएं, लेकिन भारत के प्रभावी हमलों के सामने ये टिक नहीं पाई। भारत ने दिखा दिया कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, गतिज यानी काइनेटिक हमलों और सैद्धांतिक चपलता के संयुक्त उपयोग इसे ध्वस्त किया जा सकता है।
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यूक्रेन युद्ध से भी अहम सबक
रक्षा विशेषज्ञ ने कहा, वास्तव में यह सिर्फ हाल ही में भारत की सफलता की कहानी ही नहीं है, यूक्रेन युद्ध भी एक महत्वपूर्ण सबक देता है। यूक्रेन का 600,000 वर्ग किलोमीटर का खुला भूभाग और शहरी अवसंरचना, एक कठिन चुनौती है। इसलिए वायु रक्षा के लिए वह केवल केवल उच्च-स्तरीय, सीमित-मात्रा वाली प्रणालियों पर निर्भर नहीं रह सकता। उसे अपने हाथ में आने वाली हर चीज को एकीकृत करना होगा। यानी प्रभावी रक्षा तंत्र के लिए उसे पश्चिमी एसएएम, सोवियत युग की बुक और एस-300 इकाइयों, मोबाइल आईआरआईएस-टी बैटरियां, मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (एमएएनपीएडीएस) और सबसे महत्वपूर्ण, जर्मन निर्मित गेपार्ड्स जैसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन को भी अपनी रक्षा प्रणालियों में एकीकृत करना होगा।
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