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कुलभूषण की मुलाकात के बहाने पाकिस्तान ने चला तुरुप का इक्का
शशिधर पाठक / नई दिल्ली
Updated Tue, 26 Dec 2017 04:17 AM IST
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पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने अपनी कूटनीति का नया मोहरा बना लिया है। जाधव की मां और उनकी पत्नी से मुलाकात कराके पाकिस्तान ने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय छवि प्रस्तुत करने की कूटनीति को आगे बढ़ा दिया है। इस मुलाकात के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल का बयान बेहद अहम है। फैसल ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मुलाकात की अनुमति इस्लामिक परंपरा के अनुसार मानवता के आधार पर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी और कूटनीति के जानकार इस भेंट का आशय निकालने में जुट गए हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से यह अनुमति मानवता के आधार पर ही मांगी थी। नवंबर ने पाकिस्तान ने कुलभूषण की पत्नी को मिलने की इजाजत दी थी, लेकिन विदेश मंत्रालय के अगले अनुरोध को स्वीकार करते हुए उसने जाधव की मां से भी मुलाकात कराने की अनुमति दे दी। लेकिन इस दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के किसी अधिकारी (काऊंसलर) को जाधव के पास फटकने, जाधव की आवाज सुनने की अनुमति नहीं मिल पाई।
पढ़ें- काफी उलझी हुई है जाधव की दास्तान, पाक की नजर में जासूस, भारत की निगाह में बिजनेसमैन
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भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी जेपी सिंह कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी को लेकर मुलाकात स्थल पर ले गए। उनकी निगरानी में मां और जाधव की पत्नी गई लेकिन जाधव के मौजूदगी वाले कमरे में शीशे की दीवार के इस पार केवल कुल भूषण की मां और पत्नी ही रही। भारतीय अफसर कुलभूषण की मां और पत्नी को एक दूसरे कमरे से शीशे की खिडक़ी या दीवार के जरिए कुलभूषण से मिलते हुए देखते रहे।
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से यह अनुमति मानवता के आधार पर ही मांगी थी। नवंबर ने पाकिस्तान ने कुलभूषण की पत्नी को मिलने की इजाजत दी थी, लेकिन विदेश मंत्रालय के अगले अनुरोध को स्वीकार करते हुए उसने जाधव की मां से भी मुलाकात कराने की अनुमति दे दी। लेकिन इस दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के किसी अधिकारी (काऊंसलर) को जाधव के पास फटकने, जाधव की आवाज सुनने की अनुमति नहीं मिल पाई।
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भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी जेपी सिंह कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी को लेकर मुलाकात स्थल पर ले गए। उनकी निगरानी में मां और जाधव की पत्नी गई लेकिन जाधव के मौजूदगी वाले कमरे में शीशे की दीवार के इस पार केवल कुल भूषण की मां और पत्नी ही रही। भारतीय अफसर कुलभूषण की मां और पत्नी को एक दूसरे कमरे से शीशे की खिडक़ी या दीवार के जरिए कुलभूषण से मिलते हुए देखते रहे।
कुलभूषण के चेहरे को भुनाने की ताक में पाकिस्तान
kulbhushan jadhav
पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी से मुलाकात में मानवीय चेहरा बनाये रखने में सफल रहा। उसने 40 मिनट की मुलाकात के समय को कुलभूषण की मां के अनुरोध पर 10 मिनट और बढ़ा दिया। यह संदेश देने में भी सफल रहा कि कुलभूषण जाधव के साथ ज्यादती नहीं हुई है। वह सुरक्षित और दुरुस्त स्थिति में हैं।
बाद में बयान भी जारी किया कि यह मुलाकात इस्लामिक परंपरा के अनुसार मानवीय आधार पर कराई गई है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल के बयान के अनुसार यह कोई अंतिम मुलाकात नहीं है। यानी आगे भी कुलभूषण जाधव से समय-समय पर उनके परिजन अनुरोध करके मिल सकते हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान ने भारत के चल रही रिश्तों की तल्खी में कूटनीतिक पहल की है। ऐसा समझा जा रहा है कि वह कुलभूषण जाधव के मसले को भुनाने की ताक में है।
भारत के हाथ अभी खाली हैं
