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कश्मीर की तबाही के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार: कश्मीरी नेता PoK के हालात पर जताई चिंता, इमरान सरकार को पाखंडी बताया
Sat, 05 Feb 2022 05:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 05 Feb 2022 05:12 PM IST
सार
जम्मू कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस (JKNIA) के अध्यक्ष महमूद कश्मीरी ने कहा, "अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को अपनी जिंदगी हथियारों के साथ बितानी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि वहां काफी गड़बड़ियां हैं।"
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आए दिन लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
- फोटो : Social Media
विस्तार
जम्मू कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस (JKNIA) के अध्यक्ष महमूद कश्मीरी ने पाकिस्तान की इमरान सरकार पर जुबानी हमला बोला है। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से पांच फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाए जाने को लेकर निशाना साधा और कहा कि कश्मीर की तबाही के लिए ही पाकिस्तान जिम्मेदार है।
महमूद कश्मीरी ने यह बयान जम्मू-कश्मीर के एक और बड़े सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर शब्बीर चौधरी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दिया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के लिए पांच फरवरी एकजुटता दिवस नहीं बल्कि पाखंड दिवस होना चाहिए।"
महमूद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का मुद्दा उठाते हुए कहा, "गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों के पास स्वतंत्रता नहीं है। उन्हें बोलने तक की आजादी नहीं है। पाकिस्तान कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों पर देशद्रोह के केस लगाता है। अगर यही सब वहां हो रहा है तो साफ है कि वो कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता दिखा ही नहीं सकता।"
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उन्होंने आगे कहा, "अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को अपनी जिंदगी हथियारों के साथ बितानी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि वहां काफी गड़बड़ियां हैं। वहां के लोगों को न तो ठीक से बिजली की व्यवस्था मिली है, न ही पानी की। यहां तक कि वहां मंगला बांध का काम तक पूरा नहीं हो पाया है।"
कश्मीर के इस नेता ने पीओके के लोगों से अपील की कि वे पाकिस्तानी सत्ता के खिलाफ खुल कर बोलें। उन्होंने कहा कि कश्मीर का विवाद ही पाकिस्तान ने शुरू किया था और जो भी अधिकारों की मांग करता है या सच बोलता है, उसकी आवाज को पाकिस्तान दबा देता है। बलूच लोगों को भी पाकिस्तान से काफी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
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महमूद कश्मीरी ने यह बयान जम्मू-कश्मीर के एक और बड़े सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर शब्बीर चौधरी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दिया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के लिए पांच फरवरी एकजुटता दिवस नहीं बल्कि पाखंड दिवस होना चाहिए।"
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महमूद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का मुद्दा उठाते हुए कहा, "गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों के पास स्वतंत्रता नहीं है। उन्हें बोलने तक की आजादी नहीं है। पाकिस्तान कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में लोगों पर देशद्रोह के केस लगाता है। अगर यही सब वहां हो रहा है तो साफ है कि वो कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता दिखा ही नहीं सकता।"
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उन्होंने आगे कहा, "अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को अपनी जिंदगी हथियारों के साथ बितानी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि वहां काफी गड़बड़ियां हैं। वहां के लोगों को न तो ठीक से बिजली की व्यवस्था मिली है, न ही पानी की। यहां तक कि वहां मंगला बांध का काम तक पूरा नहीं हो पाया है।"
कश्मीर के इस नेता ने पीओके के लोगों से अपील की कि वे पाकिस्तानी सत्ता के खिलाफ खुल कर बोलें। उन्होंने कहा कि कश्मीर का विवाद ही पाकिस्तान ने शुरू किया था और जो भी अधिकारों की मांग करता है या सच बोलता है, उसकी आवाज को पाकिस्तान दबा देता है। बलूच लोगों को भी पाकिस्तान से काफी समस्याएं पैदा हो रही हैं।