कुलभूषण जाधव से मां और पत्नी को मिलाने के पीछे भारत की दो मंशा थी। पहला यह कि परिवार कुलभूषण का कुशल क्षेम देख ले। दूसरा भारत को भी कुलभूषण की मौजूदा स्थिति का पता चल जाए। दूसरे उद्देश्य में भारत ने सिर्फ शीशे के उसपार के कुलभूषण जाधव का चेहरा देखा है। इससे यह अनुमान लगाना कठिन है कि कुलभूषण किस स्थिति में हैं। बस वह नीले कोट में स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं।
अभी तक इसमें कोई सफलता नहीं मिल पाई कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को कहां, किस जेल में बंद रखा है। पाकिस्तान ने काऊंसलर की पहुंच भी नहीं होने दी है। जैसा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि काऊंसलर पहुंच न देने के बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय को पहले ही अवगत करा दिया गया था।
आरोप जस के तस
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल ने आरोप को दोहराते हुए कहा कि कुलभूषण जाधव फर्जी पहचान पत्र के साथ रंगे हाथ पकड़े गए। वह भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करते थे। कुलभूषण की सेहत दुरुस्त है। पैसल के अनुसार पाकिस्तान ने कुछ नहीं छिपाया। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने भारतीय मीडिया को भी आमंत्रित किया था। फैसल के अनुसार वहां मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के अधिकारी मौजूद थे, लेकिन भारतीय अधिकारी को जाधव से मिलने, उनकी आवाज सुनने और जाधव की मां तथा पत्नी के साथ जाने की इजाजत नहीं दी गई। फैसल के अनुसार पाकिस्तान ने पहले इन तथ्यों से भारत के विदेश मंत्रालय को अवगत करा दिया था।
बाद में बयान भी जारी किया कि यह मुलाकात इस्लामिक परंपरा के अनुसार मानवीय आधार पर कराई गई है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल के बयान के अनुसार यह कोई अंतिम मुलाकात नहीं है। यानी आगे भी कुलभूषण जाधव से समय-समय पर उनके परिजन अनुरोध करके मिल सकते हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान ने भारत के चल रही रिश्तों की तल्खी में कूटनीतिक पहल की है। ऐसा समझा जा रहा है कि वह कुलभूषण जाधव के मसले को भुनाने की ताक में है।
भारत के हाथ अभी खाली हैं
कुलभूषण जाधव से मां और पत्नी को मिलाने के पीछे भारत की दो मंशा थी। पहला यह कि परिवार कुलभूषण का कुशल क्षेम देख ले। दूसरा भारत को भी कुलभूषण की मौजूदा स्थिति का पता चल जाए। दूसरे उद्देश्य में भारत ने सिर्फ शीशे के उसपार के कुलभूषण जाधव का चेहरा देखा है। इससे यह अनुमान लगाना कठिन है कि कुलभूषण किस स्थिति में हैं। बस वह नीले कोट में स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं।
अभी तक इसमें कोई सफलता नहीं मिल पाई कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को कहां, किस जेल में बंद रखा है। पाकिस्तान ने काऊंसलर की पहुंच भी नहीं होने दी है। जैसा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि काऊंसलर पहुंच न देने के बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय को पहले ही अवगत करा दिया गया था।
आरोप जस के तस
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फैसल ने आरोप को दोहराते हुए कहा कि कुलभूषण जाधव फर्जी पहचान पत्र के साथ रंगे हाथ पकड़े गए। वह भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करते थे। कुलभूषण की सेहत दुरुस्त है। पैसल के अनुसार पाकिस्तान ने कुछ नहीं छिपाया। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने भारतीय मीडिया को भी आमंत्रित किया था। फैसल के अनुसार वहां मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के अधिकारी मौजूद थे, लेकिन भारतीय अधिकारी को जाधव से मिलने, उनकी आवाज सुनने और जाधव की मां तथा पत्नी के साथ जाने की इजाजत नहीं दी गई। फैसल के अनुसार पाकिस्तान ने पहले इन तथ्यों से भारत के विदेश मंत्रालय को अवगत करा दिया था।
भारत को क्या क्या मिला
कुलभूषण जाधव
-पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर का मानना है कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के परिजनों से उन्हें मिलवाकर अपनी मानवीय और उदार छवि बनाने की कोशिश की है। इसका दुनिया में संदेश जाएगा। इसका उसे सीधे तौर पर फायदा दिखाई दे रहा है।
-भारत को न तो कोई फायदा हुआ और न नुकसान। भारत काफी समय से अपने नागरिक कुलभूषण जाधव की रिहाई कराने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश आगे भी जारी रहेगी। लेकिन कुलभूषण जाधव को उनके परिजनों से मिलाने में सफल रहा। इससे कुलभूषण जाधव की रिहाई को लेकर आने वाले समय में पाकिस्तान पर दबाव बढ़ सकता है।
एक किरण भी
सलमान हैदर कहते हैं कि यदि हम आशावादी हों तो पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते में इस पहल को सुधार की किरण के रूप में देख सकते हैं। पाकिस्तान भारत के सामने रिश्तों को पटरी पर लाने का प्रस्ताव रख सकता है और भारत उस पर आगे बढ़ सकता है। संभव है कि दोनों देशों के बीच में इस तरह के प्रयास चल भी रहे हों। फिलहाल अभी तो यह मानवीय आधार पर दोनों देशों की तरफ से की गई बड़ी पहल के रूप में ही दिखाई दे रही है।
सलमान हैदर के उम्मीद की किरण के तर्क पर एक पूर्व राजनयिक भी मुहर लगा रहे हैं। सूत्र का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में पूरी तरह संवाद का रुकना भी ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर आतंकवाद और सीमापार की घुसपैठ को बिना पाकिस्तान के सहयोग के काबू में कर पाना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में संभव है कि भारत के कूटनीतिक पैरोकार इस दिशा में कुछ पहल कर रहे हों।
देर रात तक लौट आएंगी मां और पत्नी
सोमवार-मंगलवार की देर रात तक कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी भारत लौट आएंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह सायं छह बजे के करीब भारत आने के लिए रवाना हो चुकी हैं। इस्लामाबाद से सीधी उड़ान सेवा न होने के कारण दोनों के भारतीय अधिकारियों के साथ ओमान होते हुए आने की संभावना है। भारत आने के बाद उनसे कुलभूषण जाधव से हुई बातचीत का ब्यौरा मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान से लौटने के बाद दोनों की मुलाकात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत से होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
-भारत को न तो कोई फायदा हुआ और न नुकसान। भारत काफी समय से अपने नागरिक कुलभूषण जाधव की रिहाई कराने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश आगे भी जारी रहेगी। लेकिन कुलभूषण जाधव को उनके परिजनों से मिलाने में सफल रहा। इससे कुलभूषण जाधव की रिहाई को लेकर आने वाले समय में पाकिस्तान पर दबाव बढ़ सकता है।
एक किरण भी
सलमान हैदर कहते हैं कि यदि हम आशावादी हों तो पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्ते में इस पहल को सुधार की किरण के रूप में देख सकते हैं। पाकिस्तान भारत के सामने रिश्तों को पटरी पर लाने का प्रस्ताव रख सकता है और भारत उस पर आगे बढ़ सकता है। संभव है कि दोनों देशों के बीच में इस तरह के प्रयास चल भी रहे हों। फिलहाल अभी तो यह मानवीय आधार पर दोनों देशों की तरफ से की गई बड़ी पहल के रूप में ही दिखाई दे रही है।
सलमान हैदर के उम्मीद की किरण के तर्क पर एक पूर्व राजनयिक भी मुहर लगा रहे हैं। सूत्र का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच में पूरी तरह संवाद का रुकना भी ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर आतंकवाद और सीमापार की घुसपैठ को बिना पाकिस्तान के सहयोग के काबू में कर पाना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में संभव है कि भारत के कूटनीतिक पैरोकार इस दिशा में कुछ पहल कर रहे हों।
देर रात तक लौट आएंगी मां और पत्नी
सोमवार-मंगलवार की देर रात तक कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी भारत लौट आएंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह सायं छह बजे के करीब भारत आने के लिए रवाना हो चुकी हैं। इस्लामाबाद से सीधी उड़ान सेवा न होने के कारण दोनों के भारतीय अधिकारियों के साथ ओमान होते हुए आने की संभावना है। भारत आने के बाद उनसे कुलभूषण जाधव से हुई बातचीत का ब्यौरा मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान से लौटने के बाद दोनों की मुलाकात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत से होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